उत्तराखंड आपदा प्रबंधन: केंद्र सरकार ने राज्य को दी बड़ी राहत, वित्तीय सहायता और पुनर्निर्माण पर स्पष्ट की स्थिति
हाल ही में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर राज्य में प्राकृतिक आपदाओं से उपजी चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की। इस दौरान केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए केंद्र हमेशा राज्य के साथ खड़ा है। बैठक में आपदा प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्वास, पुनर्निर्माण कार्य और केंद्र द्वारा अब तक उपलब्ध कराई गई वित्तीय मदद का पूरा लेखा-जोखा साझा किया गया, जिससे राज्य की विकास योजनाओं को गति मिल सके।
केंद्रीय राज्य मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि आपदा प्रबंधन की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकार के अधीन आती है, लेकिन किसी भी बड़ी आपदा की स्थिति में केंद्र सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ मदद के लिए तत्पर रहती है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार राज्य को न केवल वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराती है, बल्कि बचाव कार्यों के लिए आवश्यक लॉजिस्टिक सहायता भी प्रदान करती है। गंभीर आपदाओं के दौरान अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल द्वारा किए गए आकलन के आधार पर राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि (NDRF) से अतिरिक्त मदद का रास्ता साफ किया जाता है ताकि प्रभावितों को जल्द राहत मिल सके।
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आर्थिक मजबूती: SDRF के तहत आवंटित हुए 1012 करोड़ रुपये
उत्तराखंड की आपदा तैयारियों को और अधिक मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) के तहत 1012 करोड़ रुपये का बड़ा आवंटन किया है। इस राशि के वितरण का ब्यौरा देते हुए मंत्री ने बताया कि इसमें 911.20 करोड़ रुपये का हिस्सा केंद्र सरकार का है, जबकि 100.80 करोड़ रुपये राज्य सरकार का अंश है। केंद्र सरकार ने पूरी जिम्मेदारी निभाते हुए अपने हिस्से की पूरी राशि दो समान किस्तों में राज्य को जारी कर दी है, ताकि समय पर आपदा राहत कार्य पूरे किए जा सकें।
- वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कुल 1012 करोड़ रुपये का आवंटन।
- केंद्र सरकार का 911.20 करोड़ का हिस्सा जारी, राज्य को मिली बड़ी राहत।
- आपदा प्रबंधन के लिए केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय।
- प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश।
बादल फटने की घटनाओं पर केंद्र का त्वरित एक्शन
साल 2025 में उत्तराखंड में बादल फटने की घटनाओं ने भारी तबाही मचाई थी। इस संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने बिना किसी देरी के 8 अगस्त 2025 को ही अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल का गठन कर दिया था। इस दल ने 7 से 9 सितंबर 2025 तक जमीनी स्तर पर जाकर नुकसान का आकलन किया। राज्य सरकार द्वारा भेजे गए संशोधित ज्ञापन के आधार पर अब केंद्र सरकार अतिरिक्त वित्तीय सहायता की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ा रही है, ताकि प्रभावित परिवारों और बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण जल्द पूरा हो सके।
PDNA और पुनर्निर्माण की दिशा में ठोस कदम
गंभीर आपदाओं के बाद पुनर्स्थापन के लिए केंद्र सरकार ‘पोस्ट डिजास्टर नीड्स असेसमेंट’ (PDNA) के मानदंडों का पालन करती है। उत्तराखंड सरकार ने वर्ष 2025 की आपदाओं के लिए 10,998.95 करोड़ रुपये की सहायता का अनुरोध किया था। इन मानकों और आकलन के आधार पर केंद्र ने 811.87 करोड़ रुपये की सहायता स्वीकृत की है। इस दिशा में कदम उठाते हुए, पहली किस्त के रूप में 182.67 करोड़ रुपये की राशि 26 मई 2026 को जारी कर दी गई है। यह राशि राज्य के पुनर्निर्माण कार्यों को नई ऊर्जा प्रदान करेगी।
वन भूमि पर पुनर्वास के जटिल मुद्दों पर चर्चा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है। वन भूमि का उपयोग केवल उन्हीं शर्तों और परिस्थितियों में हो सकता है जो कानून के दायरे में आती हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस दौरान राज्य की संवेदनशीलता को दोहराते हुए कहा कि हर साल प्राकृतिक आपदाएं राज्य की अर्थव्यवस्था और अवसंरचना को प्रभावित करती हैं। उन्होंने इस कठिन समय में केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा दिए जा रहे निरंतर सहयोग के लिए उनका आभार व्यक्त किया और आशा जताई कि केंद्र की इस मदद से उत्तराखंड के कठिन इलाकों में जल्द ही सामान्य स्थिति बहाल हो सकेगी।
