उत्तराखंड में भारी बारिश का अलर्ट: सीएम धामी ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश, आपदा प्रबंधन विभाग 24×7 अलर्ट पर
देहरादून: उत्तराखंड में मानसून की सक्रियता के साथ ही बारिश का दौर तेज हो गया है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में हो रही मूसलाधार बारिश और मौसम विभाग द्वारा आगामी दिनों के लिए जारी की गई चेतावनी ने प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इसी के मद्देनजर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में जन-जीवन की सुरक्षा उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सभी महकमों को पूरी तरह से मुस्तैद रहना होगा।
मुख्यमंत्री के निर्देशों का पालन करते हुए सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक में प्रदेश भर के मौसम पूर्वानुमान, नदियों के जलस्तर, सड़क संपर्क की स्थिति और राहत एवं बचाव कार्यों की गहन समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे मौसम विभाग के बुलेटिनों पर लगातार नजर रखें और किसी भी आपात स्थिति के उत्पन्न होने पर तत्काल रेस्पॉन्स सुनिश्चित करें। राहत कार्यों में किसी भी प्रकार की ढिलाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सभी संबंधित विभागों को 24×7 अलर्ट मोड पर रहने के लिए कहा गया है।
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रेड और ऑरेंज अलर्ट: जनपदों में बढ़ाई गई सतर्कता
मौसम विभाग ने उत्तराखंड के कई जिलों के लिए भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, जिसके बाद प्रशासन ने कमर कस ली है। आगामी 24 से 48 घंटों के लिए विशेष रूप से सावधानियां बरतने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य में आपदा प्रबंधन तंत्र को पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है ताकि किसी भी संभावित नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।
- रेड अलर्ट: नैनीताल, ऊधमसिंह नगर और चम्पावत जनपदों के लिए भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है।
- ऑरेंज अलर्ट: देहरादून, पौड़ी गढ़वाल और बागेश्वर जनपदों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना के चलते ऑरेंज अलर्ट घोषित है।
- संसाधन: पुलिस, एसडीआरएफ (SDRF), लोक निर्माण विभाग, स्वास्थ्य और विद्युत विभाग को आपस में बेहतर समन्वय बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
- निगरानी: संवेदनशील भूस्खलन क्षेत्रों और नदियों के किनारे बसे गांवों पर विशेष नजर रखने को कहा गया है।
चारधाम यात्रा पर विशेष ध्यान और यात्रियों की सुरक्षा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में चल रही चारधाम यात्रा को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। जहां भी मौसम खराब हो या भारी बारिश के कारण मार्ग बाधित हों, वहां यात्रियों को जोखिम में न डाला जाए। ऐसे सभी स्थानों पर यात्रियों को होल्डिंग प्वाइंट्स पर सुरक्षित रोका जाए और उन्हें हर संभव मदद मुहैया कराई जाए।
होल्डिंग प्वाइंट्स पर श्रद्धालुओं के लिए भोजन, शुद्ध पेयजल, दवाइयों और बच्चों के लिए दूध जैसी आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए हैं। सीएम ने यह भी स्पष्ट किया है कि जब तक मौसम पूरी तरह साफ न हो जाए और मार्ग सुरक्षित होने की पुष्टि न हो जाए, तब तक यात्रियों को आगे बढ़ने की अनुमति न दी जाए। यह कदम तीर्थयात्रियों की जानमाल की सुरक्षा के लिए उठाया गया है ताकि आपदा जैसी स्थिति में कोई अनहोनी न हो।
भूस्खलन और निर्माण कार्यों पर सख्त निगरानी
पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश के दौरान भूस्खलन एक बड़ी चुनौती होती है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि बरसाती नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों के पास रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाए। साथ ही, राज्य में चल रहे विभिन्न निर्माण कार्यों में लगे श्रमिकों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए भी कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। यदि किसी कार्यस्थल पर सुरक्षा का जोखिम अधिक है, तो वहां काम को अस्थायी रूप से रोकने के आदेश दिए गए हैं ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हो।
प्रशासन ने आम जनता से भी अपील की है कि वे खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा करने से बचें और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करें। नदी-नालों के जलस्तर में अचानक वृद्धि हो सकती है, इसलिए नदी के तटों पर न जाने की सलाह दी गई है। उत्तराखंड सरकार का आपदा प्रबंधन तंत्र पूरी तरह से तत्पर है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए हर संभव संसाधन तैनात किए गए हैं।
