उज्जैन में संतों की बड़ी पहल: सिंहस्थ 2028 की तैयारी के लिए शैव और वैष्णव अखाड़ों में हुआ ऐतिहासिक समझौता
धार्मिक नगरी उज्जैन में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है। लंबे समय से चल रहे शैव और वैष्णव संप्रदायों के बीच के आपसी मतभेद अब इतिहास बन चुके हैं। आगामी सिंहस्थ महाकुंभ 2028 को विश्व पटल पर एक भव्य, दिव्य और सुरक्षित आयोजन के रूप में स्थापित करने के संकल्प के साथ, संतों ने एक बड़ा निर्णय लिया है। पूर्व में भंग कर दी गई ‘स्थानीय अखाड़ा परिषद’ को एक बार फिर से पुनर्जीवित कर दिया गया है। इस कदम को धर्मनगरी के विकास और आने वाले महाकुंभ की तैयारियों के लिहाज से एक मील का पत्थर माना जा रहा है।
उज्जैन में आयोजित एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक में शैव, वैष्णव, उदासी और नाथ संप्रदाय के सभी स्थानीय अखाड़ों के संत, महंत और महामंडलेश्वर एक मंच पर एकजुट दिखाई दिए। इस बैठक की अध्यक्षता अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्र पुरी महाराज और स्थानीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत डॉ. रामेश्वर दास महाराज ने संयुक्त रूप से की। इस एकता को संतों के बीच आपसी सौहार्द और समन्वय की एक नई मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है, जो आने वाले समय में सिंहस्थ के सफल आयोजन के लिए बेहद जरूरी है।
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एकता का संदेश: प्रशासन के साथ बेहतर समन्वय की तैयारी
बैठक में मौजूद संतों ने स्पष्ट किया कि उनका एकमात्र लक्ष्य सिंहस्थ 2028 को ऐतिहासिक बनाना है। श्रीमहंत रवींद्र पुरी महाराज ने इस अवसर पर कहा कि सभी संप्रदायों के बीच के पुराने गतिरोध अब समाप्त हो चुके हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब संतों की पूरी टोली मुख्यमंत्री के विजन के अनुरूप उज्जैन में चल रहे विभिन्न घाटों के निर्माण और अन्य विकास कार्यों का स्थलीय निरीक्षण करेगी। संतों का यह समूह शासन और प्रशासन के साथ कदम से कदम मिलाकर काम करेगा ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की असुविधा न हो।
विवादों से परे: केवल सिंहस्थ पर फोकस
राष्ट्रीय स्तर पर अखाड़ा परिषद में अध्यक्ष पद को लेकर चल रहे विवादों और चर्चाओं के बीच, स्थानीय स्तर पर संतों ने अपनी स्पष्ट कार्यशैली को सामने रखा है। स्थानीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत डॉ. रामेश्वर दास महाराज ने मीडिया से बातचीत में स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि अखिल भारतीय स्तर की वैचारिक या संगठनात्मक लड़ाइयों से स्थानीय परिषद का कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि उज्जैन के संत पूरी तरह एक हैं और उनका पूरा ध्यान केवल और केवल सिंहस्थ के सफल प्रबंधन और प्रशासनिक समन्वय पर केंद्रित है।
सिंहस्थ 2028 की भव्य तैयारियों के मुख्य बिंदु:
- स्थानीय अखाड़ा परिषद का पुनर्गठन: संप्रदायों के बीच एकता को बढ़ावा देने के लिए परिषद को पुनः सक्रिय किया गया है।
- विकास कार्यों की निगरानी: संत समाज अब घाटों और बुनियादी ढांचे के निर्माण कार्यों का सीधा निरीक्षण करेगा।
- प्रशासनिक समन्वय: सिंहस्थ के दौरान भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के लिए संतों और प्रशासन के बीच एक मजबूत कड़ी का निर्माण।
- आधुनिक तकनीक का प्रयोग: सिंहस्थ 2028 में एआई (AI) तकनीक, ड्रोन सर्विलांस और आधुनिक ट्रैफिक प्लानिंग का उपयोग किया जाएगा।
- 3000 हेक्टेयर पार्किंग: श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशाल पार्किंग क्षेत्र की निगरानी अत्याधुनिक उपकरणों से की जाएगी।
यह एकता उज्जैन के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सिंहस्थ महाकुंभ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। प्रशासन पहले ही 3000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में पार्किंग की व्यवस्था और एआई-आधारित भीड़ नियंत्रण तकनीक पर काम कर रहा है। अब संतों के एक साथ आने से इन योजनाओं को धरातल पर उतारना और अधिक आसान हो जाएगा। उज्जैन के आमजन और श्रद्धालु भी संतों की इस पहल का स्वागत कर रहे हैं, क्योंकि इससे शहर के विकास और व्यवस्था में एक सकारात्मक बदलाव की उम्मीद जगी है।
आने वाले चार वर्षों में उज्जैन को सिंहस्थ के लिए तैयार करने का जो संकल्प संतों ने लिया है, वह निश्चित रूप से धर्मनगरी की छवि को और अधिक सशक्त बनाएगा। प्रशासन और संतों का यह ‘सुपर कोऑर्डिनेशन’ आने वाले महाकुंभ को न केवल सुरक्षित बनाएगा, बल्कि दुनिया भर से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए एक सुखद अनुभव भी सुनिश्चित करेगा।





