हिंदू धर्म में अनेक तीज-त्योहार मनाए जाते हैं, लेकिन कुछ पर्व हैं जो अपनी विशेषता और महत्व के कारण सभी के बीच एक समान रूप से मनाए जाते हैं। गोवर्धन पूजा ऐसा ही एक पर्व है, जिसे दीपावली के दूसरे दिन मनाया जाता है। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा के निवासी पंडित सौरभ त्रिपाठी के अनुसार, “इस वर्ष गोवर्धन पूजा 22 अक्टूबर 2025 को मनाई जाएगी। इस दिन हर घर में विशेष रूप से अन्नकूट बनाया जाता है और उसे भगवान श्री कृष्ण को समर्पित किया जाता है। देश के विभिन्न हिस्सों में इस पर्व को मनाने के तरीके अलग-अलग होते हैं, लेकिन ब्रज भूमि जैसे वृंदावन, गोकुल, मथुरा, नंद गांव और बरसाना में इस दिन भव्य आयोजन होते हैं। लोग इस दिन गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा भी करते हैं।”
इस वर्ष दिवाली 20 अक्टूबर को है, जबकि गोवर्धन पूजा 22 अक्टूबर को है, जिससे लोगों में तिथियों को लेकर कुछ भ्रम उत्पन्न हो रहा है। हमने पंडित जी से इस विषय में जानकारी लेते हुए यह भी पूछा कि गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त कब है और इसके पीछे का कारण क्या है।
गोवर्धन पूजा कब है? (Govardhan Puja Kab Hai 2025)
गोवर्धन पूजा का त्योहार हमेशा कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की परेवा को मनाया जाता है। इस वर्ष अमावस्या की तिथि लंबी पड़ रही है, जिसके कारण दिवाली दो दिन मनाई जाएगी। हालांकि, लक्ष्मी पूजन 20 अक्टूबर की रात्रि को होगा। पंडित जी के अनुसार, “इस पर्व की उदया तिथि 22 अक्टूबर को है। चंद्रमा के उदय से पूर्व यह पर्व 21 अक्टूबर को भी मनाया जा सकता है, लेकिन पूजा के लिए शुभ मुहूर्त 22 अक्टूबर का ही है। दरअसल, इस पर्व को चंद्रमा के उदय से पहले ही मनाना चाहिए।”
गोवर्धन पूजा का महत्व न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से है, बल्कि यह सामाजिक एकता और बंधुत्व का प्रतीक भी है। इस दिन लोग एकत्रित होकर भोजन का आनंद लेते हैं और एक-दूसरे के साथ मिलकर खुशी मनाते हैं। इस अवसर पर घरों में विशेष सजावट की जाती है और भगवान कृष्ण की कथा सुनाई जाती है।
गोवर्धन पूजा के संबंध में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि यह पर्व केवल श्रद्धा से नहीं, बल्कि प्रेम और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इसी दिन लोग अपने-अपने घरों में गिरिराज पर्वत का स्वरूप बनाते हैं और उसकी पूजा करते हैं। इसके साथ ही गोबर से बना यह स्वरूप पर्यावरण के प्रति भी एक संदेश देता है कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना आवश्यक है।
गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त
गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त 22 अक्टूबर को सुबह 6:25 बजे से शुरू होकर सुबह 8:40 बजे तक रहेगा। इसके अलावा, शाम को 3:29 बजे से लेकर 5:45 बजे तक भी पूजा करने का शुभ मुहूर्त है।
गोवर्धन की पूजा के शुभ मुहूर्त को लेकर नियम
- गोवर्धन पूजा हर बार परेवा के दिन ही मनाई जाती है। यह दिवाली के दूसरे दिन पड़ती है, लेकिन यदि सूर्यास्त के बाद प्रतिपदा पड़ रही है, तो पर्व को एक दिन पहले मनाया जाता है। वहीं, यदि प्रतिपदा सूर्योदय के समय पड़ रही है, तो गोवर्धन पूजा उसी दिन होती है।
- इस दिन गोबर से श्री कृष्ण के गोवर्धन स्वरूप को बनाया जाता है और उसे फूलों से सजाकर पूजा की जाती है। इसके साथ ही इस दिन अन्नकूट का भोग भी अर्पित किया जाता है।
- इस दिन भगवान विश्वकर्मा की भी पूजा की जाती है। कई लोग अपने कार्यस्थल पर औजारों और अन्य चीजों की पूजा भी करते हैं।





