Water: मां की डांट से नाराज बेटी ने उठाया खौफनाक कदम

उन्नाव में किशोरी ने मां की डांट से नाराज होकर की आत्महत्या जागरण संवाददाता, उन्नाव। उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के सदर क्षेत्र के चुभनाखेड़ा गांव में एक दुखद घटना सामने आई है, जहां एक 13 वर्षीय किशोरी ने अपनी मां की डांट से नाराज होकर घर में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। यह घटना…

Water: मां की डांट से नाराज बेटी ने उठाया खौफनाक कदम

उन्नाव में किशोरी ने मां की डांट से नाराज होकर की आत्महत्या

जागरण संवाददाता, उन्नाव। उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के सदर क्षेत्र के चुभनाखेड़ा गांव में एक दुखद घटना सामने आई है, जहां एक 13 वर्षीय किशोरी ने अपनी मां की डांट से नाराज होकर घर में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। यह घटना रविवार को हुई, जब किशोरी का शव फंदे पर लटका देखकर उसके भाई की चीख निकल गई। भाई ने तुरंत उसे नीचे उतारा और जीवित समझकर जिला अस्पताल ले गया, लेकिन वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना से किशोरी के माता-पिता और अन्य परिवार के सदस्य गहरे सदमे में हैं।

घटनाक्रम: मां की डांट के बाद किशोरी की आत्महत्या

सचिवालय में परिवार का हाल-चाल

परिधि के भाई राजदीप ने उसे फंदे से नीचे उतारा और उसे जीवित समझकर जिला अस्पताल ले गया। अस्पताल में डाक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। परिधि की मौत से परिवार में मातम छा गया है। माता-पिता और अन्य परिवार के सदस्यों का रो-रो कर बुरा हाल है। इस घटना ने पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ा दी है।

पुलिस का बयान और आगे की कार्रवाई

इस मामले की जानकारी मिलने पर सदर कोतवाल चंद्रकांत मिश्र ने भी घटनास्थल का दौरा किया। उन्होंने बताया कि किशोरी ने गुस्से में आकर आत्महत्या का कदम उठाया है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है ताकि घटना की सही जानकारी मिल सके। इस दुखद घटना ने यह साबित कर दिया है कि किशोरों में मानसिक स्वास्थ्य की समस्या को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है।

किशोरों में मानसिक स्वास्थ्य की आवश्यकता

यह घटना एक बार फिर से यह सवाल उठाती है कि किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना कितना आवश्यक है। आजकल के बच्चे विभिन्न प्रकार के दबावों का सामना कर रहे हैं, जिसमें पारिवारिक दबाव, पढ़ाई का बोझ और सामाजिक अपेक्षाएं शामिल हैं। ऐसे में माता-पिता और शिक्षकों को चाहिए कि वे बच्चों के साथ खुलकर बात करें और उनकी भावनाओं को समझें। बच्चों को यह महसूस कराने की आवश्यकता है कि वे कभी भी अपनी समस्याओं के बारे में बात कर सकते हैं।

समाज में जागरूकता की आवश्यकता

समाज में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है। स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा को शामिल करना, माता-पिता के लिए कार्यशालाएं आयोजित करना और बच्चों को सही मार्गदर्शन देना बेहद महत्वपूर्ण है। समाज को आगे आकर किशोरों की समस्याओं को समझने और उनके समाधान के लिए काम करना चाहिए।

इस घटना ने हमें यह सोचने पर मजबूर किया है कि हम अपने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति कितने संवेदनशील हैं। हमें बच्चों के साथ संवाद करना चाहिए और उन्हें यह बताना चाहिए कि वे कभी भी किसी भी समस्या के लिए हमसे संपर्क कर सकते हैं। केवल इसी तरह हम भविष्य में इस प्रकार की दुखद घटनाओं से बच सकते हैं।

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