Worship: गोवर्धन पूजा पर व्रत कथा का पाठ करें, कृष्ण जी देंगे blessings

Summary

गोवर्धन पूजा हिंदू धर्म का एक विशेष पर्व है, जिसे हर वर्ष कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से भगवान श्री कृष्ण की उपासना के लिए जाना जाता है। इस दिन की खासियत यह है कि इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को…

Worship: गोवर्धन पूजा पर व्रत कथा का पाठ करें, कृष्ण जी देंगे blessings

गोवर्धन पूजा हिंदू धर्म का एक विशेष पर्व है, जिसे हर वर्ष कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से भगवान श्री कृष्ण की उपासना के लिए जाना जाता है। इस दिन की खासियत यह है कि इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाकर गांववासियों की रक्षा की थी। इस अद्भुत घटना के माध्यम से भगवान कृष्ण ने यह संदेश दिया कि हमें प्रकृति और माता-पृथ्वी की पूजा करनी चाहिए। गोवर्धन पूजा का यह पर्व दिवाली के ठीक दूसरे दिन मनाया जाता है, और इस दिन व्रत करने तथा गोवर्धन पूजा की कथा का पाठ करने का महत्व है। इस दिन व्रत करने से भक्तों की सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं और भगवान कृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

गोवर्धन पूजा व्रत कथा (Govardhan Puja Katha 2025)

गोवर्धन पूजा की कथा के अनुसार, एक बार ब्रज में लोग इंद्र देव की पूजा की तैयारी कर रहे थे। इस दौरान भगवान श्री कृष्ण, मां यशोदा के साथ भ्रमण पर निकले और मां से पूछा कि ये सभी व्यंजन किसके लिए बनाए जा रहे हैं। मां यशोदा ने बताया कि यह पूजा इंद्र देव को प्रसन्न करने के लिए होती है, ताकि वे बारिश कर सकें और अन्न, जल, घास आदि की प्रचुरता बनी रहे। इस पर भगवान कृष्ण ने मुस्कुराते हुए कहा कि ‘मां, बारिश तो प्रकृति का नियम है, इसका कारण इंद्र नहीं, बल्कि गोवर्धन पर्वत है, जो मेघों को रोककर वर्षा कराता है।’ यह सुनकर नगरवासियों ने कृष्ण जी की बात मानकर इंद्र की पूजा छोड़ कर गोवर्धन पर्वत की पूजा शुरू कर दी। इस निर्णय से इंद्र देव क्रोधित हो गए और उन्होंने आदेश दिया कि ब्रजभूमि पर इतनी जोरदार वर्षा करें कि पूरा गांव डूब जाए।

इंद्र के आदेश से बारिश इतनी तेज हुई कि घर, गौशालाएं और खेत सब डूबने लगे। इस कठिनाई में सभी ब्रजवासी, गोप-गोपिकाएं और गायें भगवान कृष्ण के पास पहुंचे और सहायता मांगी। भगवान श्री कृष्ण ने सभी को गोवर्धन पर्वत की तलहटी में आने का कहा और स्वयं गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठा लिया। सभी नगरवासियों ने गोवर्धन पर्वत के नीचे शरण ली। इंद्र के क्रोध के कारण लगातार बारिश होती रही, लेकिन गोवर्धन पर्वत की छांव में किसी को भी कोई हानि नहीं हुई। जब इंद्र ने देखा कि इतना भारी पर्वत एक छोटे बालक ने अपनी उंगली पर उठा रखा है, तो उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ। देवर्षि नारद के कहने पर इंद्र श्री कृष्ण के पास आए और क्षमा मांगी। श्री कृष्ण ने इंद्र को समझाया कि अहंकार हर व्यक्ति को अंधा बना देता है और उन्हें यह सीखने की आवश्यकता है कि कभी भी शक्ति और पद का घमंड नहीं करना चाहिए। इस घटना के बाद से हर वर्ष गोवर्धन पूजा के रूप में इस दिव्य लीला को याद किया जाता है, और लोग अपने घरों में गाय के गोबर से गोवर्धन की आकृति बनाकर उसकी पूजा करते हैं।

गोवर्धन पूजा का महत्व क्या है

गोवर्धन पूजा के दिन घरों और मंदिरों में गोबर या मिट्टी से गोवर्धन पर्वत का स्वरूप बनाकर उसकी पूजा विधि-विधान से की जाती है। इस दिन दूध, दही, घी, मिठाई, फल और 56 भोग का प्रसाद गोवर्धन पर्वत को अर्पित किया जाता है, जिसे अन्नकूट प्रसाद कहा जाता है। भक्त इस पर्वत की परिक्रमा करते हैं, जिससे सभी दुखों और पापों का नाश होता है। गोवर्धन पूजन का यह पर्व विशेष रूप से मथुरा में अत्यंत मनमोहक होता है। यहां भक्त दूर-दूर से श्री कृष्ण और गोवर्धन महाराज की परिक्रमा करने आते हैं। इस दिन गायों और बैलों को सजाया जाता है और उन्हें गुड़ तथा चना खिलाया जाता है। लोग भक्ति भाव से ‘गोवर्धन महाराज की जय’ के जयकारे लगाते हैं।

इस दिन तरह-तरह के व्यंजन बनाकर भगवान श्री कृष्ण को भोग लगाया जाता है, जिसे फिर सभी भक्तों में प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। यह माना जाता है कि अन्नकूट का प्रसाद खाने से लोगों को दीर्घायु का वरदान मिलता है और रोग-दोष दूर होते हैं। यदि आप भी गोवर्धन पूजा के दिन इस व्रत कथा का पाठ करती हैं, तो आपके जीवन में सुख, समृद्धि और शांति बनी रहती है। यदि आपको यह कहानी पसंद आई हो, तो इसे फेसबुक पर साझा करना न भूलें। इसी तरह के अन्य लेखों के लिए हरजिंदगी से जुड़े रहें।

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