सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना सरकार की याचिका खारिज की
जोधपुर, 16 अक्टूबर 2025: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को तेलंगाना सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें तेलंगाना उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश को चुनौती दी गई थी। यह आदेश राज्य सरकार के निर्णय को रोकने से संबंधित था, जिसमें स्थानीय निकाय चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण को 42 प्रतिशत तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया था। यदि यह वृद्धि लागू होती, तो राज्य के स्थानीय निकायों में कुल आरक्षण 67 प्रतिशत तक पहुंच जाता।
सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता शामिल थे, ने स्पष्ट किया कि याचिका को खारिज करने का निर्णय उच्च न्यायालय को इस मामले पर अपनी merits पर निर्णय देने से नहीं रोकेगा। यह निर्णय तेलंगाना की राजनीतिक स्थिति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर जब स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारी चल रही है।
तेलंगाना सरकार की याचिका का संदर्भ
तेलंगाना सरकार ने उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसमें ओबीसी के लिए आरक्षण बढ़ाने की प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोक दिया गया था। यह वृद्धि Panchayat Raj (Amendment) Bill, 2025 और Telangana Municipalities (Amendment) Bill, 2025 के माध्यम से प्रस्तावित की गई थी, जो इस वर्ष अगस्त में विधानसभा में पारित हुई थी।
इस मामले में तेलंगाना सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि उच्च न्यायालय का आदेश सुप्रीम कोर्ट के नौ-जजों की पीठ के फैसले के विपरीत है, जिसमें इंदिरा साहनी मामले में यह कहा गया था कि विशेष परिस्थितियों में 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा को पार किया जा सकता है।
विपक्ष का तर्क
वहीं, दूसरी ओर, वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल संकरनारायण, जो याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, ने यह स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले केवल अनुसूचित जनजातियों के लिए पांचवें अनुसूची क्षेत्रों में आरक्षण को 50 प्रतिशत से अधिक करने की अनुमति देते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इंदिरा साहनी का निर्णय रोजगार और शिक्षा में सामाजिक-आर्थिक आरक्षण से संबंधित है, न कि स्थानीय शासन में राजनीतिक आरक्षण से।
सुप्रीम कोर्ट का अंतिम निर्णय
सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों की सुनवाई के बाद तेलंगाना सरकार की याचिका को खारिज कर दिया और यह निर्देश दिया कि स्थानीय निकाय चुनाव, जो 9 अक्टूबर से शुरू हुए थे, बिना किसी विघ्न के जारी रहें। इस फैसले ने तेलंगाना में राजनीतिक हलचल को बढ़ा दिया है, क्योंकि यह स्थानीय निकाय चुनावों पर सीधा प्रभाव डालता है।
इस प्रकार, तेलंगाना सरकार को अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है, खासकर जब कि स्थानीय निकाय चुनावों का माहौल गर्म है। राजनीतिक विश्लेषक इस मामले को राज्य की राजनीतिक स्थिति के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं, और यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार अब इस निर्णय के बाद आगे क्या कदम उठाती है।
(आईएएनएस की जानकारी के साथ)





