ओंकारेश्वर में ‘स्टैच्यू ऑफ वननेस’ पर संकट: मुख्य पिलर में तकनीकी खामी से हड़कंप
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में स्थित ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी के तट पर स्थापित आदिगुरु शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा, जिसे ‘स्टैच्यू ऑफ वननेस’ के नाम से जाना जाता है, अब एक गंभीर विवाद के घेरे में आ गई है। यह प्रतिमा न केवल अपनी विशालता के लिए जानी जाती है, बल्कि यह सरकार की एक महत्वाकांक्षी परियोजना का केंद्र बिंदु भी है। हालिया रिपोर्टों में इस प्रतिमा के मुख्य पिलर में गंभीर तकनीकी खामी की बात सामने आई है, जिसने न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि सरकार के शीर्ष गलियारों में भी खलबली मचा दी है। चर्चा है कि पिलर एक तरफ झुक गया है, जो सुरक्षा के लिहाज से बेहद चिंताजनक है।
इंजीनियरिंग और निर्माण के मानकों में हुई इस कथित लापरवाही का मामला अब काफी तूल पकड़ चुका है। सूत्रों के अनुसार, इस पूरे प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए इसकी शिकायत देश की प्रमुख जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) तक पहुंच चुकी है। निर्माण कार्य में बरती गई भारी कोताही और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के आरोपों ने इस परियोजना की गुणवत्ता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि जांच एजेंसियां इस मामले में क्या कदम उठाती हैं और भविष्य में इस विशालकाय प्रतिमा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या सुरक्षात्मक उपाय किए जाते हैं।
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स्ट्रेस रेशियो का खतरे के निशान को पार करना
तकनीकी विशेषज्ञों और परियोजना से जुड़े सूत्रों के हवाले से जो आंकड़े सामने आए हैं, वे बेहद डराने वाले हैं। बताया जा रहा है कि प्रतिमा के मुख्य पिलर पर पड़ने वाला दबाव यानी ‘स्ट्रेस रेशियो’ 0.85 के निर्धारित मानक से बढ़कर 1.244 तक पहुंच चुका है। तकनीकी भाषा में, स्ट्रेस रेशियो का इस स्तर तक बढ़ना स्पष्ट संकेत है कि पिलर प्रतिमा के विशालकाय वजन और बाहरी दबाव को झेलने में सक्षम नहीं है। यह स्थिति निर्माण के दौरान हुई डिजाइनिंग या गुणवत्ता नियंत्रण में बड़ी चूक की ओर इशारा करती है।
निर्माण क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी भी स्ट्रक्चर का स्ट्रेस रेशियो तय सीमा से अधिक होता है, तो वह भविष्य में बड़े हादसे का कारण बन सकता है। ‘स्टैच्यू ऑफ वननेस’ के मामले में, इतनी बड़ी तकनीकी खामी का सामने आना यह दर्शाता है कि निर्माण के दौरान सुरक्षा और तकनीकी मानकों को दरकिनार किया गया है। प्रतिमा के झुकने की खबरें आम लोगों और श्रद्धालुओं के बीच भी चिंता का विषय बनी हुई हैं, जो इस भव्य प्रतिमा की सुरक्षा को लेकर आशंकित हैं।
2300 करोड़ की परियोजना और भ्रष्टाचार के आरोप
आदिगुरु शंकराचार्य की यह प्रतिमा महज एक मूर्ति नहीं, बल्कि एक विशाल ‘एकात्मधाम’ परियोजना का हिस्सा है। इस पूरी परियोजना पर सरकार द्वारा लगभग 2300 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जिसमें प्रतिमा निर्माण पर ही करीब 200 करोड़ रुपये का बजट व्यय हुआ है। इतने विशाल बजट और देश-विदेश के शीर्ष इंजीनियरों की निगरानी में बनी इस संरचना में इतनी बड़ी तकनीकी खराबी का आना भ्रष्टाचार के एक बड़े सिंडिकेट की ओर इशारा करता है।
परियोजना से जुड़े मुख्य बिंदु:
- कुल बजट: लगभग 2300 करोड़ रुपये का विशाल निवेश।
- प्रतिमा निर्माण: 108 फीट ऊंची प्रतिमा पर 200 करोड़ रुपये का खर्च।
- तकनीकी चूक: मुख्य पिलर का स्ट्रेस रेशियो 0.85 से बढ़कर 1.244 होना।
- सुरक्षा जोखिम: पिलर के एक तरफ झुकने से प्रतिमा की स्थिरता पर सवाल।
- जांच की मांग: मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई जांच की चर्चाएं तेज।
तेज हवाएं झेलने का दावा और जमीनी हकीकत
दावा किया गया था कि यह प्रतिमा प्राकृतिक आपदाओं और तेज हवाओं को झेलने में पूरी तरह सक्षम है। हालांकि, अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह प्रतिमा अपना खुद का वजन संभालने में भी असमर्थ है? जिस तरह से पिलर में झुकाव की खबरें आ रही हैं, वह उन दावों पर पानी फेरती हुई नजर आ रही है जो निर्माण के समय किए गए थे। यह घटना न केवल सरकारी धन की बर्बादी का मामला है, बल्कि यह उस आस्था के साथ भी खिलवाड़ है जो लाखों लोग इस स्थान से जोड़कर देखते हैं।
फिलहाल, पूरे प्रशासनिक अमले में चुप्पी साधी गई है, लेकिन तकनीकी रिपोर्टों ने जो पोल खोली है, उससे यह स्पष्ट है कि इस मामले में जवाबदेही तय होना अनिवार्य है। क्या यह केवल एक तकनीकी चूक है या फिर निर्माण सामग्री और प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है? इन सवालों के जवाब अब जांच के बाद ही मिल पाएंगे, लेकिन फिलहाल ‘स्टैच्यू ऑफ वननेस’ की सुरक्षा पर मंडरा रहा खतरा प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।





