भोजपुरी फिल्म ‘छठ’ का भव्य प्रीमियर समारोह
भोजपुरी फिल्म छठ: एसपी वर्मा रोड स्थित कॉम्प्लेक्स सिनेमा में चंपारण टॉकीज द्वारा निर्मित भोजपुरी फिल्म ‘छठ’ का शानदार प्रीमियर आयोजित किया गया। इस विशेष अवसर पर नेशनल अवॉर्ड विनर प्रोड्यूसर एवं हॉलीवुड-बॉलीवुड अभिनेत्री नीतू चंद्रा और नेशनल अवॉर्ड विनर निर्देशक नितिन चंद्रा उपस्थित रहे। इस फिल्म ने दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी है, जहां यह दिखाती है कि किस तरह संयुक्त परिवार के रिश्ते, मतभेदों और अटूट प्रेम को दर्शाती है। फिल्म के गीत में प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर ने अपनी आवाज दी है, जिसने फिल्म की संगीत में चार चांद लगा दिए हैं।
अश्लीलता के खिलाफ एक प्रेरणादायक कहानी
निर्देशक नितिन चंद्रा ने बताया कि यह फिल्म उनकी दिवंगत शारदा दीदी को श्रद्धांजलि है। यह फिल्म लगभग दो घंटे पंद्रह मिनट लंबी है और एक परिवार की भावनात्मक यात्रा पर आधारित है। फिल्म में छठ पूजा के दौरान आई अनबन को रिश्तों की ताकत से सुलझाया जाता है। इस फिल्म के माध्यम से नितिन चंद्रा ने भोजपुरी सिनेमा में फैली अश्लीलता और फूहड़ता पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य शिक्षित और मध्यमवर्गीय समाज तक साफ-सुथरा सिनेमा पहुँचाना है। इसी सोच के कारण उन्हें स्पॉन्सरशिप की चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन वे अपने विचारों पर अडिग रहे।
धार्मिकता और पवित्रता के साथ फिल्म की शूटिंग
निर्माता नीतू चंद्रा ने साझा किया कि फिल्म की शूटिंग के दौरान टीम ने बहुत मेहनत की। गर्मी और उमस के बावजूद, सभी कलाकारों ने पूरी निष्ठा से काम किया। शूटिंग के पूरे माहौल को धार्मिक और पवित्र बनाए रखने के लिए, पूरी टीम ने नॉन-वेज भोजन से परहेज किया और पूजा स्थलों पर जूते-चप्पल नहीं पहने। यह एक ऐसा कदम था, जो फिल्म की भावनात्मक गहराई को और भी बढ़ाता है।
स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहन
नीतू चंद्रा ने बताया कि फिल्म के लगभग सभी कलाकार और टेक्नीशियन बिहार से हैं। समस्तीपुर में हुई शूटिंग में करीब सौ स्थानीय लोगों ने काम किया। उनका उद्देश्य हमेशा स्थानीय प्रतिभाओं को मौका देकर बिहार के फिल्म उद्योग को मजबूत करना है। नीतू चंद्रा का मानना है कि स्थानीय लोगों को अवसर देने से न केवल फिल्म उद्योग को लाभ होता है, बल्कि यह समाज के विकास में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
फिल्म का संदेश और सामाजिक प्रभाव
फिल्म ‘छठ’ का संदेश न केवल मनोरंजन प्रदान करना है, बल्कि यह दर्शकों को अपने परिवारों के महत्व और रिश्तों की गहराई को समझने के लिए भी प्रेरित करती है। यह फिल्म एक ऐसा प्लेटफ़ॉर्म है, जो दर्शकों को बताता है कि कैसे परिवार में प्यार और एकता को बनाए रखा जा सकता है, भले ही मतभेद क्यों न हों। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे छठ पूजा के माध्यम से परिवार के सदस्यों के बीच की दरारें मिटाई जा सकती हैं।
आगामी संभावनाएं
भोजपुरी फिल्म उद्योग में ‘छठ’ जैसी फिल्मों की जरूरत है, जो सामाजिक मुद्दों को उठाती हैं और दर्शकों को एक सकारात्मक संदेश देती हैं। नितिन चंद्रा और नीतू चंद्रा जैसे निर्माता-निर्देशकों का इस दिशा में काम करना निश्चित ही भोजपुरी सिनेमा की छवि को बदलने में सहायक होगा। आने वाले समय में, इस तरह की फिल्में न केवल मनोरंजन का साधन बनेंगी, बल्कि सामाजिक परिवर्तन में भी योगदान देंगी।





