जयपुर: भाजपा नेAnta विधानसभा उपचुनाव के लिए चुनावी तैयारियों को तेज किया
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अंटा विधानसभा उपचुनाव के लिए अपनी चुनावी तैयारियों को तेज कर दिया है। पार्टी ने अपने पूर्ण चुनाव समिति की घोषणा की है और साथ ही अपने स्टार प्रचारकों की सूची भी जारी की है। इस बार भाजपा ने झालावाड़-बारां के सांसद दुष्यंत सिंह को चुनाव प्रभारी नियुक्त किया है, जो पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के पुत्र हैं। यह नियुक्ति इस महत्वपूर्ण चुनाव में भाजपा की गंभीरता को दर्शाती है।
भाजपा चुनाव समिति और स्थानीय रणनीति
नवगठित चुनाव समिति में दो सांसदों, नौ विधायक और दो मंत्रियों को शामिल किया गया है, जो पार्टी की व्यापक रणनीति को दर्शाता है। दुष्यंत सिंह के साथ-साथ मंत्री जोगाराम पटेल को चुनाव सह-प्रभारी बनाया गया है। इसके अलावा, विधायक श्रीचंद कृपालानी और जिला प्रभारी छगन माहुर को संयुक्त प्रभारी के रूप में कार्य सौंपा गया है। नरेश सिकरवार और महेंद्र कुमावत को चुनाव प्रबंधन और लॉजिस्टिक्स का देखभाल करने की जिम्मेदारी दी गई है।
अंटा विधानसभा सीट का राजनीतिक महत्व
अंटा विधानसभा सीट भाजपा के लिए विशेष राजनीतिक महत्व रखती है, विशेषकर वसुंधरा राजे और उनके परिवार के लिए। यह सीट झालावाड़-बारां लोकसभा क्षेत्र में स्थित है, जहां दुष्यंत सिंह वर्तमान में सांसद हैं। यह सीट लंबे समय से राजे का राजनीतिक गढ़ रही है। दुष्यंत को यह जिम्मेदारी सौंपकर भाजपा स्थानीय नेटवर्क का लाभ उठाने और क्षेत्र में अपनी आधारभूत स्थिति को मजबूत करने का प्रयास कर रही है।
उपचुनाव को लेकर राजनीतिक प्रतिष्ठा का सवाल
पार्टी के सूत्रों का मानना है कि यह उपचुनाव केवल एक स्थानीय प्रतियोगिता नहीं है, बल्कि राजस्थान में कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए प्रतिष्ठा का मामला है। विशेष रूप से, यह आगामी पंचायत और नगर निकाय चुनावों को प्रभावित कर सकता है।
मजबूत चुनावी टीम का गठन
भाजपा ने ग्राउंड ऑपरेशंस के लिए एक मजबूत अभियान टीम का गठन किया है। वरिष्ठ नेताओं में राज्यसभा सांसद राजेंद्र गेहलोत, मंत्री मंजू बागमार, विधायक राधेश्याम बैरवा, सुरेश धाकड़, विश्वनाथ मेघवाल, अनिता भादेल, प्रताप सिंहवी, चन्द्रभान सिंह अक्या, और लालित मीना शामिल हैं। इसके साथ ही, पूर्व विधायक बनवारी लाल सिंघल और वरिष्ठ पार्टी नेता तुलसाराम धाकड़ भी अभियान प्रयासों की अगुवाई करेंगे।
चुनाव की तैयारियों में तेजी
चुनाव प्रणाली सक्रिय हो चुकी है और स्थानीय राजनीतिक गतिशीलता भी तेज हो रही है। सभी की निगाहें अब इस बात पर हैं कि दुष्यंत सिंह के नेतृत्व में भाजपा की समन्वित पहल, अंटा के लिए मुकाबले को किस तरह आकार देगी। भाजपा ने इस बार सभी संसाधनों का उपयोग करते हुए चुनावी मैदान में उतरने का निर्णय लिया है, जिससे उनकी जीत की संभावनाएं बढ़ती हैं।
अंत में, यह उपचुनाव भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। भाजपा ने अपनी रणनीति को मजबूत किया है और अब देखना यह है कि क्या यह प्रयास चुनावी नतीजों में रंग लाएगा या नहीं।
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