खंडवा में मानसून की मार: मूसलाधार बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त, कई गांवों का संपर्क कटा
मध्य प्रदेश में मानसून के आगमन के साथ ही खंडवा जिले में कुदरत का कहर देखने को मिल रहा है। पिछले कुछ दिनों से हो रही लगातार मूसलाधार बारिश ने आम जनजीवन को पूरी तरह से पटरी से उतार दिया है। जिले के कई क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश के कारण हालात इतने बिगड़ गए हैं कि नदी-नाले उफान पर हैं और कई ग्रामीण इलाकों का जिला मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह टूट चुका है। प्रशासन की ओर से लगातार सतर्कता बरतने की अपील की जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत बेहद गंभीर बनी हुई है।
खंडवा जिले में बारिश का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है, जिससे शहरी और ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों में हाहाकार मचा हुआ है। सड़कों पर घुटनों तक पानी जमा होने से यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जलभराव के कारण न केवल कामकाज ठप हो गया है, बल्कि घरों में भी पानी घुसने से लोगों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। जिला प्रशासन ने आपदा प्रबंधन की टीमों को अलर्ट पर रखा है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटा जा सके।
यह भी पढ़ें– Ujjain: अखाड़ा परिषद में सुलह, सिंहस्थ 2028 को भव्य बनाने के लिए सभी एकजुट
यह भी पढ़ें– Transfer: इंदौर नगर निगम में विवादित नियुक्ति, फर्जीवाड़े के आरोपी को मिली बड़ी जिम्मेदारी
यह भी पढ़ें– Missing: एयरफोर्स अधिकारी की 12 साल की बेटी स्कूल से लापता, CCTV में दिखी आखिरी झलक
पुनासा में किसानों की उम्मीदों पर फिरा पानी
खंडवा के पुनासा क्षेत्र में बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। खेतों में पानी भर जाने से खड़ी फसलें पूरी तरह जलमग्न हो गई हैं, जिससे क्षेत्र के अन्नदाताओं में भारी मायूसी है। कई किसानों की मेहनत की कमाई पानी के तेज बहाव में बह गई है। स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रिहायशी इलाकों में भी घरों के भीतर कमर तक पानी भर गया है। घर में रखा अनाज, कीमती सामान और जरूरी दस्तावेज जलमग्न होने से लोग बेहाल हैं। प्रशासन अब प्रभावित इलाकों में सर्वे कराने की तैयारी में है ताकि नुकसान का आकलन किया जा सके।
जावर क्षेत्र: जान जोखिम में डालकर पुलिया पार करने को मजबूर ग्रामीण
जावर क्षेत्र में मानसून की पहली बड़ी बारिश ने विकास के दावों की पोल खोल दी है। यहाँ कई प्रमुख पुल-पुलिया पानी में डूबे हुए हैं, जिससे आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है। सहेजला, पीपलकोटा, मंडला, सरगांव, रोहिणी, धनगांव, गोहलारी, सकली और बोदूल जैसे करीब एक दर्जन गांवों का संपर्क खंडवा मुख्य मार्ग से पूरी तरह कट चुका है। मजबूरी में ग्रामीण जान जोखिम में डालकर उफनते नालों और पुलियाओं को पार कर रहे हैं, जो किसी भी वक्त बड़े हादसे को न्योता दे सकते हैं।
- संपर्क विच्छेद: करीब एक दर्जन गांवों का मुख्य सड़क मार्ग से संपर्क कटा।
- अन्नदाताओं का नुकसान: पुनासा में फसलें जलमग्न, किसानों की मेहनत पर फिरा पानी।
- प्रशासनिक चुनौती: उफनते नालों को पार करने को मजबूर ग्रामीण, प्रशासन की नजर।
- आवागमन ठप: पंधाना-खंडवा मार्ग पर घंटों लगा रहा जाम, यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें।
पंधाना-खंडवा मार्ग पर घंटों थमा रहा यातायात
भारी बारिश के कारण पंधाना-खंडवा मुख्य मार्ग पर भी स्थिति गंभीर रही। मार्ग पर जलभराव के चलते यातायात करीब 3 घंटे तक पूरी तरह बाधित रहा, जिससे राहगीरों और यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सड़क के दोनों ओर गाड़ियों की लंबी कतारें देखी गईं। हालांकि, स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल की मदद से पानी की निकासी के प्रयास किए गए, जिसके बाद धीरे-धीरे यातायात बहाल हो सका। मौसम विभाग ने आगामी दिनों में भी बारिश की संभावना जताई है, जिसे देखते हुए जिला प्रशासन ने नदी-नालों के पास न जाने की चेतावनी जारी की है।
खंडवा के इन हालातों ने एक बार फिर बुनियादी ढांचे की कमजोरी को उजागर कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में पुलियाओं की ऊंचाई कम होना और जल निकासी की उचित व्यवस्था न होना इस आपदा का मुख्य कारण माना जा रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि बारिश थमने के बाद शासन-प्रशासन प्रभावित परिवारों और किसानों को राहत देने के लिए क्या कदम उठाता है। फिलहाल, खंडवा के लोग आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं और बारिश के रुकने की प्रार्थना कर रहे हैं।





