Corruption: पंचायत मंत्री के क्षेत्र में सड़क घोटाले पर बड़ी कार्रवाई, इंजीनियर निलंबित

Summary

छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत बनाई गई सड़क की गुणवत्ता को लेकर सामने आई गंभीर लापरवाही पर सरकार ने कड़ा रुख अपना लिया है। उपमुख्यमंत्री और पंचायत मंत्री विजय शर्मा के स्पष्ट निर्देश के बाद बोड़ला विकासखंड के खारिया से अगरी तक बनी इस सड़क की राज्य स्तरीय तकनीकी जांच…

कवर्धा में सड़क निर्माण में भारी गड़बड़ी: डिप्टी सीएम के सख्त निर्देश पर बड़ी कार्रवाई, जिम्मेदार अधिकारी निलंबित

छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत बनाई गई सड़क की गुणवत्ता को लेकर सामने आई गंभीर लापरवाही पर सरकार ने कड़ा रुख अपना लिया है। उपमुख्यमंत्री और पंचायत मंत्री विजय शर्मा के स्पष्ट निर्देश के बाद बोड़ला विकासखंड के खारिया से अगरी तक बनी इस सड़क की राज्य स्तरीय तकनीकी जांच की गई। जांच के दौरान सड़क निर्माण में भारी अनियमितताएं और तकनीकी खामियां पाई गईं, जिसके चलते प्रशासन ने निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की है।

इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह ने स्वयं मौके पर पहुंचकर जांच का नेतृत्व किया। जांच प्रक्रिया के दौरान कोर कटिंग के माध्यम से सड़क की मजबूती का परीक्षण किया गया, जिसमें चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। निर्माण में लापरवाही बरतने के आरोप में जहां निर्माण एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, वहीं विभागीय अधिकारियों पर भी गाज गिरी है।

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लापरवाही पर अधिकारियों पर गिरी गाज

सड़क निर्माण की गुणवत्ता की निगरानी में कोताही बरतने के लिए सहायक अभियंता सौरभ देशमुख और उप अभियंता जे. रितेश नायडू को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा, इस परियोजना के सुपरविजन में शामिल कार्यपालन अभियंता संतोष ठाकुर के विरुद्ध भी अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उनके निलंबन का प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। सरकार का यह कदम स्पष्ट करता है कि लोक निर्माण कार्यों में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या गुणवत्ता के साथ समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

जांच के दौरान यह बात सामने आई कि सड़क के धंसने का मुख्य कारण केवल भारी वाहनों का दबाव नहीं, बल्कि सड़क के ‘शोल्डर’ (किनारों) का निर्माण निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप न होना भी था। सचिव भीम सिंह ने मौके पर ही निर्माण एजेंसी को निर्देश दिए कि क्षतिग्रस्त सड़क के हिस्से को पूरी तरह से उखाड़कर दोबारा गुणवत्तापूर्ण निर्माण किया जाए। साथ ही, भविष्य में सड़क की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ओवरलोड वाहनों के आवागमन पर पूरी तरह से रोक लगाने के सख्त आदेश दिए गए हैं।

निर्माण के चार माह बाद ही सामने आई हकीकत

बैगा आदिवासी बहुल क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की ‘प्रधानमंत्री जनमन योजना’ के अंतर्गत लगभग 2.50 करोड़ रुपये की लागत से 3.50 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण किया गया था। इस सड़क का उद्देश्य स्थानीय आदिवासियों को शिक्षा, स्वास्थ्य और बाजार जैसी बुनियादी सुविधाओं से सुलभता से जोड़ना था। हालांकि, निर्माण के केवल चार महीने बाद ही पहली बारिश में सड़क का एक बड़ा हिस्सा धंस गया, जिससे विभाग के दावों की पोल खुल गई।

वायरल वीडियो ने खोली पोल

सड़क के खराब होने का मामला तब तूल पकड़ गया जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ। इस वीडियो में साफ देखा जा सकता था कि सड़क पर चलते हुए एक वाहन का पहिया जमीन में धंस गया है, जो सड़क की जर्जर हालत और घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग की कहानी बयां कर रहा था। वीडियो के वायरल होने के बाद स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा गया, जिसके बाद राज्य सरकार ने मामले को संज्ञान में लेकर उच्च स्तरीय टीम गठित की।

जांच में क्या-क्या मिला?

तकनीकी जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर गौर किया गया, जो निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करते हैं:

  • तकनीकी खामियां: सड़क की मुख्य परत के मानकों में तो कुछ हद तक सुधार पाया गया, लेकिन किनारों (शोल्डर) का निर्माण बेहद कमजोर पाया गया।
  • क्षमता से अधिक भार: सड़क को 12 टन की भार क्षमता के लिए डिजाइन किया गया था, जबकि मौके पर 60 से 70 टन वजन वाले रेत से लदे हाईवा वाहनों का आवागमन हो रहा था।
  • निर्माण एजेंसी पर कार्रवाई: गुणवत्ता के साथ समझौता करने वाली निर्माण एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
  • दोबारा निर्माण का निर्देश: प्रशासन ने क्षतिग्रस्त हिस्से को अपनी लागत से पुन: निर्मित करने का आदेश ठेकेदार को दिया है।

कवर्धा जिले में हुई यह कार्रवाई उन सभी ठेकेदारों और अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है, जो सरकारी धन का दुरुपयोग कर आम जनता के जीवन के साथ खिलवाड़ करते हैं। सरकार ने यह सुनिश्चित करने का संकल्प लिया है कि आने वाले समय में आदिवासी अंचलों में बनने वाली हर सड़क मानक के अनुरूप हो और उस पर चलने वाले ग्रामीणों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।