Diya: नरक चतुर्दशी पर यम का दीपक जलाने का सही मुहूर्त और महत्व

Summary

दीपावली का पर्व भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो हर साल बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इस पर्व से एक दिन पहले मनाया जाने वाला नरक चतुर्दशी का पर्व विशेष रूप से धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है। इसे छोटी दिवाली या रूप चौदस भी कहा जाता है। इस दिन, लोग अपने…

Diya: नरक चतुर्दशी पर यम का दीपक जलाने का सही मुहूर्त और महत्व

दीपावली का पर्व भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो हर साल बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इस पर्व से एक दिन पहले मनाया जाने वाला नरक चतुर्दशी का पर्व विशेष रूप से धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है। इसे छोटी दिवाली या रूप चौदस भी कहा जाता है। इस दिन, लोग अपने घरों में दीप जलाते हैं, जो केवल प्रकाश का प्रतीक नहीं है, बल्कि इस दिन के पीछे गहन आध्यात्मिक अर्थ भी छिपा हुआ है। मान्यता है कि इस दिन यमराज की पूजा करने और दीपदान करने से व्यक्ति को कई लाभ होते हैं, जैसे कि अकाल मृत्यु का भय समाप्त होना और पितृ दोषों से मुक्ति मिलना। इस वर्ष नरक चतुर्दशी का पर्व **19 अक्टूबर, रविवार** को मनाया जाएगा।

नरक चतुर्दशी का पर्व धन, सौंदर्य और पवित्रता का संगम माना जाता है। इस दिन लोग प्रातःकाल अभ्यंग स्नान, तिलक और रूप चौदस की परंपरा का पालन करते हैं। विशेष रूप से, घर के मुख्य द्वार में और दक्षिण दिशा में दीपक जलाना बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसे यमराज की दिशा माना जाता है। यदि आप इस दिन शुभ मुहूर्त के अनुसार अपने घर की दक्षिण दिशा में चार मुखी दीपक जलाती हैं, तो यह बहुत फलदायी माना जाता है। आइए, पंडित सौरभ त्रिपाठी से जानते हैं कि नरक चतुर्दशी के दिन यम का दीपक किस समय जलना चाहिए।

नरक चतुर्दशी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त

इस वर्ष नरक चतुर्दशी का पर्व **19 अक्टूबर, रविवार** को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार, चतुर्दशी तिथि **19 अक्टूबर की सुबह 11:15 बजे** से आरंभ होकर **रात 12:36 बजे** तक रहेगी।

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यम का दीपक जलाने का शुभ मुहूर्त क्या है?

यदि आप नरक चतुर्दशी के दिन यम का दीपक जलाने का विचार कर रहे हैं, तो यह आवश्यक है कि आप इसे शुभ मुहूर्त में ही जलाएं। आइए, इसके शुभ मुहूर्त के बारे में जानें:

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नरक चतुर्दशी पर यम का दीपक जलाने का महत्व

हिंदू धर्म में नरक चतुर्दशी की रात्रि को यमराज के नाम से दीपक जलाना अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। यह मृत्यु भय से मुक्ति और दीर्घायु प्राप्ति का प्रतीक है। पुराणों में वर्णित है कि जो व्यक्ति इस दिन संध्या समय में अपने घर के मुख्य द्वार पर सरसों के तेल का दीपक जलाता है, उसे यमराज के दूत कभी भी नहीं सताते। गरुड़ पुराण और स्कंद पुराण में इस बात का उल्लेख है कि यम दीपक जलाने से व्यक्ति के जीवन के पाप कट जाते हैं और अगले जन्म में मोक्ष प्राप्त होता है। यह दीपक यमराज को सम्मान देने का प्रतीक भी है।

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यम का दीपक जलाने के नियम

यम का दीपक जलाने के लिए कुछ विशेष नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करना अत्यंत शुभ माना जाता है। आइए, इनके बारे में जानें:

  • यम का दीपक जलाने के लिए आपको मिट्टी का दीपक लेना चाहिए और उसमें सरसों या तिल का तेल डालना चाहिए। तेल में चार बत्तियां रखें, जो चार दिशाओं का प्रतीक होती हैं।
  • दीपक को घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर रखें, क्योंकि दक्षिण दिशा को यमलोक की दिशा माना गया है।
  • दीपक प्रज्ज्वलित करने से पहले आपको स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए।

यदि आप इन नियमों का पालन करते हुए यम का दीपक जलाते हैं, तो आपके घर में सदैव खुशहाली बनी रहेगी। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि जीवन में सकारात्मकता और सुख-शांति का भी संचार करता है। अगर आपको यह जानकारी पसंद आई हो, तो इसे अपने दोस्तों के साथ फेसबुक पर साझा करें और लाइक करें। इसी तरह के अन्य आर्टिकल पढ़ने के लिए हरजिंदगी से जुड़े रहें।

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