भोजपुरी लोक संगीत की जानी-मानी गायिका कल्पना पटवारी ने छठ पर्व के अवसर पर एक नई और भावुक रचना प्रस्तुत की है, जिसका शीर्षक है “माई के अनादर।” यह गीत न केवल भक्ति से संबंधित है, बल्कि इसमें एक गहरा सामाजिक संदेश भी छुपा हुआ है। इसमें इस बात को उजागर किया गया है कि कैसे आज के समाज में कई लोग अपनी वृद्ध माताओं को वृद्धाश्रम में भेज देते हैं। इस गाने के माध्यम से मां के प्रति सम्मान और स्नेह की कमी को दर्शाया गया है, जो दर्शकों के दिल को छू रहा है।
यहां देखें गाने का म्यूजिक वीडियो-
मां के दर्द की कहानी उजागर करता छठ गीत
गीत “माई के अनादर” में मां की वह पीड़ा दिखाई गई है, जिसने अपने बच्चों के लिए पूरे जीवनभर त्याग किया, लेकिन बुढ़ापे में उसे अकेलेपन का सामना करना पड़ता है। कल्पना पटवारी ने इस गीत को इतनी गहराई एवं संवेदना के साथ गाया है कि इसे सुनने के बाद किसी की भी आंखों में आंसू आ जाएं। इस गीत के बोल अशोक शिवपुरी ने लिखे हैं, जबकि संगीत का संयोजन दीपक ठाकुर और कल्पना पटवारी ने किया है।
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वीडियो की टीम और कास्ट के बारे में जानकारी
इस गीत का निर्देशन पवन पाल ने किया है। वीडियो की शूटिंग एक वृद्धाश्रम में की गई है, जहां मांओं के दर्द और भावनाओं को सुंदरता से प्रदर्शित किया गया है। इस वीडियो में शैलेन्द्र सिंह, शारदा सिंह और कल्पना पटवारी ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं। यह वीडियो दर्शकों को मां के प्रति संवेदनशीलता और सम्मान का संदेश देने में सफल हुआ है।
गीत को मिले व्यूज और दर्शकों की प्रतिक्रियाएं
“माई के अनादर” को यूट्यूब चैनल MUSIC BOX Kalpana Pattowary पर जारी किया गया है, जिसे खबर लिखे जाने तक 7,000 से अधिक व्यूज प्राप्त हो चुके हैं। इसके कमेंट सेक्शन में दर्शकों ने इस गीत की सराहना की है और इसे ‘सबसे भावनात्मक छठ गीत’ करार दिया है। लोग इस गीत के माध्यम से मां के प्रति सम्मान और स्नेह का एक बड़ा संदेश फैलाने की अपील कर रहे हैं।
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छठ पर्व और उसकी महत्ता
छठ पर्व विशेष रूप से बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है, जो सूर्य देवता और छठी मैया की पूजा का पर्व है। इस अवसर पर भक्तगण कठिन व्रत रखते हैं और भगवान सूर्य के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। छठ पर्व का मुख्य उद्देश्य समाज में एकता और प्रेम को बढ़ावा देना है। इस पर्व के दौरान महिलाएं और पुरुष मिलकर सूर्य को अर्घ्य देते हैं, जिससे प्राकृतिक संसाधनों और जीवन के प्रति आभार व्यक्त किया जाता है।
कल्पना पटवारी का यह गीत इस पर्व की भावना को और भी गहरा बनाता है, क्योंकि यह मां के प्रति श्रद्धा और सम्मान की बात करता है। आज के युग में जहां परिवारों में बिछड़ाव बढ़ रहा है, ऐसे में इस तरह का गीत समाज को एक नई दिशा दिखाने का कार्य करता है।
निष्कर्ष
“माई के अनादर” एक ऐसा गीत है जो न केवल छठ पर्व की भक्ति को उजागर करता है, बल्कि समाज में मां के प्रति संवेदनशीलता का संदेश भी देता है। कल्पना पटवारी की आवाज एवं गीत के बोल सुनकर हर कोई अपनी मां की याद में खो जाता है। इस गीत के माध्यम से हम सभी को यह सोचने पर मजबूर करती है कि हमें अपने बुजुर्गों का कैसे सम्मान करना चाहिए।
इस प्रकार, यह गीत न केवल एक भक्ति गीत है, बल्कि यह एक सामाजिक चेतना का प्रतीक भी है, जो हमें अपने परिवार और विशेषकर मां के प्रति अपने कर्तव्यों को याद दिलाता है।





