Start: “Govardhan” गोवर्धन पूजा पर नए कार्य की शुरूआत, जानें चौघड़िया मुहूर्त

Summary

गोवर्धन पूजा: महत्व और मुहूर्त गोवर्धन पूजा का महत्व गोवर्धन पूजा का त्योहार हिन्दू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह पूजा विशेष रूप से भगवान श्री कृष्ण की उस अद्भुत लीला का स्मरण करती है, जब उन्होंने इंद्र देव के प्रकोप से गांववासियों को बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी अंगुली…

Start: “Govardhan” गोवर्धन पूजा पर नए कार्य की शुरूआत, जानें चौघड़िया मुहूर्त

गोवर्धन पूजा: महत्व और मुहूर्त

गोवर्धन पूजा का महत्व

गोवर्धन पूजा का त्योहार हिन्दू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह पूजा विशेष रूप से भगवान श्री कृष्ण की उस अद्भुत लीला का स्मरण करती है, जब उन्होंने इंद्र देव के प्रकोप से गांववासियों को बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी अंगुली पर उठाया था। यह घटना न केवल भगवान कृष्ण की महानता को दर्शाती है, बल्कि यह भी सिखाती है कि हमें प्रकृति के प्रति आदर और सम्मान करना चाहिए।

इस दिन, भक्तगण अपने-अपने घरों में गोबर से गोवर्धन बनाएंगे और उनकी पूजा करेंगे। इस पूजा को मनाने का तरीका गांव से गांव में भिन्न हो सकता है, लेकिन इसका उद्देश्य एक ही होता है – भगवान कृष्ण के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करना और उनके द्वारा दिए गए उपदेशों को अपने जीवन में उतारना।

गोवर्धन पूजा के विशेष आयोजन

गोवर्धन पूजा के दौरान विशेष रूप से यह ध्यान रखा जाता है कि सभी अनुष्ठान सही समय पर किए जाएं। इस पूजा को हर्षोल्लास और भक्ति भाव से मनाने के लिए भक्तजन कई प्रकार की तैयारी करते हैं। घरों में विशेष पकवान बनाए जाते हैं और भगवान कृष्ण की झांकी सजाई जाती है। इस अवसर पर भक्तगण अपने परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर पूजा करते हैं, जिससे सामाजिक एकता भी बढ़ती है।

पंडित सौरभ त्रिपाठी जी, जो छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश के निवासी हैं, ने गोवर्धन पूजा के लिए कुछ विशेष चौघड़िया मुहूर्त साझा किए हैं। इन मुहूर्तों का पालन करके भक्तगण अपनी पूजा को सही समय पर संपन्न कर सकते हैं। सही मुहूर्त का ध्यान रखना पूजा की सफलता के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

गोवर्धन पूजा के चौघड़िया मुहूर्त

  • प्रातः 6:00 से 7:30 बजे तक – यह समय पूजा के लिए सबसे शुभ माना जाता है।
  • दोपहर 12:00 से 1:30 बजे तक – इस समय में भी पूजा का आयोजन किया जा सकता है।
  • शाम 5:00 से 6:30 बजे तक – इस समय में गोवर्धन की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
  • रात्रि 8:00 से 9:30 बजे तक – इस समय भी पूजा करना लाभकारी माना जाता है।

गोवर्धन पूजा का आयोजन कैसे करें

गोवर्धन पूजा का आयोजन करते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए। सबसे पहले, घर के कोने-कोने को स्वच्छ करना चाहिए और एक स्थान पर गोबर से गोवर्धन बनाएँ। इसके अलावा, फूल, फलों और मिठाइयों से पूजा की थाली सजाना न भूलें। भक्तगण भगवान कृष्ण के नाम का जाप करते हुए अपने परिवार के साथ मिलकर पूजा करते हैं।

पूजा के अंत में, सभी उपस्थित लोगों को प्रसाद वितरण करें, जिससे सभी को भगवान की कृपा प्राप्त हो सके। यह भी ध्यान रखें कि पूजा के समय मन में शुद्धता और भक्ति का भाव होना चाहिए।

गोवर्धन पूजा का सामूहिक आयोजन

कई जगहों पर गोवर्धन पूजा का सामूहिक आयोजन भी किया जाता है। इस प्रकार के आयोजनों में गांव के सभी लोग एकत्र होकर पूजा करते हैं। यह न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सामाजिक एकता को भी बढ़ावा देता है। सामूहिक पूजा में विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है, जिससे सभी का मनोबल ऊँचा रहता है।

निष्कर्ष

गोवर्धन पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज में भाईचारे और एकता का प्रतीक है। इस अवसर पर हम सभी को भगवान श्री कृष्ण की शिक्षाओं को अपनाने का संकल्प लेना चाहिए। यदि आपको यह लेख पसंद आया हो, तो कृपया इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें। इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़े रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिंदगी के साथ।

Exit mobile version