Chhattisgarh: बस्तर में धर्मांतरण पर बवाल, अधूरा ट्रामा सेंटर और किसान की मौत

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छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का पोलमपल्ली गांव इन दिनों एक संवेदनशील मुद्दे को लेकर सुर्खियों में है। धर्मांतरण के विवाद ने यहां केवल धार्मिक असंतोष को ही जन्म नहीं दिया है, बल्कि यह आदिवासी समाज की सदियों पुरानी परंपराओं और सामाजिक ढांचे के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि…

बस्तर में बढ़ता तनाव: सुकमा के पोलमपल्ली में धर्मांतरण और परंपराओं को लेकर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का पोलमपल्ली गांव इन दिनों एक संवेदनशील मुद्दे को लेकर सुर्खियों में है। धर्मांतरण के विवाद ने यहां केवल धार्मिक असंतोष को ही जन्म नहीं दिया है, बल्कि यह आदिवासी समाज की सदियों पुरानी परंपराओं और सामाजिक ढांचे के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के कुछ परिवारों ने पारंपरिक पूजा-पाठ की अनदेखी करते हुए खेतों में जुताई और धान की बुआई का कार्य शुरू कर दिया, जो कि यहां की मान्यताओं के विपरीत है। इस कृत्य ने स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।

विवाद इतना गहरा गया कि आक्रोशित ग्रामीणों ने संबंधित तीन परिवारों के घरों की छतें हटा दीं और उन्हें गांव से बाहर निकालने की मांग पर अड़ गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और कई दौर की बातचीत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है। गांव में धर्मांतरण के विरोध में जमकर नारेबाजी हुई और ग्रामीणों ने एक रैली निकालकर अपना रोष प्रकट किया। ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर एक विशेष ग्रामसभा बुलाने की मांग रखी है, ताकि इस मामले का निपटारा लोकतांत्रिक तरीके से हो सके। वर्तमान में गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल की तैनाती की गई है।

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बस्तर के स्वास्थ्य तंत्र पर सवाल: ट्रामा सेंटर का निर्माण दो साल बाद भी अधूरा

जगदलपुर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में ट्रामा सेंटर का निर्माण कार्य पिछले दो साल से कछुआ गति से चल रहा है। भवन का ढांचा तो तैयार है, लेकिन इसे शुरू करने के लिए आवश्यक संसाधन अभी भी नदारद हैं। इसका सीधा नुकसान उन गंभीर मरीजों को उठाना पड़ रहा है, जो सड़क हादसों या अन्य आपातकालीन स्थितियों में अस्पताल पहुंचते हैं। सुविधाओं के अभाव में उन्हें मजबूरन 300 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करके रायपुर रेफर किया जाता है, जो कई बार मरीजों की जान पर भारी पड़ता है।

  • अधूरी इमारत: निर्माण कार्य लंबे समय से लंबित है, जिससे करोड़ों रुपये की लागत का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है।
  • स्टाफ की कमी: कागजों में स्वीकृत डॉक्टर और नर्सों की नियुक्ति के बावजूद बुनियादी ढांचा तैयार नहीं है।
  • अनिवार्य सुविधाएं: एक मानक ट्रामा सेंटर के लिए जरूरी ओटी, वेंटिलेटर, सीटी स्कैन और ब्लड स्टोरेज का अभी भी अभाव है।
  • मरीजों की जान पर संकट: समय पर इलाज न मिलने से रेफरल की मजबूरी बनी हुई है।

विकास की नई किरण: कार्लाकोंटा गांव में पहली बार पहुंची बिजली

बस्तर के लोहण्डीगुड़ा ब्लॉक स्थित कार्लाकोंटा गांव के लिए यह एक ऐतिहासिक पल है। घने जंगलों के बीच बसे इस गांव के 43 परिवारों ने दशकों तक अंधेरे में जीवन बिताने के बाद पहली बार बिजली की रोशनी देखी है। करीब एक करोड़ रुपये की लागत से विद्युत लाइन और ट्रांसफार्मर की स्थापना की गई है। इस सुविधा के मिलने से अब ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार की उम्मीद जगी है। विशेष रूप से बच्चों की शिक्षा और रात के समय घरेलू कामकाज में अब काफी सहूलियत होगी, जो इस क्षेत्र के लिए विकास की एक नई शुरुआत है।

ऑयल पॉम की खेती से किसानों की बढ़ी चिंता

बस्तर में ऑयल पॉम की खेती को एक नई क्रांति के रूप में पेश किया गया था, लेकिन अब यह किसानों के लिए चिंता का सबब बन गई है। जिले के लगभग 123 किसानों ने 300 हेक्टेयर भूमि पर ऑयल पॉम के पौधे लगाए हैं। किसानों का मुख्य दर्द यह है कि इस फसल से आय शुरू होने में कम से कम तीन साल का लंबा समय लगता है। इस अवधि के दौरान उन्हें केवल खर्च और देखभाल करनी पड़ रही है, जिससे आर्थिक दबाव बढ़ गया है। किसान अब सरकार से अतिरिक्त वित्तीय सहायता और बेहतर तकनीकी मार्गदर्शन की मांग कर रहे हैं ताकि वे इस खेती के प्रति अपना भरोसा बनाए रख सकें।

खेत में मौत का तांडव: विद्युत करंट से किसान की दर्दनाक मृत्यु

भानपुरी थाना क्षेत्र के कुम्हली गांव में सिंचाई के दौरान हुए एक हादसे ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। पूर्व सरपंच टीकम सिंह बघेल धान की रोपाई के लिए खेत में मोटर पंप का कनेक्शन जोड़ रहे थे, तभी विद्युत प्रवाहित होने से उन्हें जोरदार करंट लग गया। मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया और अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। यह दुखद घटना एक बार फिर खेतों में विद्युत उपकरणों के सुरक्षित उपयोग और सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

सीसीटीवी फुटेज के बाद भी कार्रवाई पर उठे सवाल

धरमपुर में एक बुजुर्ग सुरक्षा गार्ड के साथ मारपीट का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। घटना का सीसीटीवी वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। परिजनों का आरोप है कि फुटेज में साफ तौर पर आरोपियों की बर्बरता दिख रही है, इसके बावजूद पुलिस ने हल्की धाराओं में केस दर्ज किया, जिससे आरोपियों को आसानी से राहत मिल गई। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि मामले की गहन जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर सख्त धाराओं को जोड़ा जाएगा।

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