Prisoner: तिहाड़ जेल में अमेरिकी कैदी की भूख हड़ताल, खाने पर उठाए सवाल

Summary

राजधानी दिल्ली की कुख्यात तिहाड़ जेल इन दिनों एक अजीबोगरीब और गंभीर विवाद को लेकर चर्चा में है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा गिरफ्तार किए गए अमेरिकी नागरिक वैन डाइक (Van Dyke) ने अपनी डाइट को लेकर जेल प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वैन डाइक का दावा है कि जेल में परोसा जाने…

तिहाड़ जेल में अमेरिकी कैदी का ‘फूड विवाद’: 50 दिनों से भूखा है वैन डाइक, कोर्ट से लगाई गुहार

राजधानी दिल्ली की कुख्यात तिहाड़ जेल इन दिनों एक अजीबोगरीब और गंभीर विवाद को लेकर चर्चा में है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा गिरफ्तार किए गए अमेरिकी नागरिक वैन डाइक (Van Dyke) ने अपनी डाइट को लेकर जेल प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वैन डाइक का दावा है कि जेल में परोसा जाने वाला मसालेदार और डीप-फ्राइड भारतीय भोजन उसकी सेहत के लिए बिल्कुल भी अनुकूल नहीं है। इस स्थिति के चलते उसने पिछले 50 दिनों से अन्न का एक दाना भी नहीं खाया है और वह केवल सोया मिल्क जैसे लिक्विड डाइट के सहारे जीवित है।

इस मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। वैन डाइक ने अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए अपनी स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को रखा है। उसने याचिका में कहा है कि जेल का सामान्य भोजन खाने से उसे गंभीर पाचन समस्याओं का सामना करना पड़ता है और उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही है। आरोपी ने कोर्ट से गुहार लगाई है कि उसे उसकी शारीरिक जरूरतों के हिसाब से अलग डाइट उपलब्ध कराई जाए, ताकि वह अपनी सेहत को दुरुस्त रख सके।

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अदालत का रुख और जेल प्रशासन की प्रतिक्रिया

सुनवाई के दौरान जब यह मामला अदालत के समक्ष आया, तो जेल प्रशासन ने अपना पक्ष रखने के लिए मोहलत मांगी। जेल अधिकारियों ने कोर्ट से जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा है। अदालत ने प्रशासन की इस मांग को स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई के लिए निर्धारित कर दी है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या जेल प्रशासन विदेशी कैदी की डाइट की मांग को स्वीकार करेगा या फिर कोई और रास्ता निकाला जाएगा।

कौन है वैन डाइक और क्यों हुई है गिरफ्तारी?

वैन डाइक की गिरफ्तारी 13 मार्च को हुई थी, जब उसे छह यूक्रेनी नागरिकों के साथ पकड़ा गया था। एनआईए (NIA) के अनुसार, यह पूरा समूह म्यांमार से मिजोरम सीमा के रास्ते अवैध रूप से भारतीय क्षेत्र में दाखिल हुआ था। खुफिया जानकारी मिलने के बाद इन्हें देश के अलग-अलग हवाई अड्डों से गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसी को शक है कि यह समूह एक पेशेवर गिरोह की तरह काम कर रहा था, जो भारत की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता था।

  • गिरफ्तारी का आधार: म्यांमार सीमा से अवैध प्रवेश और संदिग्ध गतिविधियां।
  • गंभीर आरोप: भाड़े के लड़ाकों (Mercenaries) के रूप में काम करना।
  • प्रशिक्षण: भारत और म्यांमार के सशस्त्र संगठनों को ड्रोन संचालन सिखाने का संदेह।
  • कानूनी कार्रवाई: यूएपीए (UAPA) और आतंकवादी साजिश की धाराओं के तहत मामला दर्ज।

‘सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल’ और सुरक्षा एजेंसियां

वैन डाइक को ‘सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल’ नामक संस्था का संस्थापक बताया जाता है। एनआईए की जांच में यह बात सामने आई है कि यह नेटवर्क पूर्वोत्तर भारत में सक्रिय उग्रवादी संगठनों के साथ मिलकर काम कर रहा था। एजेंसी का मानना है कि इन लोगों का उद्देश्य क्षेत्रीय अस्थिरता पैदा करना था। वैन डाइक पर लगे आरोप बेहद गंभीर हैं, जिसमें देश की आंतरिक सुरक्षा से खिलवाड़ और आतंकी गतिविधियों में सहयोग शामिल है।

फिलहाल, मामला अदालत में विचाराधीन है। एक तरफ वैन डाइक अपनी डाइट को लेकर परेशान है, तो दूसरी तरफ एनआईए उसके आतंकी कनेक्शन की कड़ियों को जोड़ने में लगी है। 21 जुलाई की सुनवाई न केवल वैन डाइक की डाइट पर फैसला सुनाएगी, बल्कि जेल प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के बीच के समन्वय पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी कर सकती है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि क्या विदेशी कैदी को उसकी पसंद का भोजन मिलता है या फिर उसे जेल के नियमों के अनुसार ही रहना पड़ेगा।

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