हमारे घर का मंदिर केवल पूजा का स्थल नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा स्थान है जहां सकारात्मक ऊर्जा और दिव्य शक्ति का निवास होता है। हिंदू धर्म में, विशेषकर वास्तु शास्त्र और ज्योतिष के अनुसार, मंदिर से जुड़े सभी नियमों का मुख्य उद्देश्य घर में सुख, शांति और समृद्धि का वातावरण बनाना होता है। इसलिए, घर के मंदिर की पवित्रता को बनाए रखना और देवी-देवताओं को ‘विश्राम’ देना अत्यंत आवश्यक है। जब यह सब ठीक से होता है, तो घर में किसी प्रकार का दोष उत्पन्न नहीं होने पाता। इस संदर्भ में, हम वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से जानेंगे कि घर के मंदिर में दरवाजे होना चाहिए या नहीं?
घर के मंदिर में दरवाजा होना सही है या गलत?
ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के मंदिर में दरवाजा या पर्दा होना आवश्यक है। यदि मंदिर एक अलग कमरे के रूप में है, तो उसमें लकड़ी का दरवाजा शुभ माना जाता है, जिसका मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर खुलना चाहिए। वहीं, अगर मंदिर किसी कैबिनेट या दीवार पर बना हुआ है, तो उसमें पर्दा लगाना भी जरूरी है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि लोहे के दरवाजे को शुभ नहीं माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रात के समय भगवान भी विश्राम करते हैं। इसीलिए, रात को मंदिर का दरवाजा बंद करना या पर्दा डालना आवश्यक है ताकि उनकी नींद में किसी प्रकार की बाधा न आए। इससे उनकी कृपा घर पर बनी रहती है। रात के समय वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ सकता है, और दरवाजा या पर्दा सकारात्मक ऊर्जा को सुरक्षित रखने में मदद करता है।
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यदि आपका पूजा घर बेडरूम में है, तो सोने से पहले मंदिर को पर्दे से ढकना अत्यंत आवश्यक है। यह वास्तु दोष से बचाने में मदद करता है, क्योंकि सोते समय भगवान के खुले रूप में दर्शन करना उचित नहीं माना जाता है। यदि घर में कोई व्यक्ति मांसाहार करता है या शराब का सेवन करता है, तो भोजन के समय मंदिर का दरवाजा बंद रखना चाहिए ताकि उसकी अपवित्रता पूजा स्थल तक न पहुंचे।

यदि आप लंबे समय तक घर से बाहर जा रहे हैं और मंदिर में नियमित पूजा नहीं कर पा रहे हैं, तो मंदिर को दरवाजे या पर्दे से ढककर ही बाहर जाना चाहिए। सीधे शब्दों में कहें, तो मंदिर में दरवाजे या पर्दे का होना पवित्रता बनाए रखने और सकारात्मक ऊर्जा को संरक्षित करने के लिए ज्योतिष और वास्तु दोनों दृष्टिकोण से आवश्यक और शुभ माना जाता है।
इस प्रकार, घर के मंदिर में दरवाजा या पर्दा होना केवल एक शारीरिक संरचना नहीं है, बल्कि यह एक धार्मिक और आध्यात्मिक प्रथा का हिस्सा है। यह न केवल मंदिर की पवित्रता को बनाए रखने में मदद करता है, बल्कि घर के वातावरण को भी सकारात्मक बनाता है। इसलिए, हमें इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि हमारे घर का मंदिर हमेशा स्वच्छ और सुरक्षित रहे। इससे न केवल हमारे धार्मिक कर्तव्यों का पालन होता है, बल्कि हमारी जीवनशैली में भी सकारात्मकता का संचार होता है।





