Festivals: छठ पूजा में ये 2 खास अनुष्ठान क्यों हैं महत्वपूर्ण?

हिंदू धर्म में छठ पूजा का व्रत विशेष रूप से सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति के लिए मनाया जाता है। यह पर्व न केवल सूर्यदेव की आराधना के लिए जाना जाता है, बल्कि इसमें महिलाएं लगभग 36 घंटे तक निराहार और निरजल रहकर व्रत करती हैं। इस दौरान वह पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के अनुसार…

Festivals: छठ पूजा में ये 2 खास अनुष्ठान क्यों हैं महत्वपूर्ण?

हिंदू धर्म में छठ पूजा का व्रत विशेष रूप से सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति के लिए मनाया जाता है। यह पर्व न केवल सूर्यदेव की आराधना के लिए जाना जाता है, बल्कि इसमें महिलाएं लगभग 36 घंटे तक निराहार और निरजल रहकर व्रत करती हैं। इस दौरान वह पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के अनुसार इस पर्व को मनाती हैं। छठ पूजा में खरना के बाद सूर्य देव को संध्या अर्घ्य देने का विशेष महत्व होता है। जब अर्घ्य अर्पित किया जाता है, तब सभी परिवार के सदस्य एकत्रित होकर इसे मनाते हैं। इस अवसर पर गन्ने से घेरा बनाना और कोसी को भरने की परंपरा भी होती है। आज के इस लेख में हम आपको खोइछा और कोसी के महत्व के बारे में विस्तार से बताएंगे।

खोइछा और कोसी का महत्व

छठ पूजा के दौरान खोइछा भरना एक पारंपरिक अनुष्ठान है, जिसे बड़े बुजुर्गों द्वारा किया जाता है। यह अनुष्ठान इस बात का प्रतीक है कि व्रत रखने वाली महिला को न केवल सौभाग्य का आशीर्वाद मिले, बल्कि उसके परिवार में संतान और समृद्धि भी आए। खोइछा को विशेष रूप से गुड़, चावल और दूध से बनाया जाता है, और इसे सजाकर अर्पित किया जाता है। इस अनुष्ठान का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बहुत गहरा है।

chhath kosi

वहीं, कोसी भरने की परंपरा भी प्राचीन काल से चली आ रही है। कहा जाता है कि सबसे पहले देवी सीता ने इस व्रत को रखा और कोसी भराई की रस्म निभाई। इस दिन को विशेष रूप से सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद व्रती महिलाएं घर आकर परिवार के साथ बैठकर कोसी भराई की रस्म निभाती हैं। यह रस्म न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि यह परिवार के सदस्यों के बीच एकता और प्रेम को भी प्रकट करती है।

छठ पूजा की विधि और अनुष्ठान

छठ पूजा की विधि में कई चरण होते हैं, जिनमें से हर एक का अपना महत्व होता है। व्रती महिलाएं इस पर्व को मनाने के लिए कई दिनों तक तैयारियों में जुटी रहती हैं। पहले दिन, नहाय खाय के तहत महिलाएं स्नान कर विशेष प्रकार का भोजन करती हैं। दूसरे दिन, खरना का आयोजन होता है, जिसमें विशेष मिठाइयां बनाई जाती हैं। इसके बाद तीसरे दिन सूर्य देव को संध्या अर्घ्य दिया जाता है। इस दिन कोसी भराई की रस्म भी होती है।

इस पर्व के दौरान, महिलाएं अपने परिवार के लिए प्रार्थना करती हैं और उनके अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करती हैं। यह पर्व न केवल धार्मिक महत्त्व रखता है, बल्कि सामाजिक एकता और पारिवारिक बंधनों को भी मजबूत करता है।

छठ पूजा का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व

छठ पूजा एक ऐसा पर्व है जो न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह समाज में एकता और भाईचारे का भी संदेश देता है। इस पर्व के दौरान, लोग एक-दूसरे के साथ मिलकर अन्न-जल का भंडारण करते हैं और एक-दूसरे की मदद करते हैं। इससे समाज में सहयोग और सद्भावना का वातावरण बनता है।

छठ पूजा का आयोजन विशेष रूप से बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, और नेपाल के कुछ क्षेत्रों में धूमधाम से मनाया जाता है। इस दौरान लोग अपने-अपने घरों में विशेष तैयारी करते हैं और एकत्रित होकर इस पर्व को मनाते हैं।

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