जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपाल का आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक प्रयासों पर जोर
जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आतंकवादियों और उनके समर्थकों के नापाक इरादों को विफल करने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने जवानों के बलिदान को स्मरण करते हुए कहा कि हमें उनके पर्यावरण को नष्ट करने की आवश्यकता है। यह वक्तव्य उन्होंने जवान पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर दिया, जो हर साल 21 अक्टूबर को मनाया जाता है। इस अवसर पर स्रीनगर के जवान पुलिस परिसर में अधिकारियों और गणमान्य व्यक्तियों ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
इस कार्यक्रम में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के अलावा वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी उपस्थित थे। समारोह के दौरान, गणमान्य व्यक्तियों ने शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की और शहीद पुलिस कर्मियों को श्रद्धांजलि दी। यह दिन जवान पुलिस परिसर के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह स्थान दिसंबर 2021 में एक आतंकवादी हमले का शिकार हुआ था, जिसमें पुलिस बस पर हमला किया गया था।
पुलिस स्मृति दिवस का ऐतिहासिक महत्व
पुलिस स्मृति दिवस हर साल पूरे भारत में मनाया जाता है। इस दिन का इतिहास 21 अक्टूबर 1959 से जुड़ा है, जब केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के दस जवानों को लद्दाख में एक चीनी घात में शहीद किया गया था। यह दिन उन सभी पुलिसकर्मियों की याद में मनाया जाता है, जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता के बाद देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।
जवान पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर उपराज्यपाल सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जम्मू और कश्मीर पुलिस के 1,614 शहीद पुलिस कर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उपराज्यपाल सिन्हा ने कहा कि पुलिस कर्मियों का बलिदान पैसों से नहीं मापा जा सकता और उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि शहीदों के परिवारों को किसी भी कठिनाई का सामना न करना पड़े।
आतंकवाद के खिलाफ दृढ़ संकल्प
सिन्हा ने यह भी कहा कि पूरे देश में जम्मू और कश्मीर पुलिस की भूमिका और उनके मजबूत संकल्प को मान्यता दी गई है। उन्होंने बल की सराहना की और कहा कि कई अधिकारियों के लिए उनकी “ड्यूटी ही उनका कर्तव्य” है। उपराज्यपाल ने यह भी उल्लेख किया कि जम्मू और कश्मीर के लोग पिछले पांच वर्षों में आतंकवाद के खिलाफ दृढ़ संकल्प दिखा चुके हैं।
उन्होंने क्षेत्र में स्थापित “आतंकवादी पारिस्थितिकी” को समाप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि हमें सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है ताकि आतंकवादी और उनके समर्थक अपने इरादों में सफल न हो सकें। सिन्हा ने भारत के उपनिवेशी युग के आपराधिक कानूनों से आगे बढ़ने की दिशा में तीन नए कानूनों की भी चर्चा की, जो न्याय और नागरिकों के अधिकारों पर केंद्रित हैं।
आधुनिक तकनीकों का उपयोग
उपराज्यपाल सिन्हा ने पुलिस बल से अपील की कि वे आधुनिक उपकरणों और स्मार्ट तकनीकों का उपयोग करें ताकि वे गलत सूचनाओं और निर्मित कथाओं का मुकाबला कर सकें। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहल से पुलिस बल की क्षमता में वृद्धि होगी और वे आतंकवादी गतिविधियों के खिलाफ और प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेंगे।
इस प्रकार, जम्मू और कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को सफल बनाना केवल पुलिस बल की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। सामूहिक प्रयासों और दृढ़ संकल्प के जरिए ही हम सुरक्षा और शांति स्थापित कर सकते हैं।
