Submarine: भारत का स्वदेशी ‘मह’ नौसेना में शामिल, पाकिस्तानी पनडुब्बियों पर नजर 24×7

Summary

भारत की रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक नई गति मिली है, जब भारतीय नौसेना ने ‘महé’ का औपचारिक रूप से परिचय कराया। यह आठ एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW SWC) की श्रृंखला में पहला जहाज है। इस उद्घाटन के साथ ही नौसेना की अंडरवाटर लड़ाई की क्षमताओं में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई…

Submarine: भारत का स्वदेशी ‘मह’ नौसेना में शामिल, पाकिस्तानी पनडुब्बियों पर नजर 24×7

भारत की रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक नई गति मिली है, जब भारतीय नौसेना ने ‘महé’ का औपचारिक रूप से परिचय कराया। यह आठ एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW SWC) की श्रृंखला में पहला जहाज है। इस उद्घाटन के साथ ही नौसेना की अंडरवाटर लड़ाई की क्षमताओं में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है।

औपचारिक हस्तांतरण समारोह

यह जहाज एक समारोह में औपचारिक रूप से सौंपा गया, जहां महé के कमांडिंग ऑफिसर-डिज़ाइनेट, कमांडर अमित चंद्र चौबे, और कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) के निदेशक संचालन, डॉ. एस. हरिकृष्णन के बीच स्वीकृति दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए गए।

इस कार्यक्रम में कई वरिष्ठ नौसेना अधिकारियों ने भाग लिया, जिसमें पश्चिमी नौसेना कमान के मुख्य स्टाफ अधिकारी, तकनीकी, रियर एडमिरल आर. अधिस्रीनिवासन, युद्धपोत उत्पादन के अधीक्षक, कमोडोर अनुप मेनन, और अन्य अधिकारी शामिल थे जो नौसेना की परिचालन तत्परता और जहाज की कमीशनिंग की निगरानी कर रहे थे।

डिज़ाइन और क्षमताएँ

महé को स्वदेशी रूप से डिज़ाइन और निर्मित किया गया है और यह डिट नॉर्स्के वेरिटास (DNV) के वर्गीकरण मानकों के तहत है। इसकी लंबाई **78 मीटर** है और यह डीजल इंजन-जलजेट प्रणोदन प्रणाली द्वारा संचालित सबसे बड़ा भारतीय नौसैनिक जहाज है। यह संरचना इसकी गति, लचीलापन और संचालन की क्षमता को बढ़ाती है, जिससे यह उथले जल में प्रभावी ढंग से निगरानी और एंटी-सबमरीन ऑपरेशंस कर सकता है।

महé को कई भूमिकाओं के लिए तैयार किया गया है, जैसे कि अंडरवाटर निगरानी, खोज और बचाव ऑपरेशंस, कम तीव्रता वाले समुद्री मिशन, और माइन-लेइंग। इसे आधुनिक सेंसर और उन्नत संचार प्रणालियों से लैस किया गया है, जो नौसेना की तटीय रक्षा और एंटी-सबमरीन वारफेयर क्षमताओं को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएगा, इस प्रकार भारतीय महासागर में तेज़ और निर्णायक कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम

अधिकारीयों ने बताया कि महé गवर्नमेंट के आत्मनिर्भर भारत दृष्टिकोण का प्रतीक है, जिसमें **90 प्रतिशत** से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। अधिकांश सामग्री, मशीनरी, सेंसर और ऑनबोर्ड सिस्टम भारतीय निर्माताओं से प्राप्त किए गए हैं, जो देश के रक्षा औद्योगिक आधार की परिपक्वता और नौसेना की अंडरसी युद्ध में आत्मनिर्भरता की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

स्वदेशीकरण अभियान में मील का पत्थर

महé की डिलीवरी भारतीय नौसेना के स्वदेशीकरण अभियान में एक और मील का पत्थर है और इसकी शैलो-वॉटर लड़ाई की फ्लीट को मजबूत बनाती है। ASW SWC श्रृंखला के बाकी सात जहाजों का निर्माण CSL में चल रहा है और इनकी चरणबद्ध डिलीवरी आगामी वर्षों में होने की योजना है।

(आईएएनएस इनपुट के साथ)