Timing for Narak Chaturdashi पूजा: आज का चौघड़िया मुहूर्त देखें

Summary

नरक चतुर्दशी: यम के दीये का महत्व और पूजा विधि नरक चतुर्दशी का महत्व और त्यौहार हर साल दिवाली से एक दिन पहले मनाया जाने वाला नरक चतुर्दशी का त्योहार विशेष धार्मिक महत्व रखता है। इस दिन को काली चौदस के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन यमराज को समर्पित है, और इस…

Timing for Narak Chaturdashi पूजा: आज का चौघड़िया मुहूर्त देखें

नरक चतुर्दशी: यम के दीये का महत्व और पूजा विधि

नरक चतुर्दशी का महत्व और त्यौहार

हर साल दिवाली से एक दिन पहले मनाया जाने वाला नरक चतुर्दशी का त्योहार विशेष धार्मिक महत्व रखता है। इस दिन को काली चौदस के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन यमराज को समर्पित है, और इस दिन लोग अपने घरों में यम का दीया जलाते हैं। इस दीये को जलाने का उद्देश्य न केवल नकारात्मक ऊर्जा को दूर करना है, बल्कि इसके माध्यम से परिवार के सभी सदस्यों के लिए सुख, शांति और समृद्धि की कामना करना भी है।

नरक चतुर्दशी का त्योहार इस बात का प्रतीक है कि मृत्यु के बाद आत्मा को शांति मिलती है। इस दिन विशेष रूप से लोग अपने पूर्वजों को याद करते हैं और उनके लिए प्रार्थना करते हैं। इस दिन की पूजा विधि बहुत महत्वपूर्ण होती है, और इसे सही समय पर करना आवश्यक है ताकि सभी कार्य अच्छे से संपन्न हो सकें।

यम के दीये का जलाना और पूजा विधि

नरक चतुर्दशी पर यम का दीया जलाना एक प्राचीन परंपरा है। लोग अपने घरों के आंगन में या फिर पूजा स्थल पर इस दीये को रखते हैं। इस दीये को जलाने से न केवल घर से नकारात्मकता दूर होती है, बल्कि यह सुख, शांति और समृद्धि का भी प्रतीक है। इस दिन पूजा करते समय पंडित सौरभ त्रिपाठी जी, जो कि छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश के निवासी हैं, द्वारा बताए गए चौघड़िया मुहूर्त का पालन करना अत्यंत आवश्यक है।

पूजा विधि में सबसे पहले स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए। घर के पूजा स्थान को अच्छे से साफ करके वहां दीपक रखना चाहिए। इसके बाद यमराज की तस्वीर या मूर्ति के सामने फूल, अगरबत्ती और मिठाई अर्पित करनी चाहिए। फिर यम का दीया जलाकर उसकी चारों ओर परिक्रमा करें और यमराज से प्रार्थना करें कि आपके परिवार में सुख और शांति बनी रहे।

चौघड़िया मुहूर्त और पूजा का सही समय

नरक चतुर्दशी की पूजा का सही मुहूर्त जानना अत्यंत महत्वपूर्ण है। चौघड़िया मुहूर्त के अनुसार यदि आप सही समय पर पूजा करते हैं, तो आपकी पूजा अधिक फलदायी होगी। यह मुहूर्त विशेष रूप से ध्यान में रखते हुए निर्धारित किया जाता है ताकि आपके समस्त कार्य सफल हो सकें।

इस दिन की पूजा का महत्व इस बात में भी है कि यह हमें अपने पूर्वजों की याद दिलाता है। हम सभी को अपनी जड़ों से जुड़े रहना चाहिए और अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा अर्पित करनी चाहिए। इस दिन किए गए कार्यों से हमारे जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है।

निष्कर्ष

नरक चतुर्दशी का त्योहार न केवल धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा है, बल्कि यह हमारे जीवन में सकारात्मकता और सुख-शांति लाने का एक साधन भी है। इस दिन यमराज का दीया जलाना और सही मुहूर्त का पालन करना सभी के लिए भाग्य और समृद्धि का द्वार खोल सकता है। यदि आप इस दिन की पूजा विधि का पालन करते हैं, तो निश्चित ही आपके जीवन में खुशियों का आगमन होगा।

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