देहरादून में नीति आयोग की टीम के साथ मुख्यमंत्री धामी की उच्चस्तरीय बैठक, विकास की नई रूपरेखा पर चर्चा
देहरादून। उत्तराखंड के सर्वांगीण और सतत विकास को नई गति देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नीति आयोग के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित इस बैठक में नीति आयोग के सदस्य प्रो. (डॉ.) एम. श्रीनिवास के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से भेंट की। इस दौरान राज्य की भौगोलिक विशिष्टताओं, जनसांख्यिकीय चुनौतियों और विकास के अवसरों को लेकर गहन मंथन किया गया। मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड के भविष्य को संवारने के लिए अब पुरानी लीक से हटकर दूरदर्शी और प्रभावी नीतियों की आवश्यकता है, जो राज्य की स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल हों।
बैठक में राज्य के विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि नीति आयोग का मार्गदर्शन उत्तराखंड के लिए हमेशा से प्रेरणादायक रहा है और भविष्य में भी राज्य सरकार केंद्र की इस सर्वोच्च नीति निर्धारक संस्था से बेहतर सहयोग की अपेक्षा रखती है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड केवल एक राज्य नहीं, बल्कि एक ऐसा महत्वपूर्ण केंद्र है जहां देश और दुनिया से लाखों लोग अपनी आस्था और पर्यटन के लिए आते हैं, इसलिए यहां की विकास योजनाएं आम राज्यों से अलग होनी चाहिए।
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स्थायी आबादी बनाम ‘फ्लोटिंग पॉपुलेशन’ का मुद्दा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नीति आयोग के सामने उत्तराखंड की सबसे बड़ी चुनौती यानी ‘फ्लोटिंग पॉपुलेशन’ (पर्यटक और तीर्थयात्री) का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में जहां तीर्थाटन और पर्यटन का विशेष महत्व है, वहां योजनाओं का निर्धारण केवल स्थायी आबादी को आधार मानकर नहीं किया जा सकता। राज्य में हर साल स्थायी जनसंख्या की तुलना में सात से आठ गुना अधिक लोग आते हैं, जिससे स्वास्थ्य, पेयजल, स्वच्छता और परिवहन जैसी बुनियादी सुविधाओं पर भारी दबाव पड़ता है।
मुख्यमंत्री का मानना है कि यदि संसाधनों का आवंटन केवल स्थायी जनसंख्या के आधार पर होगा, तो राज्य की बुनियादी व्यवस्थाएं चरमरा सकती हैं। इसलिए, उन्होंने नीति आयोग से आग्रह किया कि भविष्य की किसी भी नीति निर्माण में ‘फ्लोटिंग पॉपुलेशन’ को भी विशेष प्राथमिकता दी जाए। इससे न केवल पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि स्थानीय निवासियों पर पड़ने वाला अतिरिक्त बोझ भी कम होगा। उन्होंने कहा कि संसाधनों का सही आवंटन ही उत्तराखंड को एक विकसित राज्य बनाने की दिशा में पहला ठोस कदम होगा।
महिला सशक्तीकरण और कुपोषण मुक्त उत्तराखंड का संकल्प
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने महिला सशक्तीकरण और बाल विकास को राज्य की प्रगति का मुख्य आधार स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि एक सशक्त और स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए महिलाओं और बच्चों का स्वास्थ्य सर्वोपरि है। राज्य सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है, लेकिन अब इसे एक मिशन मोड में लाने की आवश्यकता है। उन्होंने नीति आयोग के सदस्यों के साथ चर्चा करते हुए बच्चों को कुपोषण से मुक्त करने और महिलाओं में एनीमिया (खून की कमी) की समस्या को जड़ से मिटाने के लिए एक समन्वित कार्ययोजना पर सहमति जताई।
- स्वास्थ्य और पोषण: बच्चों और महिलाओं के लिए विशेष स्वास्थ्य योजनाओं का कार्यान्वयन।
- नवाचार और शोध: कृषि, बागवानी और जल संरक्षण के लिए विशेषज्ञों के साथ कार्यशालाएं।
- कौशल विकास: स्थानीय युवाओं को रोजगार के लिए आधुनिक प्रशिक्षण प्रदान करना।
- सतत पर्यटन: पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना पर्यटन को बढ़ावा देना।
नवाचार आधारित नीतियों पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने नीति आयोग को सुझाव दिया कि राज्य के प्रमुख क्षेत्रों जैसे कृषि, बागवानी, जैव विविधता और कौशल विकास में विशेषज्ञों की भागीदारी बढ़ाई जाए। उन्होंने कहा कि नीति आयोग के सहयोग से नियमित अंतराल पर सेमिनार और विचार-विमर्श आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि जमीनी स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों और विशेषज्ञों के बीच बेहतर तालमेल बन सके। इससे ऐसी नीतियां तैयार होंगी जो न केवल व्यवहारिक होंगी, बल्कि नवाचार (Innovation) पर भी आधारित होंगी।
अंत में, मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि नीति आयोग और राज्य सरकार का यह साझा प्रयास उत्तराखंड को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। प्रो. एम. श्रीनिवास ने भी राज्य की विकास योजनाओं की सराहना करते हुए कहा कि नीति आयोग उत्तराखंड की आवश्यकताओं के अनुरूप हर संभव तकनीकी और नीतिगत सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह बैठक राज्य के भविष्य के लिए एक नई दिशा तय करने में मील का पत्थर साबित होगी।
