Renovation: इन शुभ मुहूर्तों में करें घर का नवीनीकरण, जानें पंचांग

Summary

21 अक्टूबर 2025 का पंचांग विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इस दिन **कार्तिक अमावस्या** मनाई जाएगी। इसे स्नान-दान और पितरों के तर्पण के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन **दर्श अमावस्या** भी है, जो धार्मिक अनुष्ठानों और जप-तप के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह तिथि शाम **5:54 बजे** तक रहेगी, इसलिए…

Renovation: इन शुभ मुहूर्तों में करें घर का नवीनीकरण, जानें पंचांग

21 अक्टूबर 2025 का पंचांग विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इस दिन **कार्तिक अमावस्या** मनाई जाएगी। इसे स्नान-दान और पितरों के तर्पण के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन **दर्श अमावस्या** भी है, जो धार्मिक अनुष्ठानों और जप-तप के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह तिथि शाम **5:54 बजे** तक रहेगी, इसलिए सुबह और दिन के समय दान-पुण्य करने का विशेष महत्व होगा। ज्योतिषाचार्य **पंडित सौरभ त्रिपाठी** के अनुसार, इस दिन मंगलवार होने के कारण इसे **भौमवती अमावस्या** भी कहा जा सकता है। यह कर्ज से मुक्ति और मंगल दोष को शांत करने के लिए अच्छा माना जाता है, लेकिन मुख्य रूप से यह दिन पितरों को याद करने और पुण्य कर्म करने के लिए समर्पित है।

21 अक्टूबर 2025 का व्रत और त्योहार

21 अक्टूबर 2025 का दिन मुख्य रूप से **कार्तिक अमावस्या** के कारण खास है, जिसे स्नान और दान-पुण्य के लिए बहुत शुभ माना जाता है। धार्मिक रूप से इसे **दर्श अमावस्या** के रूप में मनाया जाता है, जो पितरों (पूर्वजों) के तर्पण (उन्हें जल अर्पित करना) और श्राद्ध कर्मों के लिए विशेष फलदायी होता है। इस दिन मंगलवार होने के कारण इसे **भौमवती अमावस्या** भी कहते हैं, जिसका लाभ कर्ज से मुक्ति पाने और मंगल दोष दूर करने के लिए उठाया जाता है।

हालांकि, इस दिन दीपावली का मुख्य लक्ष्मी पूजन **20 अक्टूबर** को होगा। इसलिए, 21 अक्टूबर को सूर्योदय से शाम तक अमावस्या होने के कारण यह दिन अमावस्या के स्नान-दान और पितृ कर्मों के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण रहेगा। इस दिन को पवित्रता और श्रद्धा के साथ मनाना चाहिए, ताकि पितरों का आशीर्वाद प्राप्त किया जा सके।

21 अक्टूबर 2025 के लिए विशेष उपाय

21 अक्टूबर 2025 को **कार्तिक मास** की अमावस्या है, इसलिए इस दिन के उपाय मुख्य रूप से पितरों (पूर्वजों) को समर्पित होने चाहिए। आपको सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी में या घर पर ही पानी में **गंगाजल** मिलाकर स्नान करना चाहिए। अमावस्या तिथि शाम **5:56 बजे** तक है, इसलिए इस समय से पहले अपने पितरों के लिए जल, तिल और कुश से तर्पण करें। इसके अलावा, किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को भोजन, वस्त्र या धन का दान करें।

पीपल के पेड़ के नीचे **तेल का दीपक** जलाकर भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। यह कार्य विशेष रूप से इस दिन के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है। इस तरह के उपाय न केवल धार्मिक होते हैं, बल्कि यह मानसिक शांति और संतोष भी प्रदान करते हैं।

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image credit: herzindagi

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