Missing: एयरफोर्स अधिकारी की 12 साल की बेटी स्कूल से लापता, CCTV में दिखी आखिरी झलक

Summary

मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एयरफोर्स के एक अधिकारी की 12 वर्षीय बेटी स्कूल से रहस्यमयी परिस्थितियों में लापता हो गई थी। इस घटना के बाद न केवल स्कूल प्रशासन…

ग्वालियर में एयरफोर्स अधिकारी की बेटी के लापता होने से मचा हड़कंप, चार घंटे की मशक्कत के बाद सुरक्षित बरामद

मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एयरफोर्स के एक अधिकारी की 12 वर्षीय बेटी स्कूल से रहस्यमयी परिस्थितियों में लापता हो गई थी। इस घटना के बाद न केवल स्कूल प्रशासन में हड़कंप मच गया, बल्कि पुलिस विभाग भी पूरी तरह सक्रिय हो गया। बच्ची के गायब होने की खबर फैलते ही शहरभर में अलर्ट जारी कर दिया गया और पुलिस की कई टीमें उसकी तलाश में जुट गईं। करीब चार घंटे तक चले सघन सर्च ऑपरेशन के बाद बच्ची को हाईवे से सकुशल बरामद कर लिया गया, जिससे परिजनों ने राहत की सांस ली है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना ग्वालियर के एक नामी स्कूल की है। दोपहर में स्कूल की छुट्टी होने के बाद जब सभी छात्र अपनी-अपनी बसों में सवार हो रहे थे, तब इस छात्रा ने अपनी निर्धारित बस में बैठने के बजाय दूसरी बस का रुख किया। जब स्कूल के शिक्षकों ने उसे टोका, तो छात्रा ने बेहद चतुराई से झूठ बोला कि उसके माता-पिता पास ही स्थित सूर्य मंदिर गए हैं और वह भी वहीं जा रही है। शिक्षिका को जब इस पर संदेह हुआ, तो उन्होंने परिजनों से संपर्क करने के लिए छात्रा से उनका मोबाइल नंबर मांगा। छात्रा ने जानबूझकर एक गलत नंबर लिखवा दिया, जिससे स्कूल प्रबंधन का शक और गहरा गया।

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गलत नंबर ने खोली पोल, पुलिस की तत्परता से टला बड़ा हादसा

जब स्कूल प्रशासन ने छात्रा द्वारा दिए गए नंबर पर कॉल किया, तो वह नंबर गलत निकला। इस स्थिति ने स्कूल स्टाफ के होश उड़ा दिए। उन्हें तुरंत समझ आ गया कि मामला गंभीर है और छात्रा बिना किसी अनुमति या अभिभावकों की जानकारी के स्कूल से बाहर निकल गई है। स्कूल प्रबंधन ने बिना देरी किए इसकी सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस को दी। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे ‘हाई प्रोफाइल’ केस की तरह लिया और तत्काल प्रभाव से शहर की नाकाबंदी कर दी। सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालना शुरू किया गया ताकि यह पता चल सके कि छात्रा किस दिशा में गई है।

पुलिस की जांच में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आईं:

  • सीसीटीवी फुटेज: पुलिस ने स्कूल और आसपास के रास्तों के सीसीटीवी कैमरों को खंगालकर छात्रा के हुलिए और उसके मूवमेंट को ट्रेस किया।
  • सर्च ऑपरेशन: जड़ेरुआ बांध के पास छात्रा का स्कूल बैग बरामद हुआ, जिससे पुलिस को उसकी लोकेशन खोजने में काफी मदद मिली।
  • हाईवे पर नाकाबंदी: शहर के प्रमुख रास्तों और हाईवे पर पुलिस की टीमें तैनात की गईं ताकि बच्ची किसी अनजान वाहन में न बैठ सके।
  • सकुशल बरामदगी: करीब चार घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद महाराजपुरा के जहांगीरपुर हाईवे से बच्ची को सुरक्षित बरामद कर लिया गया।

पुलिस कर रही है मामले की गहन जांच

पुलिस के पहुंचते ही छात्रा काफी डरी हुई और सहमी हुई अवस्था में मिली। उसे देखकर वह रोने लगी, जिसके बाद महिला पुलिसकर्मियों ने उसे ढांढस बंधाया और सुरक्षित परिजनों के सुपुर्द कर दिया। हालांकि, बच्ची के सकुशल मिलने से सभी ने राहत की सांस ली है, लेकिन यह घटना कई गंभीर सवाल छोड़ गई है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि आखिर एक 12 साल की बच्ची ने स्कूल से अकेले निकलने का फैसला क्यों किया? क्या इसके पीछे कोई मानसिक दबाव था, या फिर किसी ने उसे बहला-फुसलाकर वहां तक पहुंचाया था?

प्रारंभिक जांच में फिलहाल किसी भी तरह की आपराधिक साजिश के संकेत नहीं मिले हैं, लेकिन पुलिस हर पहलू पर बारीकी से काम कर रही है। स्कूल प्रबंधन की सतर्कता और पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने समय रहते इस मामले को सुलझा लिया, वरना कोई बड़ी अनहोनी घट सकती थी। यह घटना सभी स्कूलों के लिए एक सबक है कि वे परिसर से बाहर निकलने वाले छात्रों की निगरानी के प्रति और अधिक सख्त रुख अपनाएं। पुलिस का कहना है कि वे छात्रा के काउंसलिंग सत्र के बाद ही इस पूरे घटनाक्रम के पीछे के असल कारणों का खुलासा कर पाएंगे। फिलहाल, पूरा मामला जांच के दायरे में है।