Festival: छठ पूजा की व्रत कथा, छठी मैया का आशीर्वाद हमेशा मिलेगा

छठ पूजा हिंदू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र पर्व है, जिसे विशेष रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड के लोग श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाते हैं। यह पर्व सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित होता है, और इस दौरान महिलाएं संतान की सुख-समृद्धि के लिए उपवास और व्रत करती हैं।…

Festival: छठ पूजा की व्रत कथा, छठी मैया का आशीर्वाद हमेशा मिलेगा

छठ पूजा हिंदू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र पर्व है, जिसे विशेष रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड के लोग श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाते हैं। यह पर्व सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित होता है, और इस दौरान महिलाएं संतान की सुख-समृद्धि के लिए उपवास और व्रत करती हैं। महिलाएं विशेष रूप से सूर्य देव की उपासना करती हैं और उन्हें अर्घ्य देती हैं। इसके साथ ही, छठी मैया की पूजा भी की जाती है, जिससे संतान सुख, स्वास्थ्य, सौभाग्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है। छठ पूजा के अवसर पर व्रती महिलाएं चार दिनों तक उपवास रखती हैं और सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करती हैं। इस दौरान घाटों पर विशेष पूजा का आयोजन होता है, जहां महिलाएं और पुरुष एकत्रित होकर सूर्य देव की आराधना करते हैं।

छठ पूजा की व्रत कथा: विस्तार में (Chhath Puja Vrat Katha 2025)

छठ पूजा की पौराणिक कथा के अनुसार, सृष्टि के निर्माण के लिए ब्रह्मा जी ने स्वयं को दो भागों में विभाजित किया। दाएं भाग में पुरुष और बाएं भाग में प्रकृति का रूप प्रकट हुआ। ऐसा माना जाता है कि सृष्टि की अधिष्ठात्री देवी का एक अंश देव सेना के रूप में देखा जाता है। इस देवी का एक नाम षष्ठी भी है, जिन्हें छठी मैया के नाम से जाना जाता है। छठ पूजा की कथा बताती है कि प्राचीन काल में एक ब्राह्मण था, जो सूर्य भगवान का परम भक्त था। वह नियमित रूप से स्नान करके सूर्य देव की पूजा करता था, लेकिन उसकी कोई आय का स्रोत नहीं था। उसकी पत्नी उसे धन कमाने के लिए प्रेरित करती थी, लेकिन ब्राह्मण के पास कोई काम नहीं था।

एक दिन, ब्राह्मण ने अपने पूजन की सामग्री लेकर जंगल में जाकर पूजा करने का निर्णय लिया। वह एक सूखे पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर सूर्य देव की आराधना करने लगा। पूजा के बाद, उसने पीपल के पास मौजूद तालाब से जल लेकर सूर्य देव को अर्पित किया। जैसे ही उसने जल अर्पित किया, वह जल पीपल के पेड़ तक पहुंचा और पेड़ हरा-भरा हो गया। तब सूर्य देव प्रकट हुए और ब्राह्मण से कहा कि वह उससे अत्यंत प्रसन्न हैं और जो भी वरदान मांगना है वह मांग ले। लेकिन ब्राह्मण सुनकर भयभीत हो गया, क्योंकि उसे डर था कि कहीं यह आवाज भूत की न हो। वह इस स्थिति में कमजोर हो गया और कई दिनों तक घर नहीं लौटा। उसकी पत्नी उसे खोजते हुए जंगल में पहुंची और उसकी चिंता को समझकर उसे सलाह दी।

ब्राह्मणी ने कहा कि जब सूर्य देव की आवाज आती है, तब उसे डरने की आवश्यकता नहीं है। उसने ब्राह्मण को एक मंत्र बताया कि उसे क्या कहना चाहिए, जिससे वह सभी इच्छाएं पूर्ण कर सके। ब्राह्मण ने उसकी बात मानी और दूसरे दिन जब उसने सूर्य देव को अर्घ्य दिया, तो वही आवाज आई। उसने वैसा ही कहा जैसा उसकी पत्नी ने बताया था। सूर्य देव ने कहा कि उसने एक बार में सब कुछ मांग लिया है और जो उसने मांगा है, वह उसे अवश्य मिलेगा। इसके बाद, ब्राह्मण की झोपड़ी महल में बदल गई और उसके पास धन, वैभव और सुख-संपत्ति आ गई।

जब यह बात राजा तक पहुंची, तो उसने ब्राह्मण को बुलाया और पूछा कि अचानक इतना धन कहां से आया। ब्राह्मण ने बताया कि यह सब सूर्य भगवान की कृपा से हुआ है। राजा ने ब्राह्मण से सूर्य भगवान की पूजा विधि जानी और उसी विधि से पूजा की। इसके फलस्वरूप, राजा के घर एक सुंदर पुत्र का जन्म हुआ। तब से लोग सूर्य देव की जयकार करने लगे और छठ पूजा का महत्व बढ़ गया। इस प्रकार, छठ पूजा के माध्यम से सभी इच्छाएं पूरी होती हैं और भक्तों को सुख और समृद्धि प्राप्त होती है।

छठ पूजा की व्रत कथा का महत्व

छठ पूजा, सूर्य देव को समर्पित एक प्राचीन हिंदू पर्व है, जिसमें छठी मैया की पूजा के साथ-साथ सूर्य देव को अर्घ्य भी अर्पित किया जाता है। हर वर्ष, छठ पूजा का आयोजन कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से शुरू होता है, लेकिन षष्ठी और सप्तमी तिथि पर विशेष उपासना की जाती है। मान्यता है कि छठ का व्रत करने और व्रत कथा का पाठ या श्रवण करने से संतान सुख मिलता है और संतान को दीर्घायु का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। इस पर्व के दौरान लोग श्रद्धा और भक्ति के साथ एकत्र होते हैं और सूर्य देव की कृपा के लिए प्रार्थना करते हैं।