Brotherhood: ‘यम और यमुना’ की अमर कथा, भाईदूज पर पढ़ें!

हिंदू धर्म में भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और प्यार को समर्पित त्योहारों में रक्षाबंधन और भाई दूज का विशेष स्थान है। भाई दूज का त्योहार दिवाली के 2 दिन बाद मनाया जाता है और यह न केवल एक धार्मिक उत्सव है, बल्कि भाई-बहन के गहरे भावनात्मक रिश्ते का प्रतीक भी है। इस दिन की कथा…

Brotherhood: ‘यम और यमुना’ की अमर कथा, भाईदूज पर पढ़ें!

हिंदू धर्म में भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और प्यार को समर्पित त्योहारों में रक्षाबंधन और भाई दूज का विशेष स्थान है। भाई दूज का त्योहार दिवाली के 2 दिन बाद मनाया जाता है और यह न केवल एक धार्मिक उत्सव है, बल्कि भाई-बहन के गहरे भावनात्मक रिश्ते का प्रतीक भी है। इस दिन की कथा यमराज और उनकी बहन यमुना के अमर प्रेम से जुड़ी हुई है, जिसने इस पर्व को एक विशेष आध्यात्मिक और पारिवारिक महत्व दिया है।

भाई दूज की कथा (Bhai Dooj Katha 2025)

भाई दूज के पीछे की कथा हिंदू पौराणिक मान्यताओं में गहराई से निहित है। कहा जाता है कि भगवान सूर्यदेव की पत्नी छाया के दो संतान थे, यमराज और यमुना। यमुना अपने भाई यमराज से अपार स्नेह करती थीं और अक्सर उन्हें घर आने का आमंत्रण देती थीं। यमराज, जो मृत्यु के देवता माने जाते हैं, अपने कार्यों में अत्यंत व्यस्त रहते थे। आत्माओं को यमलोक ले जाना और धर्म के अनुसार निर्णय देना उनका कर्तव्य था, इसलिए वे अपनी बहन यमुना के बुलाने पर भी समय नहीं निकाल पाते थे।

एक दिन, कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को, यमुना ने फिर से अपने भाई यमराज को प्रेमपूर्वक भोजन के लिए आमंत्रित किया। इस बार यमराज ने बहन का मन न तोड़ने का निर्णय लिया और उनके घर जाने का निश्चय किया। रास्ते में उन्होंने नरक में पीड़ित आत्माओं को मुक्ति भी प्रदान की। यह इस बात का प्रतीक माना जाता है कि भाई दूज का दिन मुक्ति, प्रेम और सद्भावना का प्रतीक है।

जैसे ही यमराज यमुना के घर पहुंचे, तो यमुना अत्यंत प्रसन्न हो उठीं। उन्होंने अपने भाई का स्वागत पूरे हर्ष और सम्मान के साथ किया। यमुना ने यमराज का स्नान कराया, तिलक लगाया, पुष्प और अक्षत अर्पित किए और फिर प्रेमपूर्वक स्वादिष्ट भोजन परोसा। बहन के इस प्रेम और आतिथ्य से यमराज बहुत प्रसन्न हुए।

यमराज ने यमुना की श्रद्धा और प्रेम देखकर कहा, “हे बहन, तुमने मुझे इतने प्रेम से सत्कार किया है, इसलिए मैं तुमसे कोई वरदान मांगने को कहता हूँ।” यमुना ने बिना देर किए कहा, “भैया, मेरी यही इच्छा है कि आप हर वर्ष इसी दिन मेरे घर आएं और इस दिन जो भी भाई अपनी बहन के घर आएगा, उसके माथे पर तिलक लगाया जाएगा और उसे स्नेहपूर्वक भोजन कराया जाएगा। उसे आपका भय कभी नहीं रहेगा।”

यमराज ने बहन की बात स्वीकार की और कहा, “तथास्तु।” इसके बाद वे यमलोक वापस चले गए। तब से यह परंपरा चल पड़ी कि कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन भाई अपनी बहन के घर जाते हैं, बहन तिलक लगाकर उनकी लंबी आयु और समृद्धि की कामना करती है, और भाई बहन को उपहार देकर उनके प्रति प्रेम और सुरक्षा का वचन देता है।

yamraj

कथा का धार्मिक महत्व

इस कथा का अर्थ केवल यमराज और यमुना के संबंध तक सीमित नहीं है। इसका गहरा संदेश यह है कि भाई-बहन के बीच प्रेम, सम्मान और एक-दूसरे के प्रति समर्पण कितना पवित्र होता है। भाई दूज पर बहन द्वारा भाई के माथे पर लगाया गया तिलक केवल एक प्रतीकात्मक रिवाज नहीं है, बल्कि इसके पीछे उसके दीर्घायु, सुख और समृद्धि की हार्दिक कामना भी निहित है।

यमराज का वरदान यह दर्शाता है कि यदि इस दिन बहन के घर जाकर भाई तिलक और भोजन ग्रहण करता है, तो उसे अकाल मृत्यु या यमराज के कोप का भय नहीं रहता। इस दिन को लेकर यह मान्यता भी है कि जो भाई बहन का आशीर्वाद प्राप्त करता है, उसका जीवन खुशियों और समृद्धि से भर जाता है। यह परंपरा न केवल भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत बनाती है, बल्कि परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और सौहार्द को भी बढ़ावा देती है।

भाई दूज का यह पर्व हर साल भाई-बहन के रिश्ते को और भी मजबूत बनाता है। यह दिन उन यादों को ताजा करता है जो भाई-बहन ने एक साथ बिताए हैं। इस दिन का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह परिवार का एकजुट होने का अवसर देता है।

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