Viral: शिल्पी राज का नया भोजपुरी गीत ‘बहंगी लचकत जाए’ छठ घाट की भक्ति की सुंदरता

Summary

छठ पूजा का महापर्व, जो भारतीय संस्कृति में एक विशेष स्थान रखता है, इस वर्ष 27 अक्टूबर 2025, सोमवार को अपने तीसरे दिन यानी संध्या अर्घ्य के साथ मनाया जाएगा। इस दिन व्रती डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करती हैं और अपने परिवार के साथ पूरे श्रद्धा और श्रृंगार के साथ छठ घाट पहुंचती हैं।…

Viral: शिल्पी राज का नया भोजपुरी गीत ‘बहंगी लचकत जाए’ छठ घाट की भक्ति की सुंदरता

छठ पूजा का महापर्व, जो भारतीय संस्कृति में एक विशेष स्थान रखता है, इस वर्ष 27 अक्टूबर 2025, सोमवार को अपने तीसरे दिन यानी संध्या अर्घ्य के साथ मनाया जाएगा। इस दिन व्रती डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करती हैं और अपने परिवार के साथ पूरे श्रद्धा और श्रृंगार के साथ छठ घाट पहुंचती हैं। इस खास अवसर पर भोजपुरी संगीत जगत में भी भक्ति का रंग बिखर गया है, खासकर शिल्पी राज का नया छठ गीत ‘बहंगी लचकत जाए’ जो फैंस के बीच तेजी से वायरल हो रहा है। चलिए, हम इस गीत की विशेषताओं और इसके पीछे की भावनाओं पर चर्चा करते हैं।

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‘बहंगी लचकत जाए’ ने जीता दिल

यह भक्ति गीत Angle Music यूट्यूब चैनल पर रिलीज किया गया है और इसे कुछ ही घंटों में हजारों व्यूज़ मिल चुके हैं। इस गीत के बोल मशहूर गीतकार संगीत कुमार सोनू ने लिखे हैं, जबकि संगीत की व्यवस्था कृष्ण मुरारी और सोनू आजाद ने की है। वीडियो में निशा नैना और शिवम सिंह मुख्य भूमिका में नजर आ रहे हैं।

गीत का थीम और भावनाएं

‘बहंगी लचकत जाए’ गाने में छठ महापर्व की पारंपरिक झलक दिखाई देती है। इस गीत में एक पत्नी अपने पति से प्रेम भरे अंदाज में कहती है कि बांस की बहंगी लचकते हुए घाट की ओर जा रही है। वह अपने पति से ‘पियरी’ यानी पीले वस्त्र पहनने के लिए भी कहती है, जो छठ पूजा की परंपरा को दर्शाता है। शिल्पी राज की मधुर आवाज इस गीत को और भी भावनात्मक बनाती है, जो हर छठ घाट पर गूंजती सुनाई देती है।

फैंस की प्रतिक्रिया

गाना रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर फैंस ने इसे जमकर सराहा। कई यूजर्स ने लिखा, “शिल्पी राज की आवाज़ बहुत प्यारी है!” तो वहीं कुछ ने कमेंट सेक्शन में “जय छठी मइया!” के नारे भी लगाए। इस गाने ने न केवल भक्तों के दिलों को छू लिया है, बल्कि इसे सुनने वाले सभी लोगों में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी किया है।

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छठ पूजा का महत्व

छठ पूजा का महापर्व विशेष रूप से बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल में मनाया जाता है। यह पर्व सूर्य देवता और छठी मइया की पूजा के लिए समर्पित है। व्रती इस दिन उपवासी रहकर सूर्य देवता की आराधना करती हैं और उनके प्रति आभार व्यक्त करती हैं। यह पर्व न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक भी है, जहां परिवार एकजुट होकर इस पर्व को मनाते हैं।

छठ पूजा का आयोजन चार दिनों तक चलता है, जिसमें नहाय खाय, खिचड़ी, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य शामिल होते हैं। इस दौरान व्रती कई नियमों का पालन करती हैं, जैसे कि विशेष प्रकार का भोजन, स्नान, और पूरे दिन उपवास। इस पर्व का उद्देश्य न केवल प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करना है, बल्कि यह हमारे पारिवारिक और सामाजिक बंधनों को भी मजबूत बनाने का कार्य करता है।

भोजपुरी संगीत में छठ पूजा के गीतों का योगदान

भोजपुरी संगीत में छठ पूजा के गीतों का एक विशेष स्थान है। इन गीतों में भक्तिभाव और पारंपरिकता का अद्भुत समावेश होता है। शिल्पी राज जैसे कलाकार इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नई पीढ़ी को इस महापर्व के महत्व से अवगत कराते हैं। उनके द्वारा गाए गए छठ गीत न केवल भक्तों के मन में श्रद्धा जगाते हैं, बल्कि समाज में एकजुटता और प्रेम का संदेश भी फैलाते हैं।

इस प्रकार, छठ पूजा का महापर्व न केवल धार्मिकता का प्रतीक है, बल्कि यह हमारी संस्कृति और परंपराओं को भी दर्शाता है। इस मौके पर संगीत और भक्ति का संगम एक नई ऊर्जा का संचार करता है, जो हर भक्त के दिल में गूंजता है।

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