राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का अनूठा संदेश: ट्रेन से कानपुर पहुंचीं कुलाधिपति, दीक्षांत समारोह में बेटियों का रहा दबदबा
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने गुरुवार को एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया। लखनऊ से कानपुर तक की अपनी आधिकारिक यात्रा के लिए उन्होंने सड़क मार्ग के बजाय रेल मार्ग को चुना। राज्यपाल का यह निर्णय न केवल सादगी का प्रतीक था, बल्कि इसके पीछे पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा की बचत और सार्वजनिक परिवहन के प्रति लोगों को जागरूक करने का एक बड़ा संदेश भी छिपा था। इस यात्रा के माध्यम से उन्होंने यह संदेश दिया कि देश के विकास और पर्यावरण को बचाने के लिए हम सभी को छोटे-छोटे स्तर पर बदलाव लाने की आवश्यकता है।
कानपुर स्थित छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) के 41वें दीक्षांत समारोह में पहुंचीं राज्यपाल का भव्य स्वागत किया गया। इस गौरवमयी अवसर पर विश्वविद्यालय के हजारों विद्यार्थियों को उनकी मेहनत का फल मिला। समारोह में कुल 1,05,066 विद्यार्थियों को उनकी डिग्रियां प्रदान की गईं। विशेष बात यह रही कि मेधा सूची में बेटियों ने बाजी मारी। कुल 51 मेधावी विद्यार्थियों को पदक से सम्मानित किया गया, जिनमें 42 छात्राएं और केवल 9 छात्र शामिल थे, जो महिला सशक्तिकरण की एक शानदार मिसाल है।
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एचपीवी टीकाकरण और स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष जोर
दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल का शुभारंभ किया। उन्होंने कानपुर नगर और कानपुर देहात के लिए 500 आंगनबाड़ी किट वितरित कीं और 800 बालिकाओं के लिए एचपीवी (HPV) टीकाकरण अभियान की शुरुआत की। राज्यपाल ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि प्रदेश में एचपीवी टीकाकरण अभियान को अगले एक वर्ष के भीतर शत-प्रतिशत पूरा किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में सर्वाइकल कैंसर जैसी बीमारियों से बेटियों को बचाया जा सके।
इसके अलावा, राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों में ‘मोबाइल मेडिकल केयर वैन’ की सुविधा शुरू करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि यह सेवा न केवल गोद लिए गए गांवों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाएगी, बल्कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को भी नियमित स्वास्थ्य परामर्श उपलब्ध कराएगी। उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक संसाधनों से लैस करने के निर्देश दिए ताकि जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य और पोषण का ढांचा मजबूत हो सके।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति और सर्वांगीण विकास का आह्वान
राज्यपाल ने अपने संबोधन में शिक्षा व्यवस्था में सुधार और नवाचार को बढ़ावा देने पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को केवल डिग्री बांटने का केंद्र नहीं, बल्कि समाज निर्माण की प्रयोगशाला बनना चाहिए। उन्होंने निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया:
- विश्वविद्यालयों में ‘गर्भ संस्कार’ जैसे महत्वपूर्ण पाठ्यक्रम शुरू किए जाएं।
- अशिक्षित महिलाओं को साक्षर बनाने के लिए विशेष अभियान चलाए जाएं।
- परिसर को पूरी तरह से स्वच्छ और नशामुक्त बनाया जाए।
- जल संरक्षण के प्रति युवाओं को जागरूक किया जाए।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप बुनियादी ढांचे का तेजी से विकास हो।
विद्यार्थियों को नवाचार और कौशल विकास की सीख
समारोह के दौरान राज्यपाल ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी दिनचर्या में पुस्तकालय को अनिवार्य हिस्सा बनाएं। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि अपने विचारों को लिपिबद्ध करें और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने विश्वविद्यालयों को निर्देश दिए कि जो विद्यार्थी किन्हीं कारणों से अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ चुके हैं, उन्हें कौशल विकास के विभिन्न पाठ्यक्रमों से जोड़ा जाए।
इसके साथ ही, उन्होंने डिजिटल इंडिया की दिशा में कदम बढ़ाते हुए विद्यार्थियों को ‘डिजिटल लॉकर’ के माध्यम से डिग्रियां उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को तेज करने का निर्देश दिया। दीक्षांत समारोह से पहले राज्यपाल ने विश्वविद्यालय में लगे स्टार्टअप एक्सपो का भी अवलोकन किया, जहां उन्होंने युवाओं की रचनात्मकता को देखा। उन्होंने पांच नई परियोजनाओं का लोकार्पण किया और 10 विकास कार्यों का शिलान्यास भी किया।
समारोह के समापन पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों, नवप्रवर्तक विद्यार्थियों और विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया। राज्यपाल का यह दौरा शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को एक नई दिशा देने वाला साबित हुआ।





