Maoists: झारखंड में बढ़ती एंटी- insurgency कार्रवाई के बीच दो माओवादी आत्मसमर्पण करते हैं

Summary

झारखंड में माओवादी नेताओं ने किया आत्मसमर्पण झारखंड के चतरा जिले में शुक्रवार को प्रतिबंधित संगठन तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति समिति (टीएसपीसी) के दो वरिष्ठ माओवादी नेताओं ने अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण किया। अधिकारियों के अनुसार, यह घटना स्थानीय प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों की पहचान कुनाल उर्फ कुलदीप और…

Maoists: झारखंड में बढ़ती एंटी- insurgency कार्रवाई के बीच दो माओवादी आत्मसमर्पण करते हैं

झारखंड में माओवादी नेताओं ने किया आत्मसमर्पण

झारखंड के चतरा जिले में शुक्रवार को प्रतिबंधित संगठन तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति समिति (टीएसपीसी) के दो वरिष्ठ माओवादी नेताओं ने अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण किया। अधिकारियों के अनुसार, यह घटना स्थानीय प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों की पहचान कुनाल उर्फ कुलदीप और रोहिणी गंजू के रूप में हुई है। दोनों टीएसपीसी के क्षेत्रीय कमांडर थे और उनके सिर पर एक लाख रुपये का इनाम था। उनके आत्मसमर्पण के बाद, पुलिस ने राज्य सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति के अनुसार उन्हें इनाम राशि के चेक सौंपे।

आत्मसमर्पण की प्रक्रिया और अधिकारियों की उपस्थिति

यह आत्मसमर्पण उपायुक्त कार्यालय के मीटिंग हॉल में हुआ, जहां बोकारो रेंज के आईजी सुनील भास्कर, उपायुक्त कीर्ति, पुलिस अधीक्षक सुमित कुमार अग्रवाल, बीएसएफ के मनवेन्द्र कुमार सिंह और एसएसबी कमांडेंट संजीव कुमार मौजूद थे। इस प्रकार की उच्च स्तरीय उपस्थिति से यह स्पष्ट होता है कि प्रशासन माओवादी गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए गंभीर है।

आत्मसमर्पण के दौरान, माओवादियों ने पुलिस के सामने एक एसएलआर राइफल, एक सेमी-ऑटोमैटिक राइफल और लगभग 200 राउंड जीवित गोलियां भी सौंपीं। यह हथियारों का समर्पण इस बात का संकेत है कि माओवादी संगठन के तत्व क्षेत्र में कमजोर पड़ रहे हैं।

माओवादी नेताओं के खिलाफ आपराधिक मामले

अधिकारियों के अनुसार, कुनाल के खिलाफ चतरा और पलामू जिलों में कुल 16 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जबकि गंजू 10 से अधिक गंभीर मामलों मेंWanted है, जिसमें सुरक्षा बलों पर हमले और वसूली के मामले शामिल हैं।

पुलिस अधीक्षक अग्रवाल ने बताया कि दोनों माओवादियों को लगातार संवाद और काउंसलिंग के माध्यम से आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित किया गया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में माओवादी कैडर लगातार कमजोर हो रहे हैं, जो कि स्थानीय प्रशासन की रणनीतिक सफलता का संकेत है।

झारखंड सरकार की पुनर्वास नीति “नई दिशाएं”

झारखंड सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों के लिए एक विशेष पुनर्वास नीति “नई दिशाएं” शुरू की है। इस नीति के तहत, जो लोग हथियार डालते हैं उन्हें खुली जेलों में रखा जाता है, जहां उन्हें कानूनी सहायता, वित्तीय सहायता और कौशल विकास का समर्थन प्रदान किया जाता है। इसके अलावा, सरकार उनके बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था भी करती है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष जनवरी से सितंबर के बीच, राज्य पुलिस ने 266 माओवादियों को गिरफ्तार किया है, जबकि 30 माओवादी आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट आए हैं। इसी अवधि में झारखंड में 32 माओवादी मुठभेड़ों में मारे गए हैं, जो कि बढ़ती हुई आतंकवाद विरोधी कार्रवाई का परिणाम है।

निष्कर्ष

इस आत्मसमर्पण से यह स्पष्ट होता है कि झारखंड सरकार माओवादी गतिविधियों के खिलाफ सख्त कदम उठा रही है और स्थानीय प्रशासन की रणनीतियां सफल होती दिखाई दे रही हैं। स्थानीय पुलिस और सुरक्षा बलों के प्रयासों से माओवादी संगठन की गतिविधियों में कमी आ रही है, जो क्षेत्र के विकास के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

आगे बढ़ते हुए, यह देखना होगा कि क्या अन्य माओवादी नेता भी आत्मसमर्पण करने के लिए प्रेरित होते हैं और राज्य सरकार की पुनर्वास योजनाओं का लाभ उठाते हैं। इस प्रकार के कदम से न केवल आतंकवाद का मुकाबला किया जा सकेगा, बल्कि समाज में शांति और स्थिरता भी स्थापित की जा सकेगी।

Exit mobile version