रायपुर में गरमाया अतिक्रमण का मुद्दा: सम्मानपुर-नकटी के विस्थापितों के समर्थन में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में इन दिनों ग्राम सम्मानपुर-नकटी में हुई कथित अवैध कार्रवाई का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। स्थानीय प्रशासन द्वारा गरीब परिवारों के घरों पर की गई कार्रवाई को लेकर लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। इसी कड़ी में आज जिला कांग्रेस कमेटी रायपुर ग्रामीण एवं शहर इकाई के संयुक्त नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीणों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने माना थाने का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रशासन ने बिना किसी ठोस पूर्व सूचना और पुनर्वास की व्यवस्था किए बिना ही गरीब परिवारों को बेघर कर दिया, जो पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है।
थाना परिसर के बाहर हजारों की संख्या में जमा हुई भीड़ ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण ढंग से जमीन पर बैठकर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग पर अड़े रहे। कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि जब तक गरीब परिवारों को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक यह संघर्ष किसी भी सूरत में रुकने वाला नहीं है। उन्होंने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि विकास के नाम पर गरीबों की आशियाना उजाड़ना मानवीय संवेदनाओं के विरुद्ध है और इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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न्याय, मुआवजा और पुनर्वास की मांग
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने प्रशासन के सामने अपनी मांगें प्रमुखता से रखीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस पूरे मामले की एक निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किन परिस्थितियों में और किसके आदेश पर यह कार्रवाई की गई। कांग्रेस की प्रमुख मांगों में निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:
- निष्पक्ष जांच: प्रभावित परिवारों के घरों पर हुई कार्रवाई की न्यायिक या उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई: जिन भी जिम्मेदार अधिकारियों और व्यक्तियों ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया, उनके खिलाफ तत्काल प्रभाव से एफआईआर दर्ज की जाए।
- उचित मुआवजा: जिन परिवारों के घरों को नुकसान पहुंचा है, उन्हें सरकारी नियमानुसार तत्काल आर्थिक सहायता और मुआवजा प्रदान किया जाए।
- तत्काल पुनर्वास: बेघर हुए परिवारों के लिए रहने की वैकल्पिक व्यवस्था (पुनर्वास) सुनिश्चित की जाए ताकि वे खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर न हों।
प्रशासन का आश्वासन और कांग्रेस की चेतावनी
प्रदर्शन की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारी हरकत में आए। काफी देर तक चले हंगामे और चर्चा के बाद, प्रशासन ने कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता की। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि प्राप्त आवेदन पर आज से ही विधिक प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी और नियमानुसार दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन के इस आश्वासन के बाद प्रदर्शनकारियों ने अपना घेराव समाप्त किया, हालांकि माहौल अभी भी तनावपूर्ण बना हुआ है।
कांग्रेस ने प्रशासन को सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि यदि समयबद्ध तरीके से इस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और अधिक उग्र और व्यापक बनाया जाएगा। पार्टी का कहना है कि यह केवल एक राजनीतिक प्रदर्शन नहीं है, बल्कि उन गरीब परिवारों की पीड़ा है जिन्हें रातों-रात बेघर कर दिया गया। भविष्य में यदि प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहता है, तो कांग्रेस सड़क से लेकर सदन तक इस मुद्दे को उठाएगी और प्रभावितों को उनका हक दिलाकर ही दम लेगी।
इस पूरे मामले ने रायपुर के प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन अपने वादे पर कितना खरा उतरता है और पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने में कितना समय लगता है। स्थानीय जनता भी इस मामले पर बारीकी से नजर बनाए हुए है, क्योंकि यह सीधे तौर पर गरीबों के मानवाधिकारों और उनके आवास के अधिकार से जुड़ा हुआ संवेदनशील मुद्दा है।





