Agriculture: एमपी कृषि कार्यक्रम में बत्ती गुल, 4 अधिकारी सस्पेंड, 24 घंटे का अल्टीमेटम

Summary

ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में हाल ही में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम में हुई बड़ी तकनीकी चूक ने जिला प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीते 06 जुलाई को कृषि विश्वविद्यालय के सभागार में ‘उन्नत कृषि संभागीय कार्यशाला’ का आयोजन किया गया था। इस गरिमामयी कार्यक्रम में प्रदेश के कैबिनेट मंत्री,…

ग्वालियर में सरकारी कार्यक्रम में बिजली गुल होना पड़ा भारी, PWD के चार इंजीनियरों पर गिरी गाज

ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में हाल ही में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम में हुई बड़ी तकनीकी चूक ने जिला प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीते 06 जुलाई को कृषि विश्वविद्यालय के सभागार में ‘उन्नत कृषि संभागीय कार्यशाला’ का आयोजन किया गया था। इस गरिमामयी कार्यक्रम में प्रदेश के कैबिनेट मंत्री, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि और राज्य के आला अधिकारी मौजूद थे। लेकिन, कार्यक्रम के दौरान बिजली और साउंड सिस्टम की अचानक हुई विफलता ने न केवल आयोजन की गरिमा को ठेस पहुंचाई, बल्कि वहां मौजूद अतिथियों के सामने प्रशासन की भारी फजीहत भी कराई। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान ने कड़ा रुख अपनाते हुए लोक निर्माण विभाग (PWD) के चार जिम्मेदार इंजीनियरों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

कार्यक्रम के दौरान हुई इस अव्यवस्था ने मौके पर मौजूद लोगों को हैरान कर दिया। जब कार्यक्रम अपने पूरे शबाब पर था और महत्वपूर्ण चर्चाएं चल रही थीं, तभी अचानक सभागार की बत्तियां गुल हो गईं। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बैकअप के तौर पर रखा गया जनरेटर भी मौके पर काम नहीं आया, जिससे माइक सिस्टम पूरी तरह बंद हो गया। इस तकनीकी खामी के कारण मंच पर मौजूद मंत्री और अन्य अतिथि कुछ समय के लिए असहज हो गए और कार्यक्रम की कार्यवाही को अचानक रोकना पड़ा। इस घटना के बाद से ही प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है और इसे सरकारी काम में घोर लापरवाही के रूप में देखा जा रहा है।

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लापरवाही का खामियाजा: PWD के अधिकारी नपे

प्राथमिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए बिजली, लाइटिंग और साउंड सिस्टम की सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करना लोक निर्माण विभाग के संबंधित इंजीनियरों की प्राथमिक जिम्मेदारी थी। आयोजन से पहले इन सभी व्यवस्थाओं का परीक्षण किया जाना अनिवार्य था, लेकिन इंजीनियरों की ओर से की गई अनदेखी ने इस बड़े आयोजन को प्रभावित किया। कलेक्टर रुचिका चौहान ने इस मामले को प्रशासनिक अनुशासनहीनता मानते हुए तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए।

नोटिस की जद में आए प्रमुख अधिकारी:

  • मौसम जैन, कार्यपालन यंत्री (EE), लोक निर्माण विभाग
  • प्रदीप कुमार कटारा, सहायक यंत्री (AE), लोक निर्माण विभाग
  • सारस चंदेरिया, उपयंत्री (Sub-Engineer), लोक निर्माण विभाग
  • निशांत श्रीवास्तव, सहायक विद्युत निरीक्षक

24 घंटे का अल्टीमेटम और आगे की कार्रवाई

जिला प्रशासन ने इन सभी चार अधिकारियों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है कि आखिर आयोजन के दौरान बिजली और साउंड सिस्टम की व्यवस्था क्यों विफल रही और इसके लिए किसे जिम्मेदार माना जाए। इन अधिकारियों को अपने जवाब के लिए 24 घंटे का समय दिया गया है। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो उनके खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया और तेज की जा सकती है।

यह घटना इस बात का संकेत है कि सरकारी कार्यक्रमों में अब प्रशासन ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपना रहा है। भविष्य में इस तरह की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी महत्वपूर्ण कार्यक्रम के आयोजन से पहले सभी तकनीकी पहलुओं का भौतिक सत्यापन अनिवार्य होगा। फिलहाल, PWD विभाग में इस नोटिस के बाद हड़कंप की स्थिति बनी हुई है और संबंधित इंजीनियरों की जवाबदेही तय करने की कवायद शुरू हो गई है।