दिवाली, जिसे दीपावली भी कहा जाता है, केवल दीपों और रंग-बिरंगी सजावट का पर्व नहीं है। यह महालक्ष्मी और भगवान कुबेर की दिव्य उपस्थिति का प्रतीक है। इस पवित्र रात को माना जाता है कि ब्रह्मांड की समृद्धि की तरंगें अपने चरम पर होती हैं। कहा जाता है कि इस दिन किए गए हर शुभ कार्य, साधना, जप या उपाय का फल कई गुना बढ़ जाता है क्योंकि प्रकृति स्वयं इस ऊर्जा को ग्रहण करने के लिए सक्रिय रहती है।
इस रात घर, मन और वातावरण की शुद्धता का विशेष महत्व होता है। जिस व्यक्ति के घर में सकारात्मक ऊर्जा और प्रकाश का संतुलन होता है, वहां मां लक्ष्मी का निवास होता है। यही कारण है कि दीपावली की रात को धन, स्थिरता और सफलता के नए द्वार खुलने वाले माना जाता है। इस पर्व के अवसर पर विशेष अनुष्ठान और उपाय किए जाते हैं, जो आर्थिक समृद्धि और खुशहाली लाने में सहायक होते हैं।
दिवाली की रात के लिए विशेष उपाय
हम आपको तीन दिव्य और सरल उपायों के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें अपनाने से आर्थिक समृद्धि बढ़ती है और धन का प्रवाह निरंतर बना रहता है। ये उपाय नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर लक्ष्मी तत्त्व को जागृत करते हैं। प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य सिद्धार्थ एस. कुमार के अनुसार, दिवाली की रात साधना और संकल्प का सबसे ऊर्जावान समय होता है। यदि मन से किए गए छोटे उपाय भी सही भावना और श्रद्धा के साथ किए जाएं, तो ये व्यक्ति के जीवन में स्थायी परिवर्तन ला सकते हैं।
श्री सूक्तम् एवं पुरुष सूक्तम् का 11 बार पाठ
दिवाली की रात लक्ष्मी पूजन के बाद, शांत मन से श्री सूक्तम् एवं पुरुष सूक्तम् का 11 बार पाठ करें। यह दोनों सूक्त ऋग्वेद से लिए गए हैं और इनका पाठ घर में धन, सौभाग्य, और ऐश्वर्य की ऊर्जा को स्थाई करता है।
विधि
- उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके, शुद्ध आसन पर बैठें।
- सामने महालक्ष्मी और भगवान विष्णु का चित्र या यंत्र स्थापित करें।
- दीपक जलाएं और पुष्प अर्पित करें।
- फिर पूर्ण श्रद्धा से 11 बार दोनों सूक्तों का पाठ करें।
फल
- इस साधना से घर के द्वार पर स्थायी लक्ष्मी का निवास होता है और धन के स्रोत स्वयं खुलने लगते हैं।
27 गोमती चक्र और 27 पीली कौड़ी की माला
यह धन को आकर्षित करने का एक अत्यंत प्रभावी उपाय है। दिवाली की मध्यरात्रि में इसे करना सबसे अच्छा माना जाता है।
- 27 गोमती चक्र और 27 पीली कौड़ी लें।
- इन्हें पीले रेशमी धागे में पिरोकर एक माला बनाएं।
- पूजन के समय इस माला को मां महालक्ष्मी के चरणों में अर्पित करें।
यह उपाय धन संचित करने का रहस्य होता है। दिवाली की रात 12 बजे के बाद, 11 या 21 घी के दीपक दक्षिण दिशा की ओर जलाएं। इस दिशा में दीपदान पितरों और धनाधिपति कुबेर दोनों को प्रसन्न करता है।
फिर भगवान कुबेर की मूर्ति या चित्र के सामने यह मंत्र 108 बार जपें।
‘ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये नमः’
फल
- यह साधना धन के स्रोतों को खोलती है, बचत बढ़ाती है और आर्थिक स्थिरता प्रदान करती है।
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आप भी इन तीन उपायों को दिवाली की रात को करके मां लक्ष्मी को खुश कर सकती हैं। यदि आपको यह कहानी अच्छी लगी हो तो इसे फेसबुक पर साझा और लाइक जरूर करें। इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से।
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