गोवर्धन पूजा: महत्व और चौघड़िया मुहूर्त
गोवर्धन पूजा भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे विशेष रूप से कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को मनाया जाता है। इस दिन भक्तजन भगवान कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी अंगुली पर उठाने की लीला का स्मरण करते हैं। देश के विभिन्न हिस्सों में इस दिन गोबर से गोवर्धन पर्वत का निर्माण किया जाता है और उसकी पूजा की जाती है। यह पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सामाजिक एकता और परंपराओं को भी दर्शाता है।
गोवर्धन पूजा के अवसर पर भक्तजन विशेष तैयारी करते हैं, जिसमें गोवर्धन को सजाना, उसकी परिक्रमा करना और विशेष भोग अर्पित करना शामिल है। इस दिन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पूजा का सही समय और मुहूर्त का ध्यान रखना आवश्यक है। पंडित सौरभ त्रिपाठी जी, छिंदवाड़ा, एमपी ने इस अवसर पर पूजा के लिए चौघड़िया मुहूर्त का विशेष महत्व बताया है। यदि आप भी गोवर्धन पूजा का आयोजन कर रहे हैं, तो इन मुहूर्तों का पालन करना न भूलें।
गोवर्धन पूजा के चौघड़िया मुहूर्त
चौघड़िया मुहूर्त का पालन कर आप अपनी पूजा को सफल बना सकते हैं। यहां पर विभिन्न मुहूर्तों का विवरण प्रस्तुत है, जिन्हें ध्यान में रखकर आप अपनी पूजा की तैयारी कर सकते हैं:
- रोग: 12:04 बजे से 01:39 तक। यह समय अशुभ माना जाता है, इसलिए इस समय पूजा से बचना बेहतर है।
- काल: 01:39 बजे से 03:14 तक। यह भी एक अशुभ समय है, जिसे टालना चाहिए।
- लाभ: 03:14 बजे से 04:49 तक। यह समय अत्यंत लाभदायक है, जो धन संबंधी कार्यों की योजना बनाने के लिए शुभ है।
- उद्वेग: 04:49 बजे से 06:24 तक। सूर्योदय से पहले का यह समय भी अशुभ माना जाता है, इसलिए पूजा इस समय न करें।
गोवर्धन पूजा के लाभ
गोवर्धन पूजा का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व तो है ही, इसके साथ-साथ यह कई प्रकार के लाभ भी प्रदान करती है। पूजा के माध्यम से भक्तजन भगवान कृष्ण की कृपा प्राप्त करते हैं। यह पर्व विशेष रूप से समृद्धि, सुख और शांति के लिए मनाया जाता है। पूजा के दौरान गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसके अलावा, इस दिन विशेष भोग अर्पित करने से परिवार में एकता और प्रेम बढ़ता है।
गोवर्धन पूजा की तैयारी
यदि आप गोवर्धन पूजा का आयोजन कर रहे हैं, तो उसकी तैयारी पहले से ही शुरू कर दें। इस दिन विशेष सामग्री की आवश्यकता होती है जैसे कि:
- गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाना
- फूल, फल और मिठाई का भोग तैयार करना
- दीप जलाना और आरती करना
- परिवार के सभी सदस्य एकत्रित होकर पूजा में शामिल होना
इन सभी तैयारियों को ध्यान में रखते हुए, आप अपनी पूजा को और भी खास बना सकते हैं। एकत्रित होकर की गई पूजा से न केवल भक्ति की भावना जागृत होती है, बल्कि परिवार में एकता भी बढ़ती है।
समापन
गोवर्धन पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह हमारे सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों का भी प्रतीक है। इस दिन की गई पूजा से जीवन में सुख-संपत्ति और शांति का संचार होता है। यदि आपको यह जानकारी उपयोगी लगी हो, तो इसे अपने मित्रों और परिवार के साथ साझा करें। इसी तरह की अन्य जानकारी और लेखों के लिए हमारी वेबसाइट हरजिंदगी से जुड़े रहें।





