बदरीनाथ धाम में वीआईपी दर्शन के नाम पर अवैध वसूली, सहायक प्रमोद नौटियाल पर गिरी गाज
देवभूमि उत्तराखंड स्थित विश्व प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में एक बार फिर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। इस बार विवादों के केंद्र में बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के अध्यक्ष का वैयक्तिक सहायक (PA) प्रमोद नौटियाल है। आरोप है कि नौटियाल ने मंदिर की गरिमा को तार-तार करते हुए वीआईपी दर्शन के नाम पर श्रद्धालुओं से अवैध वसूली की है। इस खुलासे के बाद से ही पूरे मंदिर प्रशासन और तीर्थयात्रियों के बीच हड़कंप मचा हुआ है। मंदिर समिति ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रमोद नौटियाल पर श्रद्धालुओं से प्रति व्यक्ति 1100 रुपये की अवैध वसूली करने का आरोप है। यह रकम वीआईपी दर्शन के नाम पर ली जा रही थी, जो कि पूरी तरह से नियमों के विरुद्ध और अनैतिक है। मंदिर के पुजारियों और स्थानीय लोगों ने इस संबंध में पहले भी कई बार अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया। अब मंदिर समिति ने प्रमोद नौटियाल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है और उनके खिलाफ संबंधित थानों में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
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निलंबन और चार सदस्यीय जांच समिति का गठन
प्रमोद नौटियाल की कार्यप्रणाली को लेकर जब शिकायतें लगातार बढ़ने लगीं, तो बीकेटीसी प्रशासन ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक ठोस कदम उठाया। मंदिर समिति ने बीते 7 जुलाई को एक औपचारिक आदेश जारी करते हुए नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। इससे पहले, 3 जुलाई को ही उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, जिसमें उनसे उनके पद के दुरुपयोग को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया था। समिति ने मामले की तह तक जाने के लिए चार सदस्यीय जांच टीम का गठन किया है, जो इस पूरे घोटाले की बारीकी से पड़ताल कर रही है।
जांच समिति की प्रारंभिक रिपोर्ट में यह स्पष्ट हो गया है कि प्रमोद नौटियाल पर लगे आरोप प्रथम दृष्टया सही हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि नौटियाल ने अपने पदीय दायित्वों का घोर उल्लंघन किया है। समिति ने अपनी सिफारिश में यह भी उल्लेख किया है कि यदि आरोपी को उसके पद पर बने रहने दिया जाता, तो जांच प्रक्रिया प्रभावित हो सकती थी। इसी कारण से उसे तत्काल प्रभाव से उसके मूल कार्यक्षेत्र से हटाकर ज्योतिर्मठ (चमोली) स्थित बीकेटीसी कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है।
क्या है पूरा मामला और आगे की कार्रवाई?
बदरीनाथ धाम में चढ़ावे की चोरी और वीआईपी दर्शन के नाम पर वसूली का यह मामला कोई छोटा नहीं है। मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। बीकेटीसी के उच्चाधिकारियों का कहना है कि मंदिर की पारदर्शिता और जवाबदेही उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन अब अपनी निगरानी व्यवस्था को और अधिक कड़ा करने की योजना बना रहा है ताकि कोई भी कर्मचारी पद का दुरुपयोग न कर सके।
इस पूरे घटनाक्रम के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
- अवैध वसूली: वीआईपी दर्शन के नाम पर प्रत्येक श्रद्धालु से 1100 रुपये की अवैध मांग की गई।
- निलंबन की कार्रवाई: बीकेटीसी ने गंभीर अनियमितताओं के चलते प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
- जांच का दायरा: चार सदस्यीय समिति पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर रही है ताकि अन्य संभावित संलिप्तताओं का पता लगाया जा सके।
- प्रशासनिक स्पष्टता: आरोपी कर्मचारी को चमोली जिले के ज्योतिर्मठ कार्यालय से संबद्ध किया गया है ताकि जांच निष्पक्ष बनी रहे।
- आस्था की सुरक्षा: मंदिर समिति ने तीर्थयात्रियों से अपील की है कि वे किसी भी अनधिकृत व्यक्ति को वीआईपी दर्शन के नाम पर कोई भी शुल्क न दें।
फिलहाल, बदरीनाथ धाम में इस कार्रवाई को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। भक्तों का कहना है कि भगवान के दरबार में इस तरह का भ्रष्टाचार न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह करोड़ों हिंदुओं की आस्था के साथ एक बड़ा धोखा भी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए गढ़वाल कमिश्नर की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है, जो इस पूरे चढ़ावा घोटाले की परतें खोलेगी। उम्मीद जताई जा रही है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ और भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
