Fraud: छत्तीसगढ़ में शिक्षकों से करोड़ों की ठगी, 5 आरोपी गिरफ्तार

Summary

छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में एक बड़े वित्तीय घोटाले का पर्दाफाश हुआ है, जिसने पूरे शिक्षा विभाग और बैंकिंग जगत में हड़कंप मचा दिया है। फरसगांव और केशकाल थाना क्षेत्र में सक्रिय एक शातिर गिरोह ने शिक्षकों को पर्सनल लोन दिलाने का प्रलोभन देकर करीब 10 से 12 करोड़ रुपये की ठगी की है। पुलिस…

कोंडागांव में शिक्षकों को करोड़ों का चूना लगाने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़, 5 गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में एक बड़े वित्तीय घोटाले का पर्दाफाश हुआ है, जिसने पूरे शिक्षा विभाग और बैंकिंग जगत में हड़कंप मचा दिया है। फरसगांव और केशकाल थाना क्षेत्र में सक्रिय एक शातिर गिरोह ने शिक्षकों को पर्सनल लोन दिलाने का प्रलोभन देकर करीब 10 से 12 करोड़ रुपये की ठगी की है। पुलिस ने करीब तीन महीने तक चली गहन तकनीकी जांच और सर्विलांस के बाद इस संगठित गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। आरोपियों के पास से भारी मात्रा में आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण बरामद किए गए हैं।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, अब तक की जांच में 43 शिक्षकों के साथ धोखाधड़ी की पुष्टि हुई है, लेकिन पीड़ितों का मानना है कि यह आंकड़ा कहीं अधिक हो सकता है। कई शिक्षक सामाजिक प्रतिष्ठा और लोक-लाज के डर से पुलिस के पास आने से कतरा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चाएं हैं कि जिले के करीब 150 से 200 शिक्षक इस सुनियोजित जालसाजी का शिकार हुए हैं, जिससे यह मामला राज्य का सबसे बड़ा लोन फ्रॉड केस बन सकता है।

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शिकायतों से खुला करोड़ों की ठगी का राज

इस बड़े घोटाले का खुलासा तब हुआ जब फरसगांव निवासी संजय कोडोपी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि उन्हें और उनके कई शिक्षक साथियों को बैंक लोन दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये का चूना लगाया गया है। इसी तरह की शिकायतें बड़ेडोंगर निवासी अनंत कुमार निर्मलकर और केशकाल के देवेंद्र किशोर खवास व योगेश्वर बैद्य जैसे अन्य शिक्षकों ने भी दर्ज कराई। इन गंभीर शिकायतों के आधार पर पुलिस ने चार अलग-अलग मामले दर्ज किए और मामले की तह तक जाने के लिए विशेष जांच टीम का गठन किया।

ऐसे फंसाते थे शिक्षक जाल में

पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी बेहद शातिराना अंदाज में काम करते थे। वे पहले शिक्षकों से संपर्क कर उन्हें आसान किस्तों पर पर्सनल लोन दिलाने का झांसा देते थे। लोन स्वीकृत होने के बाद, वे शिक्षकों को केवल 40 प्रतिशत राशि थमा देते थे, जबकि शेष 60 प्रतिशत रकम को अपने और अपने सहयोगियों के फर्जी खातों में ट्रांसफर कर लेते थे।

  • आरोपी पीड़ितों को भरोसा दिलाते थे कि लोन की पूरी किस्त और ब्याज वही भरेंगे।
  • फर्जी आधार कार्ड और कूटरचित दस्तावेजों का सहारा लेकर बैंकों को गुमराह किया जाता था।
  • बैंकों के लोन डेटाबेस (CIBIL) अपडेट होने में लगने वाले 6-7 दिनों के समय का फायदा उठाया जाता था।
  • एक साथ कई बैंकों से लोन लेकर आरोपी रकम के साथ फरार हो जाते थे।

तीन महीने तक चली तकनीकी पड़ताल

कोंडागांव पुलिस अधीक्षक पंकज चंद्रा के निर्देशन में गठित विशेष टीम ने दिन-रात एक कर इस नेटवर्क को ध्वस्त किया। जांच में पाया गया कि आरोपियों ने न केवल दस्तावेजों में हेरफेर किया, बल्कि बैंक के कुछ दलालों के साथ मिलकर एक समानांतर बैंकिंग व्यवस्था जैसा जाल बिछा रखा था। पुलिस ने आरोपियों के पास से लैपटॉप, डेस्कटॉप, एटीएम कार्ड, चेकबुक और बैंक पासबुक जब्त किए हैं, जो इस पूरे रैकेट की कलाई खोलने के लिए पर्याप्त हैं।

गिरफ्तार आरोपियों की सूची

पुलिस ने इस मामले में अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय गिरोह के निम्नलिखित सदस्यों को गिरफ्तार किया है:

  • शिवशंकर दास (अंबिकापुर)
  • दिलीप कुमार सोनी (अंबिकापुर)
  • विरेंद्र तिर्की (जशपुर)
  • श्यामसुंदर जांगड़े (सारंगढ़)
  • अंशुमान सिंह (अंबिकापुर)

बैंकिंग सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

यह मामला बैंकिंग प्रणाली की सुरक्षा में बड़ी खामियों को भी उजागर करता है। एक ही व्यक्ति के नाम पर कुछ ही दिनों के भीतर कई बैंकों से लोन स्वीकृत हो जाना, सिस्टम की विफलता को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बैंकों के बीच रियल-टाइम डेटा साझा करने की व्यवस्था होती, तो इस प्रकार की धोखाधड़ी को समय रहते रोका जा सकता था। फिलहाल, पुलिस अन्य जिलों में भी इस गिरोह के तार जुड़े होने की संभावना की जांच कर रही है और आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।