Spiritual: मोरारी बापू की रामकथा में बोले CM धामी, भारतीय संस्कृति का प्रसार जरूरी

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देवभूमि उत्तराखंड की पावन नगरी हरिद्वार इन दिनों आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत है। बुधवार को प्रेमनगर आश्रम में आयोजित पूज्य श्री मोरारी बापू की श्रीराम कथा के भव्य समापन समारोह में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि हरिद्वार की धरा पर…

हरिद्वार में श्रीराम कथा का समापन: सीएम धामी ने की संतों की महिमा और सनातन संस्कृति की सराहना

देवभूमि उत्तराखंड की पावन नगरी हरिद्वार इन दिनों आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत है। बुधवार को प्रेमनगर आश्रम में आयोजित पूज्य श्री मोरारी बापू की श्रीराम कथा के भव्य समापन समारोह में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि हरिद्वार की धरा पर उन्हें जो आध्यात्मिक शांति और अलौकिक आनंद प्राप्त हुआ है, वह शब्दों में बयां करना कठिन है। उन्होंने पूज्य मोरारी बापू का आभार व्यक्त करते हुए उन्हें भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म का जीवंत स्तंभ बताया।

मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन में आगे कहा कि पूज्य मोरारी बापू केवल एक कथा वाचक नहीं हैं, बल्कि वे मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने वाले एक महान संवाहक हैं। बापू के माध्यम से ही भारतीय दर्शन और अध्यात्म का संदेश न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में गूँज रहा है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब वैश्विक स्तर पर संघर्ष और अशांति का माहौल है, तब भारत की सनातन परंपरा और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का संदेश ही मानवता को शांति का मार्ग दिखा सकता है।

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सांस्कृतिक पुनर्जागरण और देवभूमि का कायाकल्प

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भारत एक नए सांस्कृतिक पुनर्जागरण के दौर से गुजर रहा है। उत्तराखंड सरकार भी इसी संकल्प के साथ देवभूमि को विश्व की ‘आध्यात्मिक राजधानी’ बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ‘विकास भी और विरासत भी’ के मंत्र पर काम कर रही है, जिससे राज्य की प्राचीन पहचान और आधुनिक विकास के बीच एक अद्भुत संतुलन स्थापित हो रहा है।

राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रमुख कार्यों की झलक कुछ इस प्रकार है:

  • केदारखंड और मानसखंड मंदिर माला मिशन: प्राचीन मंदिरों को सर्किट के रूप में विकसित करना।
  • हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर: तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे का निर्माण।
  • शारदा कॉरिडोर: धार्मिक स्थलों के सौंदर्यीकरण और संरक्षण की महत्वाकांक्षी योजना।
  • प्राचीन मंदिरों का पुनरुद्धार: सांस्कृतिक धरोहरों को सुरक्षित रखने के लिए विशेष अभियान।

चारधाम यात्रा: रिकॉर्ड तोड़ श्रद्धालुओं का आगमन

मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड में पर्यटन और तीर्थाटन के बढ़ते ग्राफ पर गर्व व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि इस वर्ष चारधाम यात्रा ने लोकप्रियता के सभी पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। यात्रा शुरू होने के महज दो महीनों के भीतर ही 45 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा केदार और बद्रीनाथ के दर्शन किए हैं। इसके साथ ही हेमकुंड साहिब और कैलाश मानसरोवर की यात्राओं में भी श्रद्धालुओं की संख्या में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है।

उन्होंने बताया कि कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 5 जुलाई को उन्होंने स्वयं पहले दल को रवाना किया था। पहले जहाँ सीमित संख्या में यात्री जा पाते थे, अब बेहतर बुनियादी ढांचे और सुरक्षित यात्रा प्रबंधन के कारण श्रद्धालुओं की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है। यह सब सरकार की बेहतर नीतियों और श्रद्धालुओं के अटूट विश्वास का ही परिणाम है कि आज देवभूमि में हर ओर आस्था का सैलाब उमड़ रहा है।

कुंभ-2027 की तैयारी और भविष्य का संकल्प

आगामी कुंभ मेला-2027 को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इसे दिव्य, भव्य और सुरक्षित बनाने के लिए पूरी तरह से संकल्पित है। उन्होंने दोहराया कि कुंभ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सनातन संस्कृति का महाकुंभ है। संतों का आशीर्वाद और आम जनमानस का सहयोग ही इस आयोजन को ऐतिहासिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मुख्यमंत्री ने अंत में उपस्थित जनसमूह से आह्वान किया कि वे भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने दैनिक जीवन में उतारें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि संतों के मार्गदर्शन और निरंतर जनसहभागिता से उत्तराखंड आने वाले समय में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों को छुएगा। इस भव्य समारोह में बड़ी संख्या में साधु-संतों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया था।

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