Corruption: इंदौर नगर निगम में नक्शा घोटाला, करोड़ों के नुकसान की आशंका पर जांच शुरू

Summary

मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में नगर निगम के कामकाज को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। नगर निगम के भवन निर्माण शाखा में पिछले कुछ समय से चल रहे कथित ‘नक्शा पासिंग खेल’ पर अब प्रशासन की पैनी नजर है। दरअसल, पिछले एक साल के दौरान भवन नक्शों की मंजूरी से…

इंदौर नगर निगम में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: भवन नक्शा मंजूरी घोटाले की जांच के आदेश

मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में नगर निगम के कामकाज को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। नगर निगम के भवन निर्माण शाखा में पिछले कुछ समय से चल रहे कथित ‘नक्शा पासिंग खेल’ पर अब प्रशासन की पैनी नजर है। दरअसल, पिछले एक साल के दौरान भवन नक्शों की मंजूरी से प्राप्त होने वाले राजस्व में आई भारी गिरावट ने नगर निगम प्रशासन की नींद उड़ा दी है। इस अप्रत्याशित कमी के बाद निगम आयुक्त ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए पिछले एक साल में पास हुए सभी भवन नक्शों की गहन जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।

नगर निगम के गलियारों में चर्चा है कि नक्शा पासिंग के नाम पर बड़े पैमाने पर अनियमिताओं को अंजाम दिया गया है। राजस्व में आई इस गिरावट के पीछे अधिकारियों और बिल्डरों की मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है। निगम आयुक्त ने इस जांच को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए एक अनूठी रणनीति अपनाई है, जिसके तहत अब एक जोन के नक्शों की जांच उसी जोन के अधिकारी नहीं, बल्कि दूसरे जोन के अधिकारी करेंगे ताकि किसी भी तरह की लीपापोती की गुंजाइश न रहे।

राजस्व में गिरावट से मचा हड़कंप

भवन निर्माण अनुज्ञा (Building Permission) नगर निगम की आय का एक प्रमुख स्रोत है। शहर में होने वाले हर निर्माण कार्य के लिए नक्शा पास कराना अनिवार्य है, जिसके बदले निगम को भारी-भरकम शुल्क मिलता है। लेकिन बीते वित्तीय वर्ष के आंकड़ों ने निगम के वरिष्ठ अधिकारियों को चौंका दिया। पिछले वर्षों की तुलना में राजस्व का ग्राफ अचानक नीचे गिर गया, जबकि शहर में निर्माण कार्यों की गति में कोई कमी नहीं आई थी। इस विरोधाभास ने सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की ओर इशारा किया है।

प्रशासन का मानना है कि या तो नियमों को ताक पर रखकर नक्शे पास किए गए या फिर सरकारी खजाने में जमा होने वाले शुल्क में हेराफेरी की गई है। इस गड़बड़ी की जड़ तक पहुंचने के लिए अब पिछले एक साल की हर एक फाइल को बारीकी से खंगाला जा रहा है। क्या शुल्क कम वसूला गया? क्या अवैध निर्माणों को संरक्षण दिया गया? इन सभी सवालों के जवाब अब जांच टीम तलाश रही है।

निष्पक्षता के लिए बदले गए जांच के नियम

नगर निगम आयुक्त द्वारा अपनाई गई नई जांच प्रक्रिया काफी सख्त है। जांच को निष्पक्ष रखने के लिए ‘क्रॉस-जोन’ वेरिफिकेशन का तरीका अपनाया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्थानीय स्तर पर अधिकारियों के बीच बनी साठगांठ का लाभ किसी को न मिले। यह व्यवस्था इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अक्सर एक ही जोन में काम करने वाले अधिकारी एक-दूसरे की गलतियों को दबाने का प्रयास करते हैं, लेकिन अब दूसरे जोन के अधिकारी जब फाइलों का भौतिक सत्यापन करेंगे, तो अनियमितताएं छिपना मुश्किल होगा।

  • भवन नक्शा जांच: पिछले एक साल की सभी फाइलों का होगा भौतिक सत्यापन।
  • राजस्व का लेखा-जोखा: तय शुल्क से कम पैसे जमा करने वाले मामलों की पहचान होगी।
  • अधिकारियों पर निगरानी: जोन बदलकर जांच करने से मिलीभगत पर लगेगी लगाम।
  • दोषियों पर कार्रवाई: अनियमितता पाए जाने पर संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों पर होगी सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई।

हजारों फाइलों की होगी पड़ताल, दोषियों पर गिरेगी गाज

इंदौर नगर निगम में हर साल हजारों की संख्या में भवन नक्शे मंजूर किए जाते हैं। अब इन सभी फाइलों का ऑडिट किया जाएगा। जांच टीम मुख्य रूप से इस बात पर ध्यान केंद्रित करेगी कि क्या नक्शों की मंजूरी में नियमों का पालन हुआ है या फिर नियमों में ढील देकर किसी को अनुचित लाभ पहुंचाया गया है। इस जांच के दायरे में केवल फाइलें ही नहीं, बल्कि उन फाइलों को मंजूरी देने वाले संबंधित अधिकारी और कर्मचारी भी आएंगे।

सूत्रों के अनुसार, यदि जांच में यह साबित होता है कि निगम को जानबूझकर राजस्व का नुकसान पहुंचाया गया है, तो दोषी अधिकारियों के खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई होगी, बल्कि उनके खिलाफ आपराधिक मामला भी दर्ज किया जा सकता है। वर्तमान में निगम प्रशासन पूरी तरह से इस ‘नक्शा घोटाले’ की तह तक जाने के मूड में है। शहर के नागरिकों और डेवलपर्स के बीच भी इस जांच को लेकर काफी चर्चा है, क्योंकि इससे भविष्य में नक्शा पासिंग की प्रक्रिया में पारदर्शिता आने की उम्मीद है।

फिलहाल, निगम मुख्यालय में फाइलों का अंबार लग चुका है और जांच अधिकारी एक-एक कर फाइलों को खंगाल रहे हैं। आने वाले कुछ दिनों में जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक होने की उम्मीद है, जिसके बाद कई बड़े अधिकारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। यह पूरी प्रक्रिया निगम प्रशासन की साख बचाने और भ्रष्टाचार मुक्त कार्यप्रणाली सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।