Chhath पूजा: उषा अर्घ्य के बाद व्रत पारण कैसे करें? जानें नियम और महत्व

छठ महापर्व का पारण: एक धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व छठ महापर्व के चार दिनों में सबसे कठिन और महत्वपूर्ण दिन होता है व्रत का पारण। यह एक विशेष क्रिया है, जिसके माध्यम से व्रती 36 घंटे के कठोर उपवास का समापन करते हैं। छठ पूजा का चौथा और अंतिम दिन, उषा अर्घ्य यानी उगते हुए…

Chhath पूजा: उषा अर्घ्य के बाद व्रत पारण कैसे करें? जानें नियम और महत्व

छठ महापर्व का पारण: एक धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

छठ महापर्व के चार दिनों में सबसे कठिन और महत्वपूर्ण दिन होता है व्रत का पारण। यह एक विशेष क्रिया है, जिसके माध्यम से व्रती 36 घंटे के कठोर उपवास का समापन करते हैं। छठ पूजा का चौथा और अंतिम दिन, उषा अर्घ्य यानी उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रत पारण किया जाता है। यह पल केवल व्रत की समाप्ति का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह छठी मैया और सूर्य देव को उनके आशीर्वाद के लिए धन्यवाद देने का भी एक महत्वपूर्ण क्षण है। पारण विधि पूरी शुद्धता, श्रद्धा और पारंपरिक नियमों का पालन करते हुए की जाती है, जो इस पर्व का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व दर्शाती है।

छठ पूजा 2025 का व्रत पारण मुहूर्त

इस वर्ष छठ पूजा का उषा अर्घ्य 28 अक्टूबर, मंगलवार को किया जाएगा। पंचांग के अनुसार, सूर्योदय का समय और उषा अर्घ्य का शुभ मुहूर्त सुबह लगभग 06 बजकर 30 मिनट से 06 बजकर 37 मिनट तक रहेगा। इसके बाद व्रत पारण का मुहूर्त सुबह 11 बजकर 14 मिनट तक रहेगा। यह समय व्रतियों के लिए विशेष महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके बाद वे अपने कठिन उपवास का समापन कर सकते हैं।

उषा अर्घ्य के बाद छठ पूजा का व्रत पारण

छठ पूजा का चौथा दिन कार्तिक शुक्ल सप्तमी तिथि होता है, जिसे पारण का दिन भी कहा जाता है। इस दिन व्रत करने वाली महिलाएं पूरे विधि-विधान से अपना व्रत खोलती हैं। व्रती इस दिन सूर्योदय से पहले नदी, तालाब या घाट पर पहुंच जाती हैं। वहां पर वे संध्या अर्घ्य की तरह ही पानी में खड़े होकर, पूजन सामग्री के साथ उगते हुए सूर्य का इंतजार करती हैं। जैसे ही सूर्य की पहली किरणें प्रकट होती हैं, व्रती सूर्य देव को दूध और जल से अंतिम अर्घ्य देती हैं, जिसे उषा अर्घ्य कहा जाता है।

अर्घ्य देने के बाद, व्रती छठी मैया और सूर्य देव से परिवार की सुख-समृद्धि, बच्चों की लंबी आयु और मंगल कामना करती हैं। इस अनुष्ठान के बाद, कई व्रती घाट पर ही 7 या 11 बार परिक्रमा करती हैं। यह परिक्रमा उनके श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक होती है।

छठ पूजा 2025 व्रत पारण विधि

घाट से घर लौटने के बाद, व्रत रखने वाली महिला अपना कठिन निर्जला व्रत खोलती हैं, जिसे पारण या परना कहा जाता है। पारण से पहले, वह छठ पूजा के प्रसाद को पहले परिवार के सदस्यों और फिर आस-पास के लोगों के बीच बांटती हैं। इसके बाद, वह अपने बड़े-बुजुर्गों के पैर छूकर आशीर्वाद लेती हैं और अन्य लोग व्रती से आशीर्वाद ग्रहण करती हैं।

व्रत का पारण करने के लिए सबसे पहले व्रती जल या दूध का शरबत जैसे कि सादा जल, गंगाजल, या कच्चा दूध/गंगाजल मिला हुआ शरबत पीकर व्रत की शुरुआत करती हैं। इसके तुरंत बाद, वे छठी मैया को चढ़ाए गए प्रसाद, खासकर ठेकुआ और फलों को ग्रहण करती हैं। यह प्रक्रिया न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक शुद्धता का भी प्रतीक है।

छठ पूजा 2025 व्रत पारण का नियम

व्रत पारण के बाद भी पूरे दिन घर में सात्विक भोजन ही बनाया और खाया जाता है। लहसुन, प्याज या किसी भी प्रकार के तामसिक भोजन का प्रयोग उस दिन भी पूरी तरह वर्जित होता है। यह एक महत्वपूर्ण नियम है कि व्रती जब प्रसाद ग्रहण कर व्रत खोल लेती हैं, तभी परिवार के अन्य सदस्य उस प्रसाद या भोजन को ग्रहण कर सकते हैं। यह नियम दर्शाता है कि व्रत का महत्व केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामूहिक भी होता है।

छठ महापर्व का पारण न केवल भक्ति का एक अनूठा उदाहरण है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति की गहराई और विविधता को भी दर्शाता है। इस पर्व में शामिल होने वाले सभी लोग एक साथ मिलकर अपने परिवार और समाज की भलाई के लिए प्रार्थना करते हैं।

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image credit: herzindagi



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