छठ पूजा सूर्यास्त का समय आज 2025: छठ महापर्व की धूमधाम से शुरुआत हो चुकी है। यह पर्व कार्तिक शुक्ल पक्ष की तृतीया से लेकर षष्ठी तिथि तक मनाया जाता है। पर्व की शुरुआत “नहाय-खाय” से होती है, जिसके बाद दूसरे दिन “खरना” होता है। तीसरे दिन “संध्या अर्घ्य” का आयोजन किया जाता है और चौथे दिन “ऊषा अर्घ्य” के साथ इस महापर्व का समापन होता है। इस वर्ष, छठ पूजा का आयोजन **27 अक्टूबर, सोमवार** को किया जाएगा। इस पर्व का मुख्य उद्देश्य भगवान सूर्य और छठी मैया की पूजा के माध्यम से परिवार के स्वास्थ्य, समृद्धि और कल्याण की कामना करना है। इस दौरान महिलाएं निर्जला उपवास रखती हैं और विभिन्न अनुष्ठानों का पालन करती हैं। छठ पूजा विशेष रूप से बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल के कुछ हिस्सों में धूमधाम से मनाई जाती है, लेकिन देश के विभिन्न हिस्सों में भी इसकी विशेष पहचान है।
छठ पूजा सायंकालीन अर्घ्य का समय (Chhath Puja Sandhya Arghya Time Today 2025)
हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि **27 अक्टूबर** को प्रातः 6:04 बजे से आरंभ हो रही है। इस दिन व्रती महिलाएं डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगी।
- 27 अक्टूबर, सूर्यास्त का समय: शाम **5:40 बजे**
- गोधूलि मुहूर्त: शाम **6:08 बजे** से शाम **6:33 बजे** तक
- षष्ठी तिथि समापन- **28 अक्टूबर**, प्रातः **7:59 बजे**
अधिक जानकारी के लिए पढ़ें: Chhath Puja Arghya Muhurat 2025: छठ पूजा के दौरान सूर्यदेव को सुबह और शाम का अर्घ्य कैसे दें? जानें विधि।

छठ पूजा पर अलग-अलग शहरों में संध्या अर्घ्य का समय (Chhath Puja Sunset Time Today 2025)
यह मान्यता है कि संध्या अर्घ्य सूर्यास्त के समय ही दिया जाता है, और भौगोलिक दृष्टि से सूर्यास्त का समय अलग-अलग स्थानों पर भिन्न होता है। आइए जानते हैं आपके शहर में सूर्यास्त का सही समय क्या होगा:
| शहर का नाम | सूर्यास्त का समय (Sunset Time Today) |
| नई दिल्ली | शाम **5:40 बजे** |
| मुंबई | शाम **6:07 बजे** |
| पटना | शाम **5:12 बजे** |
| रांची | शाम **5:13 बजे** |
| कोलकाता | शाम **5:02 बजे** |
| लखनऊ | शाम **5:27 बजे** |
| कानपुर | शाम **5:30 बजे** |
| प्रयागराज | शाम **5:25 बजे** |
| जयपुर | शाम **5:47 बजे** |
| नेपाल | शाम **5:24 बजे** |
छठ पूजा में संध्या अर्घ्य का महत्व
छठ महापर्व के तीसरे दिन का व्रत दूसरे दिन खीर का प्रसाद ग्रहण करने के बाद से ही शुरू होता है। इस दिन व्रती महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं और मुख्य अनुष्ठान डूबते सूर्य को अर्घ्य देना होता है। यह पर्व सूर्य की आराधना और समाज के कल्याण का प्रतीक है।

यह वर्ष का एकमात्र समय होता है जब डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। यह इस बात का प्रतीक है कि सूर्य डूबने के बाद भी उसकी किरणें अगले दिन फिर से प्रकाश लाएंगी। इस निर्जला व्रत का आयोजन पूरी रात चलता है, जिससे यह पर्व के चार दिनों का सबसे महत्वपूर्ण दिन बन जाता है।
यह दिन छठ महापर्व का सबसे पवित्र दिन होता है क्योंकि महिलाएं 36 घंटे का निर्जला उपवास रखती हैं और सूर्यास्त के समय नदियों, तालाबों या जलाशयों पर एकत्रित होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देती हैं। पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाएं इस दौरान अपने परिवार के स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करते हुए भक्ति गीत गाती हैं। शाम का समय छठ व्रत कथा और भजनों के लिए समर्पित होता है।
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