मध्य प्रदेश की 96 हजार आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए बड़ी जीत: हाईकोर्ट ने सरकार को 1400 करोड़ के एरियर भुगतान का दिया आदेश
मध्य प्रदेश की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए एक बेहद सुखद और राहत भरी खबर सामने आई है। जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को एक ऐतिहासिक निर्देश जारी किया है, जिसके तहत सरकार को पिछले चार वर्षों से लंबित 1400 करोड़ रुपये का एरियर (बकाया मानदेय) जल्द से जल्द जारी करना होगा। इस फैसले से प्रदेश की लगभग 96 हजार आंगनवाड़ी कर्मियों के चेहरों पर मुस्कान लौट आई है, जो लंबे समय से अपने हक की इस राशि के लिए संघर्ष कर रही थीं।
न्यायालय ने न केवल बकाया भुगतान सुनिश्चित करने का आदेश दिया है, बल्कि राज्य सरकार को पूर्व में कटौती किए गए अपने अंशदान (कंट्रीब्यूशन) को भी बहाल करने को कहा है। यह निर्णय आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के उस लंबे कानूनी संघर्ष का परिणाम है, जो उन्होंने अपने मानदेय में की गई अनुचित कटौती के खिलाफ छेड़ा था। कोर्ट का यह फैसला सरकारी कर्मचारियों के हितों की रक्षा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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क्या था पूरा विवाद?
वर्ष 2018 में केंद्र सरकार ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के मनोबल को बढ़ाने और उनके कार्य के महत्व को देखते हुए उनके मानदेय में 1500 रुपये की बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया था। इस निर्णय के बाद कार्यकर्ताओं को कुछ समय तक लाभ भी मिला, लेकिन इसके बाद मध्य प्रदेश सरकार ने अपने हिस्से के अंशदान में कटौती कर दी। सरकार के इस फैसले का सीधा असर कार्यकर्ताओं के कुल मानदेय पर पड़ा और उन्हें मिलने वाली राशि में कमी आ गई।
इस कटौती से नाराज आंगनवाड़ी कार्यकर्ता संगठनों ने इसे अपने अधिकारों का हनन मानते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनका तर्क था कि केंद्र द्वारा बढ़ाए गए मानदेय का लाभ उन्हें पूरा मिलना चाहिए, न कि राज्य सरकार द्वारा अपने हिस्से में कटौती कर उसे निष्प्रभावी कर देना चाहिए। अदालत में चली लंबी सुनवाई के बाद अब जाकर इन हजारों महिलाओं को बड़ी राहत मिली है।
फैसले की मुख्य बातें और शर्तें
हाईकोर्ट के इस ताजा आदेश ने स्थिति को स्पष्ट कर दिया है। सरकार को अब साल 2019 से लेकर 2023 तक की अवधि का पूरा एरियर भुगतान करना होगा। हालांकि, अदालत ने इस भुगतान को लेकर एक अहम शर्त भी रखी है। आइए जानते हैं इस फैसले के प्रमुख बिंदु:
- कुल बकाया राशि: राज्य सरकार को लगभग 1400 करोड़ रुपये का एरियर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को वितरित करना होगा।
- अंशदान की बहाली: कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह अपने द्वारा घटाए गए अंशदान को फिर से बहाल करे ताकि भविष्य में मानदेय की समस्या न हो।
- ब्याज पर रोक: हालांकि कोर्ट ने एरियर भुगतान के आदेश दिए हैं, लेकिन भुगतान की जाने वाली राशि पर 6% ब्याज देने के सिंगल बेंच के निर्देश पर फिलहाल रोक लगा दी गई है।
- लाभार्थी: इस फैसले का सीधा लाभ प्रदेश भर की करीब 96 हजार आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को मिलेगा।
सिंगल बेंच के फैसले में हुआ संशोधन
इससे पहले इस मामले में सिंगल बेंच ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के पक्ष में निर्णय सुनाते हुए सरकार को 120 दिनों के भीतर न केवल पूरा बकाया भुगतान करने, बल्कि उस पर 6% ब्याज देने का भी आदेश दिया था। सरकार ने इस आदेश के खिलाफ अपील की थी, जिसके बाद अब डिवीजन बेंच ने इस पर सुनवाई करते हुए संशोधन किया है।
नए फैसले में एरियर और अंशदान जारी करने के आदेश को तो बरकरार रखा गया है, लेकिन ब्याज वाले प्रावधान को हटा दिया गया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ब्याज पर रोक लगने के बावजूद, मूल बकाया राशि का मिलना ही इन कार्यकर्ताओं के लिए एक बड़ी जीत है। अब देखना यह होगा कि राज्य सरकार कितनी जल्दी इस आदेश का पालन करते हुए राशि का वितरण शुरू करती है।
प्रदेश की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने इस फैसले पर संतोष जाहिर किया है। उनका कहना है कि यह केवल पैसों की बात नहीं है, बल्कि उनके काम के सम्मान की लड़ाई थी। पिछले चार सालों से वे इस लंबित राशि के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही थीं। अब जबकि हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दे दिए हैं, तो उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले कुछ महीनों में यह पूरी राशि उनके खातों में पहुंच जाएगी।





