बारनवापारा अभयारण्य में तीन चीतलों की मौत से मचा हड़कंप, वन विभाग ने शुरू की जांच
छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध बारनवापारा अभयारण्य से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है, जहां तीन चीतलों (हिरण) की मौत ने वन विभाग में हड़कंप मचा दिया है। यह घटना अभयारण्य के विस्थापित ग्राम रामपुर के पास स्थित कक्ष क्रमांक-127 में घटित हुई है। सोमवार और मंगलवार के बीच मिले इन शवों ने वन्यजीव प्रेमियों और वन अधिकारियों की नींद उड़ा दी है। वन विभाग के अनुसार, इनमें से दो चीतलों की मौत आपस में लड़ने के कारण हुई है, जबकि तीसरे चीतल की मौत के कारणों को लेकर अभी भी संशय बना हुआ है और इसे शिकार की दृष्टि से देखा जा रहा है।
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग के उच्चाधिकारी और स्थानीय टीम मौके पर पहुंची। घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया गया और साक्ष्य जुटाए गए। विभाग ने तत्काल प्रभाव से मृत चीतलों के शवों का पंचनामा तैयार किया और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी करने के बाद वैज्ञानिक तरीके से उनका दाह संस्कार कर दिया गया। फिलहाल, वन विभाग के अधिकारी इस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं किसी शिकारी गिरोह का हाथ तो नहीं है।
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आपसी संघर्ष में गई दो नर चीतलों की जान
बारनवापारा अभयारण्य के अधीक्षक कृष्णानु चंद्राकर ने इस मामले में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि दो नर चीतलों की मौत का कारण आपसी लड़ाई है। घटनास्थल की स्थिति को देखकर यह स्पष्ट हुआ कि दोनों नर चीतल आपस में भिड़ गए थे। इस संघर्ष के दौरान दोनों के सींग एक-दूसरे में बुरी तरह फंस गए थे। सींगों को छुड़ाने के लिए दोनों ने काफी जद्दोजहद की, लेकिन सफल नहीं हो सके।
- संघर्ष का भयावह मंजर: सींग फंसने के कारण दोनों चीतलों की गर्दन की हड्डियां टूट गईं।
- गंभीर चोटें: अत्यधिक रक्तस्राव और गर्दन में गंभीर चोट लगने के कारण दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।
- साक्ष्य: घटनास्थल पर काफी मात्रा में खून के निशान मिले हैं, जो संघर्ष की तीव्रता को दर्शाते हैं।
- बड़ी संख्या: अधीक्षक के अनुसार, रामपुर क्षेत्र में चीतलों की संख्या काफी अधिक है, यहां लगभग 3,000 चीतल विचरण करते हैं।
तीसरे चीतल की मौत बनी पहेली, शिकार की आशंका
दो चीतलों की मौत का कारण स्पष्ट होने के बाद भी, तीसरे चीतल की मौत वन विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। यह चीतल भी उसी क्षेत्र में मृत पाया गया, लेकिन उसकी मौत के लक्षण सामान्य नहीं हैं। विभाग को आशंका है कि यह मामला शिकार से जुड़ा हो सकता है। हालांकि, अधिकारी इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि क्या उस पर किसी जंगली जानवर या आवारा कुत्तों के झुंड ने हमला किया था।
वन विभाग की टीम ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चीतल की मौत के वास्तविक कारणों का पता चल पाएगा। इस क्षेत्र में काले हिरणों का भी रहवास है, जिसे देखते हुए वन विभाग अब अपनी गश्त और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा करने की योजना बना रहा है। घटना के बाद से ही अभयारण्य क्षेत्र में वन रक्षकों को अलर्ट पर रखा गया है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
फिलहाल, वन विभाग के अधिकारी पूरे मामले की बारीकी से पड़ताल कर रहे हैं। स्थानीय लोगों से भी पूछताछ की जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिल सके। बारनवापारा जैसे महत्वपूर्ण अभयारण्य में वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन अब कोई भी ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।





