राजस्थान में मौसम के अनियमित बदलावों के चलते, बंगाल की खाड़ी में आए चक्रवात मोंथा और अरब सागर में बने एक मौसम प्रणाली के प्रभाव से भारी बारिश हुई है, जिसने राज्य में तापमान में 8 डिग्री सेल्सियस की कमी कर दी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य के 23 जिलों के लिए बारिश का अलर्ट जारी किया है। इस अप्रत्याशित मौसम ने कृषि क्षेत्र में व्यापक संकट पैदा कर दिया है।
राज्य में अचानक ठंड की लहर
सोमवार की दोपहर से शुरू हुई लगातार बारिश ने राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्र में अप्रत्याशित ठंडक पहुंचा दी है, जिससे अक्टूबर के अंत में तापमान सामान्य से काफी नीचे चला गया है।
तापमान में गिरावट: राजस्थान के कई क्षेत्रों में दिन का तापमान 6 से 8 डिग्री सेल्सियस तक सामान्य औसत से कम चल रहा है। यह स्थिति किसानों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
सभी जगह ठंडक: कोटा जैसे शहरों में तापमान लगभग समान है, यहां अधिकतम तापमान 21.9 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 21.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है, जो दिन और रात दोनों समय ठंडे मौसम को दर्शाता है।
प्रभावित क्षेत्र: जयपुर, कोटा, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, अलवर, भीलवाड़ा, अजमेर, करौली और दौसा जैसे शहरों में तापमान में अचानक गिरावट आई है, साथ ही बादल और ठंडी हवाएं चल रही हैं।
भारी बारिश के लिए रिकॉर्ड और पूर्वानुमान
राज्य के पूर्वी क्षेत्रों में बारिश की गतिविधि विशेष रूप से भारी रही है, जिसके परिणामस्वरूप स्थानीय जलभराव की समस्या उत्पन्न हो गई है।
सबसे अधिक बारिश: बूँदी जिले में स्थित नैनवा ने 24 घंटों में लगभग 4 इंच बारिश के साथ सबसे अधिक वर्षा दर्ज की है। यह क्षेत्र अब बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हो गया है।
अलर्ट स्थिति: IMD ने राज्य के लगभग दो दर्जन जिलों के लिए बारिश का अलर्ट जारी किया है, जिसमें लोगों को लगातार बारिश के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
पूर्वानुमान: मौसम विज्ञानियों का अनुमान है कि यह बारिश की बौछार 30 अक्टूबर तक जारी रह सकती है, इसके बाद मौसम प्रणाली धीरे-धीरे कमजोर होगी और आसमान साफ होगा।
कृषि फसलों को अप्रत्याशित क्षति का सामना
इस समय से पहले की बारिश ने किसानों को व्यापक आर्थिक नुकसान पहुंचाया है, खासकर उन फसलों को जो संग्रहण के लिए तैयार थीं।
किसानों के नुकसान: उदयपुर, प्रतापगढ़, कोटा और बारां जैसे जिलों में 1 से 3 इंच बारिश के कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
फसल बर्बादी का जोखिम: अनियमित नमी ने संग्रहीत फसलों में घुसपैठ कर दी है, जिससे किसानों में फसलों के खराब होने, उपज की गुणवत्ता में कमी और संभावित आर्थिक विनाश की चिंता बढ़ गई है।
सलाह: प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों को सतर्क रहने, आधिकारिक मौसम बुलेटिन पर ध्यान देने और जब तक मौसम प्रणाली पूरी तरह से समाप्त नहीं हो जाती, तब तक अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।
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