निर्जला व्रत, जैसा कि नाम से स्पष्ट है, एक ऐसा व्रत है जिसमें व्रति बिना पानी पिए उपवास रखती हैं। यह व्रत हिंदू धर्म के सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। विशेषकर छठ पूजा के अवसर पर महिलाएं 36 घंटे तक बिना अन्न और जल के निर्जला उपवास करती हैं। इस व्रत का उद्देश्य संतान की लंबी आयु, परिवार की सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना करना होता है। व्रति पूर्ण पवित्रता और श्रद्धा के साथ इस व्रत को निभाती हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य मनोकामनाओं की पूर्ति, संतान की कुशलता और पारिवारिक सुख-समृद्धि होती है। इस विशेष अवसर पर सूर्य देव और छठी मैया की उपासना की जाती है। वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से हम जानेंगे छठ पूजा के दौरान निर्जला व्रत का सही तरीका, नियम और इसके लाभ।
छठ पूजा 2025 निर्जला व्रत रखने का सही तरीका और नियम
खरना के दिन शाम को व्रति गुड़ और चावल की खीर का प्रसाद ग्रहण करती हैं। इस प्रसाद का सेवन करते ही 36 घंटे का निर्जला व्रत आरंभ हो जाता है। इस पूरी अवधि में व्रति को अन्न और जल की एक बूंद भी ग्रहण नहीं करनी होती है। इसके साथ ही व्रत के दौरान मन को शांत रखना, सात्विक व्यवहार करना और धरती पर साफ कंबल या चटाई बिछाकर सोना अनिवार्य है। तीसरे दिन डूबते सूर्य को और चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद ही यह व्रत का पारण किया जाता है। व्रत के नियमों का पालन करने से ही छठ मैया का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
छठ पूजा 2025 निर्जला व्रत करने के लाभ

सूर्य देव को आरोग्य का देवता माना जाता है। यही कारण है कि छठ व्रत रखने से व्रति और उनके परिवार को उत्तम स्वास्थ्य और रोगों से मुक्ति मिलती है। यह व्रत केवल स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि व्रति की सभी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए भी महत्वपूर्ण है। परिवार में सुख-समृद्धि बनाए रखने के लिए भी इस व्रत का विशेष महत्व है। इस व्रत को संतान की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करने वाले लोग भी रखते हैं।
निर्जला व्रत के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें
निर्जला व्रत करने के दौरान कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना आवश्यक है। इनमें शामिल हैं:
- सात्विक भोजन: व्रत के दौरान केवल सात्विक भोजन का सेवन करना चाहिए।
- ध्यान और साधना: व्रति को अपने मन को शांत रखना और ध्यान लगाना चाहिए।
- सामाजिक व्यवहार: व्रत के दौरान संयमित और सकारात्मक व्यवहार करना अनिवार्य है।
- आरोग्य की प्रार्थना: व्रति को सूर्य देव और छठी मैया से आरोग्य की प्रार्थना करनी चाहिए।
इन बातों का पालन करने से निर्जला व्रत के लाभ को और बढ़ाया जा सकता है। यह व्रत न केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए बल्कि पारिवारिक सुख-समृद्धि के लिए भी महत्वपूर्ण है।
निर्जला व्रत का महत्व और समाज में प्रभाव
निर्जला व्रत का महत्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में एकता और सहयोग की भावना को भी बढ़ावा देता है। इस व्रत के दौरान महिलाएं एक-दूसरे के साथ मिलकर पूजा करती हैं, जिससे आपसी संबंध मजबूत होते हैं। यह व्रत न केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए, बल्कि समाज के कल्याण के लिए भी महत्वपूर्ण होता है।
छठ पूजा के अवसर पर निर्जला व्रत रखने से न केवल सेहत में सुधार होता है, बल्कि यह मानसिक शांति और संतोष भी प्रदान करता है। इस प्रकार, छठ पूजा का यह अनुष्ठान न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है।
निष्कर्ष
इस प्रकार, निर्जला व्रत एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है, जो न केवल परिवार की सुख-समृद्धि के लिए होता है, बल्कि यह स्वास्थ्य और मानसिक शांति के लिए भी आवश्यक है। छठ पूजा के दौरान इस व्रत को श्रद्धा और भक्ति से करने पर व्रति को अपार लाभ मिलते हैं। इस व्रत को सही तरीके से करने से न केवल व्यक्तिगत बल्कि पारिवारिक और सामाजिक जीवन में भी सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। इसलिए, सभी श्रद्धालुओं को इस व्रत को विधिपूर्वक और श्रद्धा के साथ करना चाहिए।





