Badrinath: बद्रीनाथ मंदिर में चोरी पर बोले भाजपा सांसद, देवस्थान बोर्ड होता तो न होती यह घटना

Summary

उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे और दान की राशि में कथित अनियमितताओं का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस संवेदनशील मुद्दे पर हरिद्वार से भाजपा सांसद और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपनी बेबाक राय रखी है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि देवस्थानम बोर्ड का…

बद्रीनाथ धाम में चढ़ावा चोरी पर सियासत गरमाई, त्रिवेंद्र सिंह रावत ने दी बड़ी प्रतिक्रिया

उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे और दान की राशि में कथित अनियमितताओं का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस संवेदनशील मुद्दे पर हरिद्वार से भाजपा सांसद और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपनी बेबाक राय रखी है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि देवस्थानम बोर्ड का गठन बरकरार रहता, तो शायद बद्रीनाथ धाम में इस प्रकार की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं की पुनरावृत्ति न होती। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देवस्थानम बोर्ड का मूल उद्देश्य मंदिरों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाना और व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना था।

त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि देवस्थानम बोर्ड के समय कार्यों में अधिक स्पष्टता और जवाबदेही थी। उन्होंने आगे कहा कि मेरा हमेशा से यह मानना रहा है कि मंदिरों के चढ़ावे और प्रबंधन में पारदर्शिता अत्यंत आवश्यक है। वर्तमान मामले पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से जांच होनी चाहिए। जो भी दोषी पाए जाएं, उन्हें सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में श्रद्धालुओं की आस्था के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ न हो सके।

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मुख्यमंत्री धामी सरकार का बड़ा एक्शन, तीन सदस्यीय समिति गठित

बद्रीनाथ धाम में दान-चढ़ावे से संबंधित सामने आई शिकायतों को राज्य सरकार ने बेहद गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले की संवेदनशीलता को समझते हुए तत्काल प्रभाव से एक उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन करने के निर्देश जारी किए हैं। शासन द्वारा जारी आदेशों के अनुसार, यह समिति पूरे मामले की गहराई से छानबीन करेगी और अनियमितताओं के पीछे के तथ्यों को उजागर करेगी। सरकार का यह कदम करोड़ों सनातनियों की आस्था को सुरक्षित रखने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

जांच समिति की संरचना और मुख्य सदस्य:

  • समिति के अध्यक्ष: आयुक्त, गढ़वाल मंडल इस उच्चस्तरीय जांच समिति का नेतृत्व करेंगे।
  • सदस्य 1: संदीप तिवारी, प्रबंध निदेशक, एनएचएम (NHM)।
  • सदस्य 2: जगत सिंह चौहान, निदेशक (वित्त), कार्यालय महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग।

15 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश

पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल की ओर से जारी आधिकारिक निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि समिति को अपना काम युद्धस्तर पर करना होगा। समिति को निर्देश दिए गए हैं कि वह मंदिर में प्राप्त होने वाले दान और चढ़ावे से जुड़ी सभी कथित अनियमितताओं की विस्तृत जांच करे। उन्हें अपनी जांच रिपोर्ट और आवश्यक संस्तुतियां शासन को 15 दिनों की समयावधि के भीतर सौंपनी होंगी। यह एक समयबद्ध जांच प्रक्रिया है, जिससे उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही सच्चाई सामने आएगी।

इसके अतिरिक्त, समिति को यह अधिकार दिया गया है कि वे जांच के दौरान किसी भी अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ या अन्य संबंधित व्यक्ति से परामर्श ले सकें। समिति का केवल यह काम नहीं है कि वह दोषियों को पकड़े, बल्कि उनका मुख्य उद्देश्य मंदिर के दान-चढ़ावे के प्रबंधन तंत्र को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और प्रभावी बनाने के लिए ठोस सुधारात्मक उपाय सुझाना भी है। सरकार चाहती है कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे भविष्य में किसी भी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।

विपक्ष का हमला और आस्था का सवाल

इस पूरे मामले पर विपक्ष भी आक्रामक रुख अपनाए हुए है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने भाजपा सरकार को घेरते हुए कहा कि यह करोड़ों सनातनियों की आस्था के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने मांग की है कि जांच केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि दोषियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। बद्रीनाथ धाम जैसे पवित्र स्थल पर दान-पात्रों और चढ़ावे में हेराफेरी की खबरें श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत करने वाली हैं। अब सबकी निगाहें इस तीन सदस्यीय समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं कि वे इस मामले में क्या निष्कर्ष निकालते हैं और सरकार आगे क्या कदम उठाती है।

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