छठ पूजा एक ऐसी महत्वपूर्ण धार्मिक परंपरा है, जो सूर्य देव और छठी मैया के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त करने का अनूठा माध्यम है। यह चार दिवसीय अनुष्ठान विशेष रूप से बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है, लेकिन इसकी पवित्रता और अनुशासन के कारण यह अब दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों में भी बड़े धूमधाम से मनाया जाने लगा है। व्रती इस अवसर पर उगते सूर्य को अर्घ्य देकर 36 घंटे के निर्जला व्रत का पारण करते हैं। यह उषा अर्घ्य नए दिन की शुरुआत, आरोग्य और संतान की लंबी उम्र की कामना का प्रतीक है। वर्ष 2025 में छठ पूजा का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण दिन **मंगलवार, 28 अक्टूबर 2025** को है।
इस पर्व के महत्व को समझने के लिए, वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से जानेंगे कि विभिन्न शहरों में उषा अर्घ्य का समय क्या है।
छठ पूजा सूर्योदय का समय (Chhath Puja Sunrise Time 2025)
छठ पूजा में सूर्योदय और सूर्यास्त का समय शहर के अनुसार भिन्न होता है। व्रतियों को अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार अर्घ्य देना चाहिए। वर्ष 2025 में, उषा अर्घ्य का दिन **28 अक्टूबर, मंगलवार** है।

| शहर का नाम | उषाकाल अर्घ्य का समय |
| पटना (बिहार) | सुबह 06:00 बजे से 06:25 बजे |
| दिल्ली (राजधानी) | सुबह 06:30 बजे |
| मुंबई (महाराष्ट्र) | सुबह 06:35 बजे से 06:40 बजे |
| लखनऊ (उत्तर प्रदेश) | सुबह 06:20 बजे से 06:25 बजे |
| इलाहाबाद/प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) | सुबह 06:15 बजे से 06:20 बजे |
| झारखंड (रांची) | सुबह 05:50 बजे से 06:00 बजे |
| कोलकाता | सुबह 05:39 बजे से 06:00 बजे |
| गाजियाबाद | सुबह 06:29 बजे |
| प्रयागराज | सुबह 06:08 बजे |
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छठ पूजा 2025 उषा अर्घ्य का महत्व
उषा अर्घ्य नई शुरुआत और सकारात्मकता का प्रतीक है। डूबते सूर्य को अर्घ्य देना जीवन के अंत और त्याग को दर्शाता है, जबकि उगते सूर्य को अर्घ्य देना जीवन में आने वाले प्रकाश, आशा और नई ऊर्जा का स्वागत करता है। व्रती इस समय सूर्य देव से अपने परिवार के लिए सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और लंबी आयु का आशीर्वाद मांगते हैं। यह मान्यता है कि जिस तरह सूर्य हर सुबह अंधकार को मिटाकर आता है, उसी प्रकार छठी मैया और सूर्य देव उनके जीवन के सभी कष्टों को दूर करेंगे।

उषा अर्घ्य देना 36 घंटे के निर्जला व्रत का सफल समापन माना जाता है। उषा अर्घ्य देने के बाद ही व्रती महिलाएं और पुरुष घाट पर प्रसाद ग्रहण करके अपना व्रत खोलते हैं। यह क्षण व्रत के संकल्प की पूर्ति और ईश्वर के प्रति कृतज्ञता को दर्शाता है। यह दिखाता है कि व्रती ने सभी बाधाओं को पार कर लिया है और अब उसे दैवीय शक्ति का आशीर्वाद मिल गया है।
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सामाजिक रूप से उषा अर्घ्य पारिवारिक एकता को मजबूत करता है क्योंकि पूरा परिवार घाट पर एकत्र होता है। छठ पर्व में सूर्य की इन पहली किरणों की पूजा करके व्रती प्रकृति के प्रति सम्मान और अपनी सेहत का ध्यान रखने का संदेश देते हैं। इसलिए, उषा अर्घ्य केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि जीवन में त्याग, आशा और सकारात्मकता का एक महान संदेश है।
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