छठ पूजा का पर्व भारत में एक महत्वपूर्ण धार्मिक उत्सव है, जिसे खासतौर पर उत्तर भारत में मनाया जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से सूर्य देवता और छठी माता की पूजा के लिए समर्पित है। इस दौरान महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं, जिसमें वे बिना पानी के व्रत करती हैं और अपने परिवार, विशेषकर बच्चों की खुशहाल और समृद्ध जीवन की कामना करती हैं। छठ पूजा का उत्सव चार दिन तक चलता है, जिसमें कई विशेष रस्में और अनुष्ठान होते हैं।
यदि आप इस बार छठ पूजा का व्रत पहली बार रखने की सोच रही हैं, तो यह महत्वपूर्ण है कि आप सही चौघड़िया मुहूर्त का ध्यान रखें। सही समय पर पूजा करने से इसके फल में वृद्धि होती है और आपके व्रत का महत्व भी बढ़ जाता है। पंडित सौरभ त्रिपाठी जी, जो छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश से हैं, ने इस अवसर पर खास चौघड़िया मुहूर्त की जानकारी साझा की है, जिसका पालन करके आप अपने व्रत को सही तरीके से शुरू कर सकती हैं।
आज का चौघड़िया मुहूर्त 25 अक्टूबर 2025 (सूर्योदय से सूर्यास्त तक)
छठ पूजा के दौरान सही चौघड़िया मुहूर्त का चयन करना अत्यंत आवश्यक है। इस दिन सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक का समय पूजा के लिए उपयुक्त होता है। विशेषकर, सूर्योदय के समय की पूजा का विशेष महत्व है, क्योंकि इसे शुभ और फलदायक माना जाता है। इस दिन, महिलाएं अपने परिवार के साथ मिलकर सूर्य देवता को अर्घ्य देती हैं और उनकी कृपा के लिए प्रार्थना करती हैं।
हम जानते हैं कि छठ पूजा के दौरान कई प्रकार के प्रसाद भी बनाए जाते हैं, जैसे कि ठेकुआ, फल और अन्य मिठाइयाँ। इन प्रसादों को विशेष रूप से सूर्य को समर्पित किया जाता है। महिलाएं इन प्रसादों को तैयार करने में काफी मेहनत करती हैं और इसे अपने घर के आंगन में रखते हैं ताकि पूजा के समय ये आसानी से उपलब्ध रहें।
छठ पूजा के महत्व और रस्में
छठ पूजा का महत्व केवल धार्मिक नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। इस पर्व के दौरान, महिलाएं अपने घर की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करती हैं और समाज में एकता का संदेश भी फैलाती हैं। यह पर्व महिलाओं की शक्ति और उनके परिवार के प्रति समर्पण को प्रदर्शित करता है।
- पहला दिन: नहाय-खाय – इस दिन महिलाएं स्नान कर विशेष भोजन बनाती हैं।
- दूसरा दिन: खरना – इस दिन महिलाएं दिनभर उपवास रखती हैं और शाम को खीर-पूड़ी का भोग अर्पित करती हैं।
- तीसरा दिन: सूर्य अर्घ्य – इस दिन सुबह उठकर महिलाएं सूर्य को अर्घ्य देती हैं।
- चौथा दिन: उगी हुई सूर्य को अर्घ्य – इस दिन भी महिलाएं सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत समाप्त करती हैं।
छठ पूजा की रस्में न केवल धार्मिक होती हैं, बल्कि यह पारिवारिक बंधनों को भी मजबूत करती हैं। इस दौरान परिवार के सभी सदस्य एकत्र होते हैं, जो एकता और प्रेम का प्रतीक है। यह पर्व विशेष रूप से माताओं के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि वे अपने बच्चों के भविष्य के लिए प्रार्थना करती हैं।
छठ पूजा के दौरान सावधानियाँ
छठ पूजा के दौरान कुछ सावधानियों का पालन करना भी आवश्यक होता है। जैसे कि:
- पूजा स्थल को स्वच्छ रखें और सभी सामग्री को सही तरीके से तैयार करें।
- व्रत के दौरान सभी नियमों का पालन करें, जैसे कि निर्जला व्रत का पालन।
- सूर्य को अर्घ्य देते समय मन में सकारात्मक विचार रखें।
- परिवार के सभी सदस्य एकसाथ पूजा करें, इससे एकता बढ़ती है।
यदि आप भी इस छठ पूजा को मनाने का निर्णय ले रही हैं, तो उपरोक्त सभी बातों का ध्यान रखें। यह पर्व आपके जीवन में खुशियाँ और समृद्धि लाने का एक अवसर है।
यदि आपको यह लेख पसंद आया हो, तो इसे अपने दोस्तों और परिवार के साथ साझा करें। इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट हरजिंदगी से जुड़े रहें।





