अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का भारत को चेतावनी: रूसी तेल खरीद में कमी लाने का दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से यह दावा किया है कि भारत ने अपने रूसी तेल खरीद को सीमित करने पर सहमति जताई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि नई दिल्ली ऐसा नहीं करती है, तो उसे “विशाल टैरिफ” का सामना करना पड़ सकता है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप ने एयर फोर्स वन पर पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “मैंने भारत के प्रधानमंत्री मोदी से बात की, और उन्होंने कहा कि वह रूसी तेल खरीदने का काम नहीं करेंगे।” हालांकि, भारत ने इस तरह की बातचीत के होने से इनकार किया है, इसके बावजूद ट्रंप ने इस दावे को दोहराया।
भारतीय विदेश मंत्रालय का स्पष्टीकरण
नई दिल्ली की ओर से ट्रंप के इस दावे को खारिज करने के बाद, उन्होंने कहा, “अगर वे ऐसा कहना चाहते हैं, तो उन्हें विशाल टैरिफ का भुगतान करते रहना होगा, और वे ऐसा नहीं करना चाहते।” इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने एक साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा, “हमने पहले ही इस मामले पर एक बयान जारी किया है, जिसे आप देख सकते हैं। पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच कोई बातचीत नहीं हुई है।”
रूस से तेल खरीद में कमी का ट्रंप का दावा
शुक्रवार को, राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया कि भारत ने रूसी तेल खरीद में “कम किया है,” जब वह यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की से व्हाइट हाउस में मिले। उन्होंने कहा, “भारत अब रूसी तेल नहीं खरीदेगा। और उन्होंने पहले ही कम किया है, और उन्होंने अधिकतर रोक लिया है; वे पीछे हट रहे हैं। उन्होंने लगभग 38 प्रतिशत तेल खरीदा था, और अब वे ऐसा नहीं करेंगे।”
अगस्त में, ट्रंप प्रशासन ने रूस से तेल खरीदने के लिए भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया था, जबकि चीन के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। इस कदम ने भारत और अमेरिका के बीच संबंधों में तनाव को बढ़ा दिया है।
भारत और अमेरिका के बीच तनावपूर्ण संबंध
भारत के लिए यह स्थिति जटिल है, क्योंकि उसे अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न स्रोतों की आवश्यकता है। रूस से तेल खरीद पर ट्रंप की चेतावनी का असर भारत के विदेश नीति पर पड़ सकता है। भारत ने हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार निर्णय लेने का प्रयास किया है, और इस मामले में भी ऐसा ही किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाना होगा, ताकि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखते हुए अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भी प्रभावित न करे। भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के लिए दोनों देशों के बीच संवाद जारी रहना आवश्यक है।
निष्कर्ष
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का यह दावा कि भारत ने रूसी तेल खरीद में कमी करने पर सहमति जताई है, एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा बन गया है। हालांकि भारत ने इस पर स्पष्ट रूप से इनकार किया है, फिर भी इस तरह की बातचीत का होना और उसके बाद की प्रतिक्रिया दोनों देशों के बीच संबंधों को प्रभावित कर सकती है। आने वाले दिनों में, यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत इस स्थिति का कैसे सामना करता है और क्या वह अपनी ऊर्जा खरीद नीति में कोई बदलाव लाता है।
(सूत्र: IANS)
