Infrastructure: छत्तीसगढ़ में नया रेलवे ओवरब्रिज टूटा, रमन सिंह ने रेल मंत्री से की जांच की मांग

Summary

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में हाल ही में बनकर तैयार हुए तीन रेलवे ओवरब्रिजों में दरारें आने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। निर्माण कार्य के कुछ ही दिनों के भीतर पुलों की स्थिति जर्जर होने से न केवल आम जनता में भारी आक्रोश है, बल्कि यह प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा…

राजनांदगांव में नवनिर्मित रेलवे ओवरब्रिज में आईं दरारें, डॉ. रमन सिंह ने रेल मंत्री को लिखा कड़ा पत्र

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में हाल ही में बनकर तैयार हुए तीन रेलवे ओवरब्रिजों में दरारें आने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। निर्माण कार्य के कुछ ही दिनों के भीतर पुलों की स्थिति जर्जर होने से न केवल आम जनता में भारी आक्रोश है, बल्कि यह प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने इस पूरे प्रकरण को अत्यंत गंभीर बताते हुए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने पूरे निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के विरुद्ध कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।

डॉ. रमन सिंह ने अपने आधिकारिक पत्र में स्पष्ट किया है कि बरगा, आलीवारा और मुसरा में स्थित इन रेलवे ओवरब्रिजों का निर्माण प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना के अंतर्गत किया गया था। जून 2026 में ही इनका लोकार्पण किया गया था, लेकिन उद्घाटन के चंद हफ्तों के भीतर ही इनकी गुणवत्ता की पोल खुल गई। जुलाई की शुरुआत में हुई पहली बारिश के बाद ही पुलों में बड़ी दरारें दिखाई देने लगीं, जो सीधे तौर पर निर्माण एजेंसी की लापरवाही और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती हैं।

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निर्माण की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल

दस्तावेजों के अनुसार, इन पुलों का निर्माण दक्षिण-पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर जोन के अंतर्गत आने वाले नागपुर मंडल के डोंगरगढ़-राजनांदगांव रेलखंड पर हुआ था। इस परियोजना पर लगभग 26 करोड़ रुपये की बड़ी राशि खर्च की गई थी। हालांकि, निर्माण के इतने कम समय में पुलों का इस तरह क्षतिग्रस्त हो जाना तकनीकी मानकों के पालन पर बड़े सवाल खड़े करता है। जानकारी के अनुसार, बारिश के बाद इन ओवरब्रिजों पर 60 से 70 फीट लंबी और 15 से 20 सेंटीमीटर चौड़ी दरारें देखी गई हैं।

इतनी बड़ी दरारें किसी भी भारी वाहन या आवाजाही के लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं, जिसके कारण फिलहाल इन पुलों को सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है। स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि लोकार्पण के कुछ ही दिनों बाद पुल जवाब देने लगें, तो यह स्पष्ट है कि निर्माण सामग्री की गुणवत्ता के साथ समझौता किया गया है। जनता का मानना है कि सरकारी धन का यह खुला दुरुपयोग है और इसमें शामिल ठेकेदारों व जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

उच्च स्तरीय जांच की मांग और भविष्य की राह

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने अपने पत्र में जिन मुख्य बिंदुओं पर जोर दिया है, वे निम्नलिखित हैं:

  • उच्च स्तरीय जांच: पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी ऑडिट और निष्पक्ष जांच कराई जाए।
  • दोषियों का निर्धारण: निर्माण एजेंसी, ठेकेदार और परामर्शदाता (कंसल्टेंट) की जवाबदेही तय की जाए।
  • लापरवाही पर कार्रवाई: संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कठोर विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए।
  • जनसुरक्षा को प्राथमिकता: भविष्य में ऐसी परियोजनाओं में मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।

डॉ. रमन सिंह ने उम्मीद जताई है कि केंद्रीय रेल मंत्रालय इस संवेदनशील मामले को गंभीरता से लेगा और सार्वजनिक धन की बर्बादी करने वालों के खिलाफ शीघ्र कदम उठाएगा। इस बीच, सांसद संतोष पांडे ने भी इस मामले में रेल मंत्री को पत्र लिखकर कड़ी नाराजगी जताई है। अब सभी की निगाहें रेल मंत्रालय द्वारा गठित की जाने वाली जांच समिति पर टिकी हैं। फिलहाल, इन ओवरब्रिजों की सुरक्षा को लेकर स्थानीय प्रशासन भी सतर्क हो गया है और क्षेत्र में आवागमन को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।

यह मामला न केवल एक प्रशासनिक चूक का उदाहरण है, बल्कि यह उन सभी निर्माण कार्यों के लिए भी एक सबक है जो बिना उचित निगरानी के पूरे किए जाते हैं। जनता की गाढ़ी कमाई से बनी इन संपत्तियों का इस तरह ढहना शासन की छवि को प्रभावित करता है। अब देखना यह होगा कि केंद्र सरकार इस मामले में किस प्रकार का कड़ा रुख अपनाती है और कब तक दोषियों को उनके अंजाम तक पहुँचाया जाता है।

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