Corruption: छत्तीसगढ़ में पहली ही बारिश में 2.88 करोड़ का पुल ढहा, निर्माण पर उठे सवाल

Summary

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में मानसून की दस्तक के साथ ही सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। छुरा विकासखंड के मड़ेली-जरगांव मार्ग पर घुनघुटी नाला के ऊपर बन रहे करोड़ों रुपए के उच्चस्तरीय पुल का एप्रोच रोड पहली ही तेज बारिश में पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है। इस…

गरियाबंद में मानसून की पहली बारिश ने खोली विकास के दावों की पोल, करोड़ों का पुल भ्रष्टाचार की भेंट

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में मानसून की दस्तक के साथ ही सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। छुरा विकासखंड के मड़ेली-जरगांव मार्ग पर घुनघुटी नाला के ऊपर बन रहे करोड़ों रुपए के उच्चस्तरीय पुल का एप्रोच रोड पहली ही तेज बारिश में पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है। इस पुल का निर्माण कार्य अभी पूर्ण भी नहीं हुआ था कि मिट्टी का भराव बहने और सड़क धंसने की घटनाओं ने निर्माण कार्य में बरती गई लापरवाही की पोल खोल दी है। इस घटना से स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और उन्होंने निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

इस परियोजना की लागत करीब 2.88 करोड़ रुपये बताई जा रही है। मौके पर मौजूद ग्रामीणों का कहना है कि जिस तरह से मिट्टी का भराव बह गया है, उससे साफ जाहिर होता है कि निर्माण कार्य में न केवल घटिया सामग्री का उपयोग किया गया है, बल्कि तकनीकी मानकों को भी पूरी तरह से ताक पर रखा गया है। बारिश के शुरुआती दौर में ही सड़क का इस कदर कट जाना यह साबित करता है कि पुल के आधारभूत ढांचे के साथ खिलवाड़ किया गया है।

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भाजपा नेता ने लगाए गंभीर आरोप

मामले की गंभीरता को देखते हुए भाजपा जिला उपाध्यक्ष प्रीतम सिन्हा ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने विभाग और ठेकेदार की मिलीभगत पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि यह परियोजना पिछले 5 वर्षों से लंबित थी। सिन्हा का आरोप है कि विभाग ठेकेदार पर मेहरबान रहा, जिसके कारण गुणवत्ता से समझौता किया गया। उन्होंने तर्क दिया कि 5 साल पुराने एसओआर (SOR) पर वर्तमान महंगाई के दौर में पुल का निर्माण करना ही अपने आप में एक चुनौती थी, जिसे पूरा करने के चक्कर में ठेकेदार ने मापदंडों की धज्जियां उड़ा दीं।

एसडीओ ने दी सफाई, भुगतान पर लगी रोक

इस पूरे मामले पर लोक निर्माण विभाग (PWD) की सेतु शाखा के एसडीओ एसके पंडोले ने अपना पक्ष रखा है। उन्होंने बताया कि निर्माण कार्य में देरी को देखते हुए ठेकेदार पर 6 प्रतिशत की पेनाल्टी लगाई गई है। एसडीओ के मुताबिक, बारिश से पहले पिचिंग का काम अधूरा रह गया था, जिसके कारण अचानक हुई भारी बारिश से एप्रोच रोड को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ठेकेदार के काम का भुगतान फिलहाल रोक दिया गया है और सुधार कार्य के निर्देश जारी किए गए हैं।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें और आक्रोश

स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन और विभाग की लापरवाही का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन के समक्ष अपनी तीन प्रमुख मांगें रखी हैं:

  • तत्काल मरम्मत: एप्रोच रोड को जल्द से जल्द दुरुस्त किया जाए ताकि आवागमन बहाल हो सके।
  • थर्ड पार्टी जांच: पूरे पुल निर्माण की तकनीकी जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए।
  • कठोर कार्रवाई: जांच में दोषी पाए जाने वाले ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो।

परियोजना की निगरानी पर उठ रहे सवाल

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि निर्माण स्थल पर लगे सूचना फलक के अनुसार, कई अधिकारी या तो सेवानिवृत्त हो चुके हैं या फिर संपर्क से बाहर हैं। पुरानी जानकारी और अधिकारियों के सक्रिय न होने से परियोजना की निगरानी पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, PWD सेतु शाखा के अधिकारी मनीष साहू ने इस निर्माण की पुष्टि की है, लेकिन विभाग की ओर से अभी तक कोई ठोस जवाब नहीं मिल पाया है।

क्या करोड़ों का निवेश हो जाएगा बेकार?

तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते एप्रोच रोड की मजबूती सुनिश्चित नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में और अधिक बारिश होने पर पूरा भराव बह सकता है। ऐसी स्थिति में करोड़ों की लागत से बना यह पुल आवागमन के लिए पूरी तरह अनुपयोगी साबित होगा। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन केवल लीपापोती करेगा या वास्तव में दोषियों पर कार्रवाई कर जनता का भरोसा बहाल करेगा।